IIT खड़गपुर के एक अध्ययन में बताया गया है कि पश्चिमी घाट, हिमालय और उत्तर-पूर्व के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील वन क्षेत्र, साथ ही मध्य भारत की खेती वाली भूमि, अब तेजी से पारिस्थितिक सूखे का सामना कर रहे हैं।
- पारिस्थितिक सूखा क्या है: यह एक ऐसी स्थिति है, जब लंबे समय तक नमी की कमी बनी रहने से पारिस्थितिकी-तंत्र की संरचना, जैव विविधता और कार्बन संतुलन बिगड़ जाते हैं।
- कारण: यह प्राकृतिक कारणों से होता है, जैसे- लंबे समय तक वर्षा की कमी, तापमान में वृद्धि, महासागरों का गर्म होना, वायुमंडल में बढ़ती शुष्कता आदि।
- प्रभाव: पौधों की वृद्धि में कमी, स्थानीय प्रजातियों का विलुप्त होना आदि।
- सूखे के अन्य प्रकार:
- मौसम संबंधी सूखा (Meteorological);
- कृषि संबंधी सूखा (Agricultural);
- जल संबंधी सूखा (Hydrological); तथा
- सामाजिक-आर्थिक संबंधी सूखा (Socio-Economic)
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार संशोधन का कार्य कर रहा है। साथ ही, उसने आवास सूचकांक की संकलन पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया है।
- CPI के एक भाग के रूप में, आवास एक प्रमुख घटक है। वर्तमान श्रृंखला में शहरी क्षेत्रों में आवास पर होने वाला खर्च कुल उपभोक्ता खर्च का 21.67% है, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर यह हिस्सा 10.07% है।
- वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र के लिए आवास सूचकांक तैयार नहीं किया जाता।
- CPI में अन्य क्षेत्रकों का भारांश:
- खाद्य और पेय पदार्थ (Food & Beverages): 45.86%
- विविध (Miscellaneous) — जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत देखभाल आदि शामिल हैं: 28.31%
- ईंधन और बिज़ली (Fuel & Light): 6.84%
- वस्त्र और जूते-चप्पल (Clothing & Footwear): 6.53%
- पान, तंबाकू और नशे वाले पदार्थ (Pan, Tobacco & Intoxicants): 2.38%
Article Sources
1 sourceहाल ही में 7 देशों को कुनमिंग जैव विविधता कोष (KBF) के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
KBF के बारे में:
- यह एक मल्टी-पार्टनर ट्रस्ट फंड (MPTF) है, जो विशेष रूप से विकासशील देशों में कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क (KMGBF) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए त्वरित कार्रवाई का समर्थन करता है।
- KMGBF एक गैर-बाध्यकारी फ्रेमवर्क है। इसे 2022 में मॉन्ट्रियल (कनाडा) में संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (CBD) के CoP-15 में अपनाया गया था।
- इसमें 2050 तक के लिए 4 प्रमुख लक्ष्य और 2030 तक के लिए 23 विशिष्ट लक्ष्य शामिल हैं।
- KBF की स्थापना चीन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के नेतृत्व में की गई है। इसमें जैव विविधता सम्मेलन (CBD) के सचिवालय (SCBD) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की भागीदारी है।
इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 के दौरान डिजी बंदर को भारतीय बंदरगाहों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचे के रूप में लॉन्च किया गया।
- उद्देश्य: बंदरगाहों को डेटा-संचालित व कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम बनाना और आपस में जोड़ना, ताकि उनकी कार्यक्षमता, सुरक्षा एवं पारदर्शिता बढ़ाई जा सके।
- मुख्य फोकस:
- पूर्वानुमान आधारित लॉजिस्टिक्स (Predictive Logistics);
- डिजिटल ट्विन्स;
- बंदरगाह संचालन में ऑटोमेशन लागू करना आदि।
Article Sources
