उच्चतम न्यायालय ने 'नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक पदार्थ (NDPS) अधिनियम, 1985' के तहत बड़ी संख्या में दर्ज मामलों के लंबित होने को भी रेखांकित किया।
- उच्चतम न्यायालय ने मुकदमों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए सभी राज्यों में विशेष NDPS अदालतों के गठन की सिफारिश की।
भारत में ड्रग्स (नशीली दवाओं) के व्यसन की समस्या के कारण
- भारत की भौगोलिक अवस्थिति: भारत विश्व के दो प्रमुख 'अवैध नशीले पदार्थ उत्पादक क्षेत्रों' गोल्डन क्रिसेंट (ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान) तथा गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार, लाओस और थाईलैंड) के बीच स्थित है। इससे भारत से होकर या भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी की आशंका बढ़ जाती है।
- खुली अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं: पंजाब राज्य में भारत-पाकिस्तान सीमा पर तस्करों द्वारा नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए ड्रोन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
- सिंथेटिक ड्रग्स आसानी से उपलब्ध होना: 3,4-मिथाइलेंडीऑक्सी-मेथेम्फेटामाइन (MDMA) या एक्स्टसी (ecstasy) जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की आसान उपलब्धता के कारण नशीली दवाओं के व्यसन के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
- आर्थिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारक: बेरोजगारी, परिवारों का टूटना, अवसाद (डिप्रेशन), शैक्षणिक प्रदर्शन का दबाव और शहरी अकेलापन नशीली दवाओं के व्यसन को बढ़ावा देते हैं।
- ऑनलाइन ड्रग व्यापार: डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों ने गुमनाम रूप से ड्रग्स के लेनदेन को आसान बना दिया है।
भारत में ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
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