वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन, राष्ट्रीय संप्रभुता का हनन, एकपक्षीय सशस्त्र आक्रमण और अमेरिकी साम्राज्यवाद जैसी चिंताओं को उजागर किया है।
- 2019 के बाद वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत-वेनेजुएला द्विपक्षीय संबंध कमजोर हुए हैं। इसलिए भारत पर इस हमले का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने की संभावना कम है।
अमेरिकी हमले के संभावित कारण
- मुनरो सