एक हालिया शोध के अनुसार डंग बीटल आकाशगंगा (मिल्की वे) के माध्यम से दिशा ज्ञान प्राप्त करते हैं।

डंग बीटल के बारे में:
- ये स्थलीय कीट हैं जो बड़े शाकाहारी जीवों के मल से आहार प्राप्त करते हैं।
- नेविगेशन: कुछ डंग बीटल रात में आकाशगंगा का उपयोग करके रास्ता खोजते हैं। ये गोबर के गोलों को लुढ़काते समय सीधी रेखाओं में चलते हैं।
- ये एकल तारों के बजाय ध्रुवीकृत प्रकाश पैटर्न और रात के आकाश की विसरित चमक (Diffuse glow) पर निर्भर करते हैं।
पहली बार, एक मनोनीत सदस्य (Nominated Member) को लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति के रूप में चुना गया है।
उपसभापति के बारे में:
- संविधान के अनुच्छेद 89 के तहत राज्यसभा द्वारा अपने सदस्यों के बीच से ही उपसभापति का चुनाव किया जाता है।
- जब सभापति का पद रिक्त हो या जब उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हैं, तब उपसभापति सभापति के कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।
मनोनीत सदस्यों के बारे में
- संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत, राज्यसभा में 250 तक सदस्य हो सकते हैं। इनमें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 सदस्य शामिल होते हैं।
- सदस्यों का मनोनयन साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों से किए जाते हैं।
- शक्तियां और कार्य:
- वे वाद-विवाद और चर्चाओं में पूरी तरह से भाग ले सकते हैं।
- वे राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर सकते।
- वे उपराष्ट्रपति चुनाव में मतदान कर सकते हैं।
- वे सीट ग्रहण करने के 6 महीने के भीतर किसी राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं।
- अब तक कोई भी मनोनीत सदस्य मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं रहा है।
महासागरों का तेजी से गर्म होना मेसोथर्मिक मछलियों को ठंडे जल की तलाश करने के लिए मजबूर कर रहा है। इसके साथ ही, उपयुक्त शिकार की कम उपलब्धता उन्हें दोहरा पारिस्थितिक आघात दे रही है।
मेसोथर्मिक मछलियों के बारे में:
- ये चयापचय ताप को बनाए रख सकती हैं और अपने शरीर के कुछ हिस्सों को आसपास के समुद्री जल की तुलना में अधिक गर्म रख सकती हैं।
- उदाहरण: ग्रेट व्हाइट शार्क, टूना आदि।
मछलियों के अन्य प्रकार:
- एक्टोथर्मिक मछलियां: ये ठंडे रक्त वाले जीव हैं, जिनमें मछली की अधिकांश प्रजातियां शामिल होती हैं। ये अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए अपने आसपास के जलीय वातावरण पर निर्भर करती हैं।
- ऊष्माशोषी (एंडोथर्मिक) मछलियां: ये गर्म रक्त वाली मछली की प्रजातियां हैं, जो चयापचय रूप से अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में सक्षम होती हैं।
पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने RELIEF योजना के दायरे का विस्तार किया है।
RELIEF योजना के बारे में:
- यह निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) के तहत एक समयबद्ध उपाय है।
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को उच्च माल ढुलाई लागत और बढ़ते बीमा प्रीमियम से निपटने में मदद करना है। इसके साथ ही, यह युद्ध से संबंधित निर्यात जोखिमों में सहायता प्रदान करती है।
- नोडल और कार्यान्वयन एजेंसी: ECGC लिमिटेड (पूर्व में भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम लिमिटेड), जो पूर्णतः भारत सरकार (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय) के स्वामित्व में है।