1 sourceराष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत न्यायमूर्ति सूर्यकांत को भारत के 53वें CJI के रूप में नियुक्त किया। वे वर्तमान CJI बी.आर. गवई का स्थान लेंगे।
CJI की नियुक्ति:
- केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय सेवानिवृत्त हो रहे CJI से अगले CJI की नियुक्ति के लिए नाम की सिफारिश करने का आग्रह करता है और मौजूदा CJI पारंपरिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश के नाम की सिफारिश करता है।
- हालांकि, अतीत में तीन बार ऐसे अवसर आए हैं. जब वरिष्ठता के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया था।
- CJI की सिफारिश प्राप्त करने के बाद, केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री इसे प्रधान मंत्री के पास भेजता है। इसके उपरांत प्रधान मंत्री राष्ट्रपति को नियुक्ति के मामले में सलाह देता है।
भारत को ईरान के चाबहार पोर्ट पर छह महीने के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट मिली।
चाबहार पोर्ट के बारे में:

- अवस्थिति: यह पोर्ट ईरान के दक्षिण-पूर्वी भाग में सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मकरान तट पर ओमान की खाड़ी के पास स्थित है।
- यह ईरान का एकमात्र डीप सी पोर्ट है, जो ईरान को महासागर तक प्रत्यक्ष पहुंच प्रदान करता है।
- चाबहार पोर्ट परियोजना में दो टर्मिनल हैं: शाहिद बेहिश्ती और शाहिद कलंतरी।
- यह ईरान का ऐसा पोर्ट है, जो भारत के सबसे नजदीक है। यह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और अन्य मध्य एशियाई देशों तक पहुंच प्रदान करता है।
- यह पोर्ट प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का हिस्सा है। INSTC हिंद महासागर और फारस की खाड़ी को ईरान के माध्यम से कैस्पियन सागर और फिर उत्तरी यूरोप से जोड़ता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वितीयक प्रतिबंधों का खतरा भारतीय रिफाइनरों द्वारा रूस से तेल आयात पर प्रभाव डाल सकता है।
द्वितीयक प्रतिबंध के बारे में:
- प्राथमिक प्रतिबंध में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिबंध शामिल होते हैं (जैसे, लक्षित देश पर व्यापार प्रतिबंध) जबकि द्वितीयक प्रतिबंध तीसरे देशों (तृतीय पक्ष) को दंडित करते हैं, जिससे वे लक्षित देशों के साथ व्यापार नहीं कर पाते हैं।
- ये प्राथमिक प्रतिबंधों के प्रभाव को कई गुना बढ़ाने का काम करते हैं और इनका प्रभाव अंतर्राष्ट्रीय स्तर का होता है।
- उदाहरण के तौर पर, अमेरिका ने ईरान के तेल पर प्रतिबंध (प्राथमिक प्रतिबंध) लगाए और भारतीय रिफाइनरों ने ईरान से तेल आयात करना बंद कर दिया (द्वितीयक प्रतिबंध)
पंचायती राज मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से MYGS पहल शुरू की गई है।
MYGS के बारे में:
- यह एक पथ प्रदर्शक पहल है। इसका उद्देश्य जनभागीदारी को मजबूत करना और स्थानीय शासन में भागीदारी को बढ़ावा देना है। इसमें छात्रों को सिमुलेटेड ग्राम सभा सत्रों में शामिल किया जाता है।
- यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है और इसे जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNVs), एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (EMRSs) और राज्य सरकार के स्कूलों में लागू किया जाएगा।
- JNVs ऐसे आवासीय स्कूल होते हैं, जिन्हें NEP 1986 के तहत ग्रामीण बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।
- EMRSs का उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। ये उन क्षेत्रों में स्थापित किए जाते हैं, जहां अनुसूचित जनजाति की आबादी 50% से अधिक हो और अनुसूचित जनजाति के कम-से-कम 20,000 लोग रहते हों।
