नैसकॉम-जिनोव की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल वैश्विक क्षमता केंद्रों (Global Capability Centres: GCCs) की अनुमानित संख्या 2,117 है।
- ये केंद्र 23 लाख से अधिक पेशेवरों को रोजगार देते हैं और लगभग 100 बिलियन डॉलर का राजस्व सृजित करते हैं।
- भारत में 1,200 से अधिक GCCs में AI/ML क्षमताएं हैं और भारत वैश्विक स्तर पर एंटरप्राइज़ AI प्रतिभा का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता बन गया है।
- एंटरप्राइज़ AI का अर्थ है बड़ी कंपनियों या संगठनों में अत्याधुनिक AI तकनीकों का उपयोग करना, ताकि विभिन्न व्यावसायिक कार्यों को बेहतर, तेज़ और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCCs) के बारे में
- ये विदेशी कंपनियों द्वारा अपने मूल संगठनों को विभिन्न प्रकार की सेवाएं प्रदान करने के लिए अन्य देशों में स्थापित की गई इकाइयां (ऑफशोर यूनिट्स) हैं।
- GCCs की विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास, ग्राहक सहायता तथा अन्य व्यावसायिक संचालन शामिल हैं।
- GCC के विकास में सहायक कारक: सुदृढ़ अवसंरचना, कुशल कार्यबल, नवाचार अनुकूल प्रवेश, स्टार्टअप को सहायता, अनुकूल नीतियां (जैसे जेनेसिस मिशन, स्टार्टअप इंडिया, फ्यूचर स्किल्स प्राइम, विशेष आर्थिक क्षेत्रों में सुधार) आदि।
- महत्व: आर्थिक विकास में योगदान, रोजगार सृजन, नवाचार एवं अनुसंधान-विकास को बढ़ावा, वैश्विक मानकों को अपनाना तथा विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों की स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को प्रोत्साहन मिलना।
GCCs से संबंधित चुनौतियां
- कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से सहायता नहीं मिलना: उच्च प्रबंधन और शीर्ष अधिकारियों से लंबे समय तक समर्थन नहीं मिलना GCC की असफलता का एक प्रमुख कारण है।
- ऑपरेटिंग मॉडल में कमियां: प्रक्रियाओं में समन्वय की कमी, स्वामित्व के बारे अस्पष्टता और GCC की कमजोर संरचना।
- आईटी सेवाओं से मिलता-जुलता कार्य: GCCs और पारंपरिक आईटी सेवा कंपनियों के बीच कार्यों का स्वरूप एक समान होने के लिए प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं।
- अन्य चुनौतियां: प्रतिभा की कमी, साइबर खतरे, वित्तीय दबाव, आदि।