प्रोजेक्ट 17A के अंतर्गत निर्मित दो मल्टी-मिशन स्टील्थ फ्रिगेट्स - INS उदयगिरि और INS हिमगिरि - को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।
- फ्रिगेट्स बहुउद्देशीय प्लेटफ़ॉर्म होते हैं, जिन्हें युद्धपोत या जहाजी बेड़े के अन्य जहाजों को समुद्री खतरों से सुरक्षित रखने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
प्रोजेक्ट 17A के बारे में
- ये शिवालिक-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17) फ्रिगेट्स के फ़ॉलो-ऑन (आगामी) युद्धपोत या जहाज हैं।
- भारत में कुल 7 फ्रिगेट्स का निर्माण मझगांव डॉक, मुंबई और GRSE, कोलकाता द्वारा स्वदेशी प्रयासों से किया जा रहा है।
- इनका मुख्य प्रणोदन संयंत्र कंबाइन्ड डीजल ऑर गैस (CODOG) कॉन्फ़िगरेशन पर आधारित है, जिसमें एक डीजल इंजन और एक गैस टरबाइन सम्मिलित है।
- इन फ्रिगेट्स को ऐसे हथियारों से सुसज्जित किया गया है जिनमें सुपरसोनिक सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, मध्यम दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली तथा रैपिड-फ़ायर (तेज़-गति वाली) तोप प्रणाली शामिल हैं।
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1 sourceCCMB की वैज्ञानिक टीम ने एक प्रोग्राम्ड जैविक प्रक्रिया का पता लगाया है, जो कोशिकाओं को लगभग मृत्यु की स्थिति से वापस लौटा सकती है, जिसे प्रोग्राम्ड सेल रिवाइवल (PCR) नाम दिया गया है।
प्रोग्राम्ड सेल रिवाइवल (PCR) के बारे में
- आमतौर पर प्रोग्राम्ड सेल डेथ (PCD) यानी कोशिकाओं की नियंत्रित मृत्यु की प्रक्रिया अपरिवर्तनीय होती है।
- PCD एक आनुवंशिक रूप से नियंत्रित प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाएं खुद को नष्ट कर लेती हैं। इसके उदाहरणों में एपोप्टोसिस, ऑटोफैगी और नेक्रोपोटोसिस शामिल हैं।
- CCMB ने एक “आनुवंशिक रूप से एन्कोड किए गए रिवाइवल कोड” की खोज की है, जो कोशिकाओं को मृत्यु के क़रीब पहुँच चुकी अवस्था से वापस लाने में मदद करता है। इसी प्रक्रिया को प्रोग्राम्ड सेल रिवाइवल (PCR) कहा गया है।
संभावित महत्त्व
- पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine): यह क्षतिग्रस्त तंत्रिका कोशिकाओं या हृदय की कोशिकाओं को मरने की बजाय जीवित रहने के लिए प्रेरित कर सकती है।
- कैंसर अनुसंधान: यहाँ अवांछित “सेल रिवाइवल” ट्यूमर कोशिकाओं को थेरेपी के प्रति प्रतिरोधी बनने में मदद कर सकता है।
- स्टेम सेल बायोलॉजी: इस क्षेत्र में भी इसके महत्वपूर्ण उपयोग हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने मिल्की वे में UPM J1040−3551 AabBab नामक एक दुर्लभ क्वाड्रपल स्टार सिस्टम (अर्थात् चतुष्क तारकीय प्रणाली) की खोज की है।
- यह प्रणाली दो ठंडे ब्राउन ड्वार्फ से बनी है, जो दो युवा रेड ड्वार्फ तारों की परिक्रमा कर रहे हैं।
ब्राउन ड्वार्फ्स के बारे में
- ब्राउन ड्वार्फ्स ऐसे खगोलीय पिंड हैं जो तारों की तरह गैस और धूल के बादलों के गुरुत्वीय संकुचन से बनते हैं, लेकिन इनमें लगातार हाइड्रोजन संलयन बनाए रखने के लिए पर्याप्त द्रव्यमान नहीं होता।
- इसी कारण इन्हें अक्सर “विफल तारे” (Failed Stars) कहा जाता है।
- इनका वायुमंडल विशाल गैसीय ग्रहों जैसे बृहस्पति से मिलता-जुलता है।
- ग्रहों और ब्राउन ड्वार्फ्स के बीच मुख्य अंतर उनके द्रव्यमान और ड्यूटेरियम संलयन की क्षमता में है; ब्राउन ड्वार्फ्स ड्यूटेरियम संलयन कर सकते हैं, जबकि ग्रह ऐसा नहीं कर पाते।
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1 sourceभारत ने पहली बार 3GPP के RAN (रेडियो एक्सेस नेटवर्क) मीटिंग्स की मेज़बानी की, जिनका फोकस 6G स्टैंडर्डाइजेशन (मानकीकरण) पर है।
- इस बैठक की मेजबानी टेलीकम्युनिकेशंस स्टैंडर्ड्स डेवलपमेंट सोसाइटी, इंडिया (TSDSI) द्वारा की जा रही है।
- TSDSI भारत की मान्यताप्राप्त स्टैंडर्ड्स डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (SDO) है।
- TSDSI भारत की विशिष्ट दूरसंचार/ ICT आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक्सेस, बैक-हॉल और इन्फ्रास्ट्रक्चर सिस्टम, समाधान और सेवाओं के मानक विकसित करता है।
थर्ड जेनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट (3GPP) के बारे में
- उत्पत्ति: इसकी स्थापना 1998 में 3G मोबाइल मानकों के विकास हेतु की गई थी।
- कार्य: यह एक वैश्विक निकाय है, जो मोबाइल संचार प्रौद्योगिकियों (3G से लेकर 5G और अब 6G तक) के लिए स्पेसिफिकेशन्स तैयार करता है।
- 3GPP द्वारा विकसित स्पेसिफिकेशन्स या विनिर्देश ही वैश्विक मोबाइल नेटवर्क्स की आधारशिला के रूप में कार्य करते हैं।
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1 sourceसुप्रीम कोर्ट ने कथित पर्यावरणीय उल्लंघन के एक मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत ED जांच का आदेश देने के लिए NGT की कड़ी आलोचना करते हुए इसे कानून का उल्लंघन और अपने अधिकार क्षेत्र से परे बताया है।
NGT के बारे में:
- स्थापना: वर्ष 2010 में, राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत।
- उद्देश्य: पर्यावरण संरक्षण, वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मामलों का प्रभावी एवं त्वरित निपटारा करना।
- नियत समय: किसी आवेदन या अपील के दायर होने के 6 महीने के भीतर अंतिम रूप से निपटाने के लिए प्रयास करना अनिवार्य है।
- यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की औपचारिक प्रक्रिया से बाध्य नहीं है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार कार्य करता है।
- प्रधान पीठ (मुख्यालय): नई दिल्ली।
- अन्य चार पीठ: भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई।
केरल में, ‘आरोग्यपाचा’ को वैश्विक स्तर पर प्रकाश में लाने वाले कुट्टिमथन कानी का निधन हो गया।
आरोग्यपाचा के बारे में
- ‘आरोग्यपाचा’ का शाब्दिक अर्थ है- “शक्ति देने वाला हरा पौधा”।
- यह भारत का एक दुर्लभ, स्वदेशी औषधीय पौधा है। यह तुरंत ऊर्जा देने, थकान दूर करने और चिकित्सा गुणों के लिए जाना जाता है।
- औषधीय गुण: यह एंटीऑक्सीडेंट, तनाव-रोधी, रोगाणु-रोधी, सूजन-रोधी, ट्यूमर-रोधी, अल्सर-रोधी और मधुमेह-रोधी गुणों से भरपूर है।
- यह अगस्त्य पहाड़ियों (पश्चिमी घाट) में रहने वाले स्थानीय ‘कानी’ जनजाति द्वारा पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है।
- केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित “ट्रॉपिकल बॉटैनिक गार्डन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (TBGRI)” ने ‘आरोग्यपाचा’ और तीन अन्य सामग्री से मिलकर ‘जीवनी’ नामक एक दवा विकसित की है।
- इस दवा से होने वाली व्यावसायिक कमाई का 50% हिस्सा कानी जनजाति को मिलता है।
अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE) ने घोषणा की है कि FIDE विश्व कप 2025 का आयोजन भारत के गोवा में किया जाएगा।
FIDE विश्व कप के बारे में
- यह FIDE द्वारा आयोजित एक प्रमुख शतरंज प्रतियोगिता है। FIDE शतरंज के लिए अंतर्राष्ट्रीय शासी निकाय है।
- FIDE की स्थापना 1924 में पेरिस में एक ग़ैर-सरकारी संस्था के रूप में हुई थी। हालांकि, अब इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के लॉज़ेन में है।
- इस प्रतियोगिता में शीर्ष तीन स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी 2026 के कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करेंगे।