भारत की वृद्ध होती आबादी और दीर्घकाल तक वृद्धावस्था देखभाल की आवश्यकता | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

In Summary

  • भारत में बुजुर्गों की आबादी 2050 तक 347 मिलियन तक पहुंच जाएगी, जिन्हें अस्पताल-केंद्रित देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और वित्तीय असुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
  • प्रमुख मुद्दों में वृद्धावस्था की स्त्रीकरण प्रक्रिया, प्रशिक्षित जराचिकित्सकों की कमी, सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल पहुंच और ग्रामीण-शहरी विभाजन शामिल हैं।
  • आगे बढ़ने का रास्ता दीर्घकालिक देखभाल को मजबूत करने, एबीडीएम के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने और एकीकृत बुजुर्ग देखभाल प्रणालियों को विकसित करने में निहित है।

In Summary

वृद्धावस्था एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है तथा बीमारियों और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।

  • यह जीवन में होने वाले बदलावों; जैसे सेवानिवृत्ति, स्थान परिवर्तन और मित्रों या जीवनसाथी की मृत्यु/वियोग से भी जुड़ा होता है। 
  • UNFPA 2023 के अनुमान के अनुसार भारत की कुल आबादी में वृद्धजनों का अनुपात 2050 तक 20% (347 मिलियन) तक हो जाएगा, जो 2011 में 8.6% था। 

वृद्धावस्था स्वास्थ्य देखभाल से जुड़ी चुनौतियां

  • अस्पताल-केंद्रित मॉडल: मौजूदा प्रणालियों में एकल रोगों का उपचार होता है, जबकि वृद्धजन प्रायः कई दीर्घकालिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से पीड़ित होते हैं, जिनके लिए निरंतर और एकीकृत देखभाल की आवश्यकता होती है।
  • मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक अलगाव: प्रायः डिमेंशिया, अल्जाइमर और अवसाद जैसे रोगों का निदान नहीं हो पाता है। 
    • एकल परिवारों के प्रति बढ़ती प्राथमिकता ने सामाजिक अलगाव और "एम्प्टी नेट सिंड्रोम" (empty nest syndrome) में वृद्धि की है। 
  • वित्तीय असुरक्षा: स्वास्थ्य पर जेब से किया जाने वाला अत्यधिक खर्च परिवारों को बार-बार गरीबी में ले जाता है। 
    • 78% वृद्धों को पेंशन नहीं मिलती है और 70% आर्थिक रूप से आश्रित हैं।
  • वृद्धावस्था का नारीकरण: महिलाओं की जीवन प्रत्याशा अधिक है, लेकिन अक्सर उनके पास कम संपत्ति और स्वास्थ्य देखभाल तक कम पहुंच होती है, जिससे उन्हें अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  • अन्य: वृद्धावस्था संबंधी प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी, सामाजिक सुरक्षा का अभाव, डिजिटल सुविधाओं की कमी, ग्रामीण-शहरी विभाजन आदि। 

आगे की राह

  • दीर्घकालिक देखभाल (LTC) प्रणाली को सुदृढ़ करना: आवश्यक अवसंरचना और वित्तीय सहायता को शामिल करते हुए एकीकृत वृद्धजन-देखभाल प्रणाली विकसित की जाए।
  • डिजिटल स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ करना: आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत टेलीपरामर्श और एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड को बढ़ावा देना चाहिए।

वृद्धावस्था स्वास्थ्य-देखभाल का महत्व

जीवन की गुणवत्ता

गरिमा, स्वतंत्रता और सेहतमंदी 

यह वरिष्ठ नागरिकों को उनके आत्म-सम्मान और स्वायत्तता बनाए रखने में मदद करती है।

 

स्वास्थ्य देखभाल के बोझ में कमी

 प्रारंभिक और निरंतर देखभाल 

यह जटिलताओं को रोकती है और अस्पताल में भर्ती होने तथा आपातकालीन स्थिति में अस्पताल जाने की आवृत्ति को कम करती है।

 

क्रोनिक-रोग प्रबंधन

उच्च रक्तचाप, मधुमेह और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के उपचार में सहायता करता है

(आंकड़े: 75% से अधिक वृद्धजन क्रोनिक बीमारियों से पीड़ित हैं; केवल 18% के पास बीमा कवरेज है- नीति आयोग, 2024) 

 

अन्य

समावेशी विकास और पारिवारिक सहायता 

यह एक अनुकूल परिवेश को बढ़ावा देता है और परिवारों पर बोझ को कम करता है।

 

सरकार द्वारा उठाए गए कदम

आयुष्मान भारत - PMJAY 

70 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का निशुल्क उपचार की सुविधा।

वृद्धों के स्वास्थ्य देखभाल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPHCE)

सुलभ, वहनीय और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल। 

वृद्धजन आबादी के लिए समर्पित सेवाएं।

सीनियर केयर एजिंग ग्रोथ इंजन (SAGE) पोर्टल

युवा उद्यमियों को विश्वसनीय वृद्धावस्था देखभाल समाधान विकसित करने और सिल्वर इकोनॉमी में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

 

राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY)

आयु संबंधी दिव्यांगता वाले वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण प्रदान करती है।

 

Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

Rashtriya Vayoshri Yojana (RVY)

A scheme for providing age-appropriate aids and assistive living devices to senior citizens belonging to the Below Poverty Line (BPL) category, to improve their quality of life.

Senior Care Aging Growth Engine (SAGE) Portal

An initiative by the government to encourage young entrepreneurs to develop innovative solutions for elderly care. It aims to foster the growth of the 'Silver Economy' by supporting startups and businesses focused on senior-related products and services.

National Programme for Health Care of the Elderly (NPHCE)

A government program designed to provide accessible, affordable, and high-quality healthcare services specifically for the elderly population in India. It aims to address their unique health needs and promote healthy aging.

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet