संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास (UNCTAD) की 'अदृश्य बाधाएं: गैर-प्रशुल्क उपायों की लागत' (Invisible Barriers: The Costs of Non-Tariff Measures) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी हुई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक व्यापार अब तेजी से विनियामक प्रतिबंधों, तकनीकी मानकों की आवश्यकता और भू-राजनीतिक व्यापारिक कार्रवाइयों से प्रभावित हो रहा है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- गैर-टैरिफ उपायों (NTMs) का वर्चस्व: अब 88% देशों को टैरिफ (सीमा शुल्क) की तुलना में गैर-टैरिफ उपायों के रूप में अधिक निर्यात लागत का भुगतान करना पड़ रहा है।
- विकासशील देशों पर दोहरा बोझ: विकासशील देशों को बढ़ते टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों (NTMs) के अनुपालन की उच्च लागत, दोनों का दोहरा बोझ झेलना रहा है।
- अल्पविकसित देश (LDCs), G20 बाजारों में होने वाले अपने निर्यात का लगभग 10% खो देते हैं, क्योंकि जटिल नियमों के अनुपालन के लिए उनके पास प्रायः वित्तीय संसाधनों और मान्यता प्राप्त परीक्षण सुविधाओं की कमी होती है।
- आधुनिक व्यापार वार्ताएं: आधुनिक व्यापार वार्ताओं का ध्यान अब केवल टैरिफ कम करने से हटकर नियमों को सरल बनाने पर केंद्रित हो गया है। उदाहरण के लिए: यूरोपीय संघ-भारत व्यापार समझौता।
UNCTAD की सिफारिशें
- पारदर्शिता बढ़ाना: पारदर्शिता बढ़ाने से गैर-टैरिफ बाधाओं से जुड़ी व्यापारिक लागतों को लगभग 19% तक कम किया जा सकता है।
- विनियामक सहयोग और समन्वय को बढ़ावा देना: घरेलू नियमों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करने से सुरक्षा से समझौता किए बिना गैर-टैरिफ उपायों से जुड़ी व्यापार लागतों में 15-30% तक की कमी आ सकती है।
- उदाहरण के लिए: कोडेक्स एलीमेंटेरियस, अंतर्राष्ट्रीय पादप-संरक्षण अभिसमय (IPPC), विश्व पशु-स्वास्थ्य संगठन (WOAH) जैसे मानकों का अनुपालन।
- साउथ-साउथ देशों के मध्य व्यापार एकीकरण को बढ़ावा देना: पारदर्शिता और विनियामक सहयोग का लाभ उठाकर विकासशील देशों के बीच व्यापार को बढ़ाया जा सकता है।
- अन्य सिफारिशें: क्षमता-निर्माण और प्रौद्योगिकी के स्तर पर सहायता प्रदान करना, व्यापार कूटनीति में अल्पविकसित देशों (LDCs) को सशक्त बनाना आदि।

संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास (UNCTAD) के बारे में
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