भारत में 2025 में डेटा सेंटर क्षमता में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। नई आपूर्ति 2024 में जोड़ी गई 191 मेगावाट (MW) क्षमता की तुलना में दोगुनी से अधिक बढ़कर 387 मेगावाट हो गई है। यह वर्ष-दर-वर्ष 103 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
- डेटा सेंटर एक समर्पित सुरक्षित स्थान है, जहां कंप्यूटिंग और नेटवर्किंग उपकरणों को बड़ी मात्रा में डेटा एकत्र करने, संग्रहीत करने, संसाधित करने, वितरित करने या एक्सेस करने के उद्देश्य से केंद्रित किया जाता है।
भारत के लिए डेटा केंद्रों का महत्त्व
- ये भारत में डिजिटल क्रांति के प्रमुख प्रवर्तक हैं। ये सरकारी सेवाओं (आधार, UPI व ONDC) को बदल रहे हैं, रिमोट वर्क या वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल शिक्षा को सक्षम बना रहे हैं तथा स्टार्ट-अप नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।
- विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और न्यायपालिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का एकीकरण करने में सहायता प्रदान कर रहे हैं।
- अन्य लाभ:
- डेटा स्थानीयकरण की सुविधा प्रदान करते हैं। इससे विदेशी निगरानी का जोखिम समाप्त हो जाता है;
- डेटा तक पहुंच के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देते हैं।
- निजता संबंधी अधिकारों की रक्षा करने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और रोजगार सृजन में सहायता करते हैं।

भारत के समक्ष चुनौतियां
- विनियामक: वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए संपूर्ण भारत में एक सरल और मानकीकृत विनियामक ढांचे की आवश्यकता है।
- उच्च परिचालनात्मक व्यय: विद्युत की अत्यधिक खपत और अवसंरचना के रखरखाव के कारण उच्च लागत।
- पर्यावरणीय चिंताएं: कोयला आधारित ऊर्जा और भू-जल की अत्यधिक खपत।
- अन्य: कौशल की कमी और चेन्नई, मुंबई जैसे मेट्रो शहरों में डेटा सेंटर्स का अत्यधिक संकेंद्रण।
आगे की राह
मजबूत अनुपालन, ऊर्जा-दक्ष अनुसंधान एवं विकास (R&D) और टियर-2 शहरों में डेटा सेंटर विस्तार से डेटा सेंटर तंत्र का सतत, सुरक्षित व संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
भारत में डेटा सेंटर तंत्र को बढ़ावा देने की पहलें
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