- मुख्य विशेषताएं:
- MSME-केंद्रित सहायता: उच्च लॉजिस्टिक्स लागत और अधिभार के लिए प्रतिपूर्ति सहायता सुनिश्चित करना।
- निर्यात चक्र कवरेज: शिपमेंट योजना और बीमा आदि के लिए एंड-टू-एंड सहायता प्रदान करना।
Article Sources
1 sourceचीन ने विवादित दक्षिण चीन सागर (SCS) के स्कारबोरो शोल को अवरुद्ध करने के लिए जहाजों और बाधाओं को तैनात किया है।

स्कारबोरो शोल के बारे में:
- यह दक्षिण चीन सागर में एक विवादित एटोल है। इस पर चीन और फिलीपींस, दोनों सम्प्रभुत्व का दावा करते हैं।
- रणनीतिक महत्व: यह प्रमुख समुद्री मार्गों पर स्थित है। यह समृद्ध मत्स्यन क्षेत्र और कई अन्य संसाधनों से युक्त है।
- दक्षिण चीन सागर में अन्य विवादित द्वीप: पार्सल द्वीप, स्प्रैटली द्वीप आदि।
Article Sources
1 sourceअहमदाबाद का कांकरिया कोचिंग डिपो भारत की पहली "जल-तटस्थ" (वॉटर न्यूट्रल) रेलवे फैसिलिटी बन गया है।
- यह डिपो फाइटोरिमेडिएशन तकनीक का उपयोग करके अपने अपशिष्ट जल का उपचार और पुन: उपयोग करके जल का संरक्षण करता है।
फाइटोरिमेडिएशन के बारे में:
- यह एक बायोरिमिडिएशन प्रक्रिया है, जो पौधों, सूक्ष्म-शैवाल और समुद्री खरपतवार जैसे जीवों का उपयोग करती है। यह तकनीक मृदा से विषाक्त भारी धातुओं को हटाने में सक्षम है।
- मृदा से विषाक्तता को हटाने के लिए उपयोग की जाने वाली अन्य तकनीकों की तुलना में यह अधिक संधारणीय और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक है।
- उदाहरण: जलकुंभी, डकवीड और वॉटर लेट्यूस।
फाइटोरिमेडिएशन तकनीकें:
- स्वस्थाने (इन-सिटू): जल का उपचार सीधे संदूषित स्थल पर होता है, जैसे: बायोवेंटिंग और बायोऑगमेंटेशन।
- बाह्य-स्थान (एक्स-सिटू): संदूषित सामग्री को निष्कासित किया जाता है या दूसरी जगह उपचार के लिए पंप किया जाता है, जैसे: लैंडफार्मिंग और बायोरिएक्टर।
ओडिशा के रायगड़ा जिले में सिजीमाली बॉक्साइट खदान के लिए 3 किमी लंबी सड़क के निर्माण के कारण झड़पें दर्ज की गई हैं।
- यह संघर्ष एक व्यापक "माली" (पहाड़ी) संरक्षण आंदोलन का हिस्सा है। स्थानीय आदिवासी समुदायों का आरोप है कि ग्राम सभा की सहमति धोखाधड़ी से प्राप्त की गई थी।
बॉक्साइट के बारे में:
- यह एल्युमीनियम का एक अयस्क है जिसमें मुख्य घटक के रूप में हाइड्रेटेड एल्युमीनियम ऑक्साइड होता है। इसमें लौह ऑक्साइड, सिलिका और टाइटेनियम गौण घटकों के रूप में होते हैं।
- भारत में बॉक्साइट के बड़े निक्षेप: ओडिशा (41%), छत्तीसगढ़ (20%), आंध्र प्रदेश (12%), गुजरात (8%), झारखंड (6%) आदि।
- बॉक्साइट के शीर्ष उत्पादक देश: ऑस्ट्रेलिया, गिनी, चीन, ब्राजील और भारत (पांचवां सबसे बड़ा)।
एक नए शोध अध्ययन ने उत्तराखंड के अलकनंदा बेसिन में 219 ऐसे हैंगिंग ग्लेशियरों की पहचान की है, जिनमें अस्थिर बर्फ की मात्रा अधिक है और हिमस्खलन उत्पन्न होने की आशंका है।
हैंगिंग ग्लेशियर के बारे में:
- हैंगिंग ग्लेशियर ऐसे हिमनद होते हैं जो घाटी के तल तक फैलने के बजाय चट्टान के किनारे या खड़ी ढलान पर समाप्त हो जाते हैं।
- स्थानांतरण की प्रक्रिया: घाटी के हिमनद धीरे-धीरे बहते हैं, जबकि हैंगिंग ग्लेशियर नीचे की बर्फ को मुख्यतः बर्फ के गिरने और हिमस्खलन के माध्यम से पोषित करते हैं।
- खतरा: ये प्राकृतिक रूप से अस्थिर होते हैं और अचानक टूटकर गिरने की घटनाएँ हो सकती हैं, जिससे हिमनद झीलों पर प्रभाव पड़ सकता है {हिमनद झील प्रस्फोट जनित बाढ़ (GLOF) का खतरा} या नदियों का अपवाह अवरुद्ध हो सकता है।