नीति आयोग ने भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली पर रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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यह रिपोर्ट भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली के पिछले एक दशक का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इसमें शिक्षा तक पहुँच तथा नामांकनअवसंरचना, समानता और सीखने के परिणाम जैसे पहलुओं का अध्ययन किया गया है।

भारत में स्कूली शिक्षा की वर्तमान स्थिति

  • व्यापक विस्तार: 2024-25 में 14.71 लाख स्कूलों में 24.69 करोड़ विद्यार्थी पढ़ रहे थे।
  • सकल नामांकन अनुपात (GER): प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर उच्च सकल नामांकन अनुपात (90.9%) है, लेकिन माध्यमिक (78.7%) और उच्चतर माध्यमिक (58.4%) स्तरों पर विद्यार्थियों की भागीदारी कम हो जाती है।
  • निजीकरण की ओर झुकाव: सरकारी स्कूलों में 49.25% विद्यार्थी नामांकित हैं, जबकि निजी गैर-सहायता प्राप्त (प्राइवेट अनएडेड) स्कूलों ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 38.8% कर ली है।

श्रेणी

मुख्य चुनौतियां

नीतिगत सिफारिशें

प्रणालीगत

  • खंडित संरचना: केवल लगभग 5% स्कूल ही कक्षा 1 से 12 तक निरंतर शिक्षा प्रदान करते हैं। एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या अधिक है।
  • अवसंरचना की कमी: स्मार्ट क्लासरूम जैसी उन्नत सुविधाओं का अभाव है।
  • शिक्षक संबंधी समस्याएं: रिक्त पद, एक ही शिक्षक द्वारा कई कक्षाओं के विद्यार्थियों को बढ़ाना (multi-grade teaching) तथा गैर-शैक्षणिक/चुनाव कार्यों में लगाना।
  • समानता संबंधी बाधाएं: वंचित समूहों (प्रवासी, लड़कियों) में स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर काफी अधिक है।

 

  • संरचनात्मक सुधार: संसाधनों के साझा उपयोग हेतु समन्वित स्कूल और स्कूल परिसर स्थापित किए जाएँ; स्कूल गुणवत्ता में सुधार हेतु राज्य एवं जिला स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाए।
  • अवसंरचना को सुदृढ़ करना: मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं तथा STEM और डिजिटल लैब जोड़ी जाएँ।
  • शिक्षक प्रबंधन में सुधार: रिक्तियों की डिजिटल निगरानी, प्रशिक्षण को बेहतर बनाने और गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों को कम संलग्न करने की जरूरत है।
  • समानता को बढ़ावा: प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (EWS) लागू करने, लड़कियों के लिए अलग से स्वच्छता सुविधाओं की व्यवस्था करने तथा पढ़ाई फिर से जारी करने के लिए अवसर प्रदान करना चाहिए।

शैक्षणिक

  • शिक्षण पद्धति की कमियाँ: समझ विकसित करने के बजाय रटना और पाठ्यक्रम पूरा करने पर अधिक जोर।
  • कमजोर आधार: वास्तविक जीवन से संबंधित कौशलों का कमजोर उपयोग और अवधारणात्मक समझ की कमी, विशेषकर गणित में।
  • प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) की कमी: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर अधिक बोझ और प्रशिक्षित प्रारंभिक शिक्षकों की कमी।
  • व्यावसायिक शिक्षा की उपेक्षा: इसे मुख्यधारा से अलग और उद्योगों की वर्तमान जरूरत के अनुरूप नहीं माना जाता है।
  • विद्यार्थियों की सेहत पर कम ध्यान: मानसिक, शारीरिक और सामाजिक-भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए संस्थागत सहयोग का अभाव।
  • शिक्षण प्रणाली में बदलाव: सही स्तर पर शिक्षण (टीचिंग एट द राइट लेवल: TaRL) अपनाना, स्थानीय संदर्भ आधारित पाठ्यक्रम और दक्षता-आधारित मूल्यांकन लागू करना।
  • ECCE को सुदृढ़ करना: आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिक स्कूलों के साथ जोड़ना और शिक्षकों के लिए प्रमाणन अनिवार्य करना।
  • व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा में लाना: इसे मिडिल स्कूल से जोड़ना और स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुरूप करना।
  • विद्यार्थियों की सेहतमंदी को बढ़ावा देना: साप्ताहिक वेलनेस सत्र, दैनिक शारीरिक व्यायाम और सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा अनिवार्य करना।
  • AI का समावेश: AI को शिक्षण सहायता के रूप में जिम्मेदारीपूर्वक अपनाना तथा नैतिक और संज्ञानात्मक सुरक्षा दिशानिर्देश सुनिश्चित करना।
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AI (Artificial Intelligence)

यह कंप्यूटर सिस्टम की क्षमता है जो ऐसे कार्य कर सकते हैं जिनके लिए सामान्य रूप से मानव बुद्धि की आवश्यकता होती है, जैसे सीखना, समस्या-समाधान और निर्णय लेना।

दक्षता-आधारित मूल्यांकन (Competency-based assessment)

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टीचिंग एट द राइट लेवल (TaRL)

एक शिक्षण पद्धति जो छात्रों को उनकी वर्तमान सीखने के स्तर के अनुसार समूहित करती है, भले ही वे अलग-अलग ग्रेड में हों। इसका उद्देश्य प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करके सीखने के परिणामों में सुधार करना है।

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