अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूसी तेल के व्यापार पर 500% प्रशुल्क (टैरिफ) आरोपित करने वाले विधेयक को मंजूरी प्रदान की | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • अमेरिका के 'रूस प्रतिबंध अधिनियम 2025' में रूसी ऊर्जा संसाधनों की खरीद करने वाले देशों पर भारी टैरिफ और द्वितीयक प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
  • प्रस्तावित अमेरिकी कानून के कारण भारत को संभावित व्यापार अवरोध (120 अरब डॉलर का निर्यात), क्षेत्रीय क्षति और सौदेबाजी की शक्ति में कमजोरी का सामना करना पड़ सकता है।
  • भारत के आगे बढ़ने के रास्ते में निर्यात विविधीकरण, भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते जैसे व्यापार समझौतों में तेजी लाना और कच्चे माल के लिए नियमों को सरल बनाना शामिल है।

In Summary

इस विधेयक का नाम 'द सैंक्शिनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025' है। यह विधेयक लागू होने के बाद अमेरिकी प्रशासन को रूसी तेल, गैस, यूरेनियम आदि खरीदने वाले देशों पर भारी प्रशुल्क और 'द्वितीयक प्रतिबंध’ लगाने में सक्षम बनाएगा।

  • अमेरिकी राष्ट्रपति के पास इन प्रशुल्कों को 180 दिनों तक के लिए माफ करने की शक्ति होगी, यदि इसे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में समझा जाता है।

भारत के लिए संभावित प्रभाव

  • व्यापार में रुकावट: वस्तुओं और संभावित रूप से सेवाओं पर इतना अधिक प्रशुल्क लगने से संयुक्त राज्य अमेरिका को होने वाला भारत का 120 अरब डॉलर का वार्षिक निर्यात प्रभावी रूप से रुक सकता है।
  • क्षेत्रकों को नुकसान: वस्त्र, फुटवियर और समुद्री उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रकों की प्रतिस्पर्धात्मकता व निर्यात व्यवहार्यता में और भी कमी आ सकती है। ये क्षेत्रक पहले से ही 50% तक के अमेरिकी प्रशुल्क के बोझ तले दबे हुए हैं। 
  • सौदेबाजी की शक्ति में कमी: यह यूरोपीय संघ (EU), खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) आदि सहित विभिन्न संस्थाओं के साथ भविष्य के व्यापार समझौतों की वार्ताओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
  • अन्य प्रभाव: भारत-अमेरिका संबंधों में गिरावट, आर्थिक संवृद्धि पर प्रभाव आदि।

भारत के लिए आगे की राह

  • निर्यात का विविधीकरण: एकतरफा प्रशुल्क वृद्धि के प्रति सुभेद्यता को कम करने के लिए वस्तु निर्यात को अमेरिका से हटाकर अन्य देशों की ओर विविधीकृत करना चाहिए।
  • निर्यात संवर्धन मिशन: प्रशुल्क बढ़ोतरी से प्रभावित भारत के निर्यात तंत्र को मजबूत करने के लिए परिव्यय में वृद्धि करनी चाहिए। 
  • व्यापार सौदों में तेजी लाना: जैसे कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) की वार्ताओं में तेजी लाना।
  • विनियामक सुधार: विनियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना चाहिए और कपास, चमड़ा व रत्न जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल पर शुल्क को तर्कसंगत बनाना चाहिए।
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मुक्त व्यापार समझौता (FTA)

एक व्यापार ब्लॉक जिसमें सदस्य राष्ट्रों के बीच माल और सेवाओं पर टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम या समाप्त कर दिया जाता है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

खाड़ी सहयोग परिषद (GCC)

एक क्षेत्रीय, अंतर-सरकारी राजनीतिक और आर्थिक संघ है जिसमें अरब प्रायद्वीप के छह सदस्य देश शामिल हैं: बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना है।

यूरोपीय संघ (EU)

यूरोप में स्थित 27 सदस्य राज्यों का एक राजनीतिक और आर्थिक संघ है। यह एकल बाजार, साझा नीतियां और कानून के माध्यम से सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें व्यापार, सुरक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दे शामिल हैं।

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