हिमाचल प्रदेश नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्ण कार्यात्मक साक्षरता (Full functional literacy) प्राप्त करने वाला पांचवां राज्य/केंद्र प्रशासित प्रदेश बन गया है। इससे पहले, त्रिपुरा, मिजोरम, गोवा और लद्दाख ऐसा ही दर्जा प्राप्त कर चुके हैं।
- नव भारत साक्षरता कार्यक्रम को ‘उल्लास’ के नाम से भी जाना जाता है।
उल्लास (ULLAS) के बारे में
- पृष्ठभूमि: यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों के अनुरूप है।
- योजना का प्रकार: यह केंद्र प्रायोजित योजना है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आरंभ नव भारत साक्षरता कार्यक्रम को ‘उल्लास’ के नाम से जाना जाता है।
- क्रियान्वयन अवधि: पांच वर्ष की अवधि, 2022-2027 तक।
- उद्देश्य: 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वयस्कों को सशक्त बनाना, जिन्हें स्वयं को शिक्षित करने का अवसर नहीं मिला है।
- इससे पढ़ने, लिखने और अंकगणित कौशल के साथ-साथ महत्वपूर्ण लाइफ-स्किल भी सीखने में मदद मिलती है।
हाल ही में, समाचारों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का उल्लेख किया गया।
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) के बारे में
- यह सुरक्षित तरीके से पहचान और अधिकृत पहुंच सुनिश्चित करने की पद्धति है। इसमें संसाधनों और डेटा तक अधिकृत पहुंच के लिए दो प्रकार की पहचान की आवश्यकता होती है।
- पद्धति: इसमें निम्नलिखित तीन में से दो सत्यापनों का मेल किया जाता है:
- जिसे केवल आप जानते हैं (पासवर्ड),
- जो आपके पास है (फोन, टोकन),
- या जो आपकी अनन्य शारीरिक विशेषताएं हैं (बायोमेट्रिक्स)।
- उदाहरण : OTP कोड, ऑथेन्टिकेटर ऐप, सिक्योरिटी-की, फिंगरप्रिंट स्कैन।
- लाभ: अगर पासवर्ड लीक भी हो जाए तो भी टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन की वजह से अकाउंट हैक, फिशिंग और पहचान की चोरी का खतरा काफी कम हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण (Special intensive revision: SIR) में “आधार नंबर” को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया।
आधार नंबर के बारे में
- यह भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी 12 अंकों की रैंडम संख्या है।
- इसमें जनसांख्यिकी (नाम, जेंडर, जन्म तिथि, पता) और बायोमेट्रिक (उंगलियों के निशान, आईरिस स्कैन और चेहरे की तस्वीर) डेटा शामिल होते हैं।
- आधार अधिनियम 2016 की धारा 7: सरकारें भारत या राज्यों की संचित निधि द्वारा वित्त पोषित योजनाओं के अंतर्गत लाभ या सब्सिडी प्रदान करने के लिए लाभार्थियों के लिए आधार नंबर को अनिवार्य कर सकती हैं।
- आधार मेटा डेटा: सुप्रीम कोर्ट के अनुसार आधार डेटा को 6 महीने से अधिक संग्रहीत नहीं किया जा सकता है।
- आधार नंबर से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्णय:
- पुट्टास्वामी निर्णय (2018): सुप्रीम कोर्ट ने कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी सेवाओं के लिए आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा।
हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने म्हादेई वन्यजीव अभयारण्य में चल रही परियोजनाओं पर रोक लगा दी है। यह क्षेत्र एक प्रस्तावित टाइगर रिजर्व भी है।
- अधिसूचना: इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत 1999 में एक वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
- अवस्थिति: यह उत्तरी गोवा में पश्चिमी घाट के किनारे स्थित है। यह कर्नाटक तथा महाराष्ट्र की सीमा से सटा हुआ है।
- नदी: म्हादेई (मांडोवी) नदी इसी अभयारण्य से होकर बहती है।
- जीव-जंतु: यहाँ बाघ, तेंदुए, स्लॉथ बियर, गौर (भारतीय बाइसन), सांभर हिरण, आदि पाए जाते हैं।
- वनस्पति: यहाँ आर्द्र पर्णपाती वनस्पति और कुछ सदाबहार प्रजातियां पाई जाती हैं, जैसे- दुर्लभ अशोक वृक्ष जिसके फूल केसरिया रंग के होते हैं।
WWF-इंडिया द्वारा किए गए वन्यजीव सर्वेक्षण में अरुणाचल प्रदेश में पल्लास कैट की पहली तस्वीर ली गई है।
पल्लास कैट (Otocolobus manul) के बारे में

- शारीरिक विशेषताएं: इसका कद 30-35 सेंटीमीटर तक होता है और इनके फर बहुत घने होते हैं।
- पर्यावास: ईरान, अफगानिस्तान, मंगोलिया, रूस, पाकिस्तान और उत्तरी भारत सहित मध्य एशिया के चट्टानी मैदानों, पर्वतीय घास के मैदानों और झाड़ीदार भूमि में पायी जाती है।
- मुख्य आहार: छोटे शिकार जिनमें मर्मोट, पिका, ग्राउंड गिलहरी, वोल्स आदि शामिल हैं।
- संरक्षण की स्थिति
- IUCN रेड लिस्ट: लिस्ट कंसर्न।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची 1 में शामिल।
EEPC के प्लैटिनम जयंती समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने नागरिकों से भारत को व्यापार और ज्ञान का वैश्विक केंद्र बनाने का आग्रह किया।
EEPC के बारे में
- स्थापना: 1955 में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीन।
- सदस्य: अधिकतर लघु और मध्यम उद्यम (60%)।
- प्रधान एवं पंजीकृत कार्यालय: कोलकाता
- गतिविधियां: व्यापार मेले, क्रेता-विक्रेता बैठकें, बाजार अनुसंधान, निर्यात परामर्श, ऋण संबंधी सहूलियत।
- लक्ष्य: भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना और इंजीनियरिंग निर्यात के उच्च लक्ष्य को हासिल करना।
Article Sources
1 sourceआईएनएसटी, मोहाली के वैज्ञानिकों ने कोलेस्ट्रॉल-आधारित नैनोमेटेरियल्स को भविष्य की क्वांटम प्रौद्योगिकियों और स्पिंट्रॉनिक उपयोगों के लिए एक नवीन प्लेटफ़ॉर्म के रूप में प्रस्तुत किया है।
कोलेस्ट्रॉल के बारे में
- यह मोम (waxy) और वसा जैसी लिपिड है जो स्टेरॉयड फैमिली से संबंधित है। यह यकृत द्वारा निर्मित होती है और पशु से प्राप्त होने वाले खाद्य पदार्थों से भी प्राप्त होती है।
- प्रकार:
- लो-डेंसिटी लाइपोप्रोटीन (LDL): इसे "बैड" कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, जो धमनियों (arteries) में जमा हो सकता है।
- हाई-डेंसिटी लाइपोप्रोटीन (HDL): इसे "गुड" कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, जो अतिरिक्त LDL को हटाने में मदद करता है।
- कार्य: हार्मोन निर्माण, विटामिन D के संश्लेषण और कोशिका झिल्ली (cell membranes) के निर्माण के लिए आवश्यक है ।
- स्वास्थ्य को खतरा: उच्च LDL स्तर हृदय रोग और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाता है।