प्रधान मंत्री ने भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया | Current Affairs | Vision IAS
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  • "द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ़ द अवेकन्ड वन" नाम की एक इंटरनेशनल प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध के पिपरहवा रत्न के अवशेष दिखाए गए हैं, जिन्हें 127 साल बाद भारत वापस लाया गया है।
  • 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने उत्तर प्रदेश में इनकी खोज की थी। ये अवशेष प्राचीन कपिलवस्तु से जुड़े हैं, जहाँ बुद्ध ने अपना शुरुआती जीवन बिताया था।
  • बुद्ध की सही वाणी, सही आचरण, सही जीवन, सामाजिक समानता, मध्य मार्ग और माइंडफुलनेस की शिक्षाएँ शासन, सामाजिक न्याय, पर्यावरण की स्थिरता और नैतिक टेक्नोलॉजी के लिए आज भी काम की हैं।

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“प्रकाश और कमल: प्रबुद्ध व्यक्ति के अवशेष (The Light & the Lotus: Relics of the Awakened One)” शीर्षक से इस प्रदर्शनी का आयोजन हो रहा है।  इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए प्रधान मंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध द्वारा दिखाया गया मार्ग और उनकी दी हुई शिक्षा सम्पूर्ण मानवता की साझा धरोहर है।

  • यह ऐतिहासिक अवसर 127 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भारत में वापस लाए गए भगवान बुद्ध के पिपरहवा रत्न-अवशेषों (Piprahwa gem relics) के पुनः एक साथ आने का प्रतीक है। 

पिपरहवा अवशेषों के बारे में

  • खोज: इन पवित्र अवशेषों की खोज वर्ष 1898 में ब्रिटिश सिविल इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेप्पे द्वारा की गई।
  • स्थान: इनकी खोज उत्तर प्रदेश में भारत–नेपाल सीमा के निकट स्थित पिपरहवा के एक प्राचीन बौद्ध स्तूप में की गई थी।
  • महत्त्व: पुरातात्विक साक्ष्य पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, जिसकी व्यापक रूप से उस स्थान के रूप में पहचान की गयी है जहाँ भगवान बुद्ध ने "महाभिनिष्क्रमण" (Renunciation) से पहले अपने प्रारंभिक जीवन का अधिकांश हिस्सा बिताया था।
    • ये पवित्र अवशेष गौतम बुद्ध के नश्वर अवशेषों से जुड़े माने जाते हैं। 

बुद्ध की शिक्षाओं की वर्तमान में प्रासंगिकता

  • सुशासन और राजनीतिक सत्यनिष्ठा: सम्यक वाक् (Right Speech), सम्यक आचरण (Right Conduct) और सम्यक आजीविका (Right Livelihood) जैसे सिद्धांतों को लोक प्रशासन में लागू करके नागरिक-केंद्रित शासन को बढ़ावा दिया जा सकता है।  
  • सामाजिक समानता और न्याय: गौतम बुद्ध ने ‘संघ’ का द्वार सामाजिक दर्जे की परवाह किए बिना सभी के लिए खोल दिया। यह कदम आज महिलाओं, समलैंगिक व्यक्तियों और सेक्स-वर्कर सहित अन्य कमजोर वर्गों के विरुद्ध भेदभाव समाप्त करने का आधुनिक आधार प्रदान करता है।  
  • पर्यावरणीय संधारणीयता और उपभोक्तावाद: गौतम बुद्ध की मध्यम मार्ग (मद्धिमा प्रतिपदा) की शिक्षा अत्यधिक विलासिता और कठोर तपस्या के बीच संतुलित जीवन का संदेश देती है। यह शिक्षा संसाधनों के अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान प्रस्तुत करती है। 
  • प्रौद्योगिकी और विज्ञान में नैतिकतासादा जीवन और सभी जीवों के प्रति दया के बुद्ध के सिद्धांतों को अपनाकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रगति नैतिक मूल्यों की कीमत पर न हो
    • उपर्युक्त के अतिरिक्त, विपश्यना या सचेतनता (माइंडफुलनेस) और सम्यक दृष्टि पर भगवान बुद्ध द्वारा बल वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासु प्रवृत्ति को भी प्रोत्साहित करता है। 
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विपश्यना या सचेतनता (Mindfulness)

A meditation practice and a core Buddhist concept focusing on present-moment awareness without judgment. It is crucial for developing a scientific outlook, critical thinking, and ethical considerations in technological advancements.

मध्यम मार्ग (मद्धिमा प्रतिपदा) (Middle Way)

A core teaching of Buddhism that advocates for a balanced life, avoiding extremes of indulgence and severe asceticism. It offers solutions to contemporary issues like resource overconsumption and climate change by promoting moderation.

संघ (Sangha)

In Buddhism, it refers to the monastic community of monks and nuns. Its historical openness to all social strata, regardless of caste or gender, provides a modern basis for advocating for inclusivity and ending discrimination against marginalized groups.

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