'भारत में आकस्मिक मौतें और आत्महत्याएं 2024' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया कि आत्महत्या की दर (प्रति लाख जनसंख्या) वर्ष 2023 की 12.3 से कम होकर 2024 में 12.2 हो गई।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- आत्महत्या की वजहें: देश में वर्ष 2024 के दौरान आत्महत्याओं के लिए 'पारिवारिक समस्याएं (विवाह से संबंधित समस्याओं के अलावा)' (33.5%), 'बीमारी' (18.0%) और 'नशीली दवाओं का सेवन/व्यसन' (7.6%) मुख्य रूप से जिम्मेदार थे। ये तीनों कारण 2024 में देश में कुल 59.0% आत्महत्याओं के लिए जिम्मेदार थे।
- राज्यवार मामले: आत्महत्या के सर्वाधिक मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए, जिसके बाद तमिलनाडु का स्थान रहा।
- संघ राज्य क्षेत्रों (UTs) में दिल्ली में आत्महत्या के सर्वाधिक मामले (2,905) दर्ज की गईं। इसके बाद पुडुचेरी का स्थान रहा।
- पीड़ितों की शैक्षणिक स्थिति: कुल आत्महत्या पीड़ितों में से केवल 5.6% लोग ही स्नातक और उससे अधिक पढ़े-लिखे थे।
- आत्महत्या करने वाले पीड़ितों में से 10.1% लोग निरक्षर थे।
- शहरों में रुझान: शहरों में आत्महत्या की दर (16.3) अखिल भारतीय आत्महत्या दर (12.2) की तुलना में अधिक थी।
- आत्महत्या पीड़ितों की व्यावसायिक स्थिति: पुरुषों में सर्वाधिक आत्महत्याएँ दिहाड़ी मजदूरों द्वारा की गईं।
- महिलाओं में, आत्महत्या करने वालों की सर्वाधिक संख्या गृहणियों की थी।
- कृषि क्षेत्रक में कुल 10,546 किसानों (6.2%) ने आत्महत्या की।
- आत्महत्या के मामलों में पुरुष-महिला अनुपात: यह अनुपात 73.5 : 26.5 रहा।
भारत में आत्महत्या रोकने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
- अधिनियम और नीतियां: राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति (2014); मानसिक स्वास्थ्य सेवा अधिनियम (2017); राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP), आदि।
- आत्महत्या रोकथाम हेतु राष्ट्रीय रणनीति (NSPS): वर्ष 2022 में जारी इस रणनीति का उद्देश्य वर्ष 2030 तक आत्महत्या मृत्यु दर में 10% की कमी लाना है।
- योजनाएं/पहल: आयुष्मान भारत योजना, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई 'मनोदर्पण' पहल; टेली मानस, आदि।