बुसान में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक/APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के राष्ट्रपतियों ने आपस में भेंट की | Current Affairs | Vision IAS
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अमेरिका-चीन बैठक के मुख्य परिणामों पर एक नजर

  • अमेरिका ने चीन से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले फेंटानिल पर लगाए गए प्रशुल्क को 10% तक घटाने पर सहमति व्यक्त की।
    • फेंटानिल वस्तुतः मोर्फिन या हेरोइन की तरह एक ओपिओइड ड्रग है। यह पूरी तरह से प्रयोगशालाओं में बनती है, इसमें कोई प्राकृतिक घटक नहीं होता है।
  • चीन ने दुर्लभ भू-खनिजों के निर्यात पर नियंत्रण को एक वर्ष के लिए स्थगित करने पर सहमति व्यक्त की।
    • दुर्लभ भू-खनिज 17 धात्विक तत्वों का समूह होता है। इसका उपयोग चुम्बकों, मिसाइलों, विमानों, कारों, रेफ्रिजरेटरों, अन्य उच्च तकनीक वाले उपकरणों आदि में उपयोग होने वाले अन्य घटकों के निर्माण में किया जाता है।
  • अमेरिका के राष्ट्रपति ने इस बैठक को G-2 नाम दिया। यह नाम सबसे पहले 2005 में अमेरिकी अर्थशास्त्री सी.एफ. बर्गस्टन द्वारा गढ़ा गया था।
    • G-2 की अवधारणा में अमेरिका और चीन को वैश्विक स्थिरता के सह-प्रबंधक के रूप में देखा गया है, जो इकोनॉमिक गवर्नेंस, व्यापार असंतुलन और वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए संयुक्त जिम्मेदारी निभाते हैं।

विश्व के लिए G-2 के निहितार्थ

  • क्षेत्रीय संस्थाओं की प्रासंगिकता पर सवाल: इससे चीन को प्रतिसंतुलित करने के लिए स्थापित किए गए क्वाड (QUAD), ऑकस (AUKUS) आदि पर सवाल उठाए जा सकते हैं।  ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिका और चीन G-2 के तहत एक रणनीतिक समझौते की ओर बढ़ रहे हैं।
  • द्विध्रुवीयता की ओर झुकाव: G-2 अमेरिका और चीन के वैश्विक शक्तियों के रूप में एकजुट होने का संकेत है। इस प्रकार दोनों देशों के द्विपक्षीय निर्णय वैश्विक मुद्दों पर बहुध्रुवीयता और ग्लोबल साउथ के हितों को कमजोर कर सकते हैं।
  • चीन पर निर्भरता: यह बदलाव महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए चीन पर वैश्विक एवं अमेरिकी निर्भरता को दर्शाता है।
  • भारत के लिए निहितार्थ: अमेरिका-चीन के बीच संबंधों में सुधार से चीन को प्रतिसंतुलित करने वाले भू-राजनीतिक साधन के रूप में भारत पर अमेरिका की निर्भरता कम हो सकती है, जबकि दूसरी ओर चीन को भारत के प्रति अपनी आक्रामकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। 
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