हाल ही में आयोजित अपनी 77वीं बैठक में, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने के लिए नए फ्रेमवर्क को मंजूरी दी।
- इसमें 'पहुँच और लाभ-साझाकरण (Access and Benefit Sharing: ABS) फंड के उपयोग की प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और नामित रिपॉजिटरी (संग्रहागारों) के लिए संशोधित दिशानिर्देश शामिल हैं।
नया जैव-विविधता फ्रेमवर्क
- ABS फंड का उपयोग:
- पहचान योग्य स्रोत:
- जब संसाधन पहचान योग्य संस्थानों या रिपॉजिटरी से प्राप्त किए जाते हैं, तो ABS फंड का 25-40% हिस्सा उन्हें दिया जाएगा।
- शेष 60-75% हिस्सा राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBBs) और संघ राज्य क्षेत्रों की जैव विविधता परिषदों (UTBCs) के माध्यम से स्थानीय समुदायों के साथ साझा किया जाएगा।
- अज्ञात स्रोत: यदि जैव संसाधनों तक पहुंच मध्यवर्तियों या व्यापारियों के माध्यम से प्राप्त की जाती है, तो ABS फंड का उपयोग सीधे जैव विविधता संरक्षण और प्रबंधन के लिए किया जाएगा।
- पहचान योग्य स्रोत:
- संशोधित रिपॉजिटरी दिशानिर्देश: इसमें संसाधनों की पहचान और निगरानी के लिए डिजिटल रिकॉर्ड रखने को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
'पहुँच और लाभ-साझाकरण (ABS)’ क्या है?
- ABS से तात्पर्य है कि आनुवंशिक संसाधनों तक कैसे पहुँचा जा सकता है और उनके उपयोग से होने वाले लाभों को उन संसाधनों का उपयोग करने वाले समुदायों/देशों (उपयोगकर्ता) और संसाधनों को प्रदान करने वालों (प्रदाता) के बीच कैसे साझा किया जाता है।
- ABS फ्रेमवर्क: यह जैव विविधता अभिसमय (CBD) के अंतर्गत विनियमित होता है।
- बॉन दिशानिर्देश और नागोया प्रोटोकॉल (2010) 'पहुँच और लाभ-साझाकरण (ABS)’ से संबंधित हैं।
- भारत में यह जैव विविधता अधिनियम, 2002 के साथ-साथ पहुँच और लाभ साझाकरण (ABS) विनियम, 2025 के तहत विनियमित होता है।
