भारत में क्लाइमेट रेजिलिएंट शहरों के निर्माण की आवश्यकता है | Current Affairs | Vision IAS
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अत्यधिक मानसूनी वर्षा और नदियों के उफान से पंजाब के शहरों में शहरी बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है। 

  • भारत में शहरी आबादी के 2020 के 480 मिलियन से बढ़कर 2050 तक लगभग दोगुनी होकर 951 मिलियन हो जाने की संभावना है।
    • यह पूर्वानुमान भारत में क्लाइमेट रेजिलिएंट शहरों के निर्माण की आवश्यकता को उजागर करता है।

भारतीय शहरों के समक्ष प्रमुख चुनौतियां और समाधान

  • बाढ़: 2070 तक दो-तिहाई शहरी आबादी बाढ़ की चपेट में आ सकती है, जिससे 30 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
    • समाधान: बेहतर जल निकासी प्रणाली, प्रकृति-आधारित समाधान, बाढ़ की चेतावनी (उदाहरण के लिए- कोलकाता शहर हेतु बाढ़ पूर्वानुमान मॉडल) आदि।
  • अत्यधिक गर्मी: अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव शहरी तापमान को 3-5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा देता है। इससे स्वास्थ्य और कामकाज उत्पादकता नकारात्मक रूप से प्रभावित होते हैं।
    • समाधान: हीट एक्शन प्लान, शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण को बढ़ाना (उदाहरण के लिए- अहमदाबाद का हीट एक्शन प्लान)।
  • परिवहन: बाढ़ आने से 10-20% सड़कें डूब जाती हैं और 50% से अधिक परिवहन नेटवर्क ठप्प हो जाते हैं।
    • समाधान: जोखिम का मानचित्रण करना, बेहतर जल निकासी, आपदा-रोधी और हरित सार्वजनिक परिवहन (जैसे- दिल्ली मेट्रो)।
  • नगरपालिका सेवाएं: अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा पुनर्प्राप्ति प्रणालियों को बड़े पैमाने पर अपग्रेड करने की आवश्यकता है।
    • समाधान: अपशिष्ट-प्रबंधन प्रणालियों का आधुनिकीकरण करना, अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन को बढ़वा देना, पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार करना (उदाहरण के लिए- इंदौर का अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल)।
  • गवर्नेंस एवं वित्त: संस्थागत क्षमता का कमजोर होना और निजी निवेश की सीमित मात्रा।
    • समाधान: संस्थाओं को मजबूत करना, नागरिक भागीदारी सुनिश्चित करना और निजी क्षेत्रक से वित्त-पोषण को बढ़ावा देना।
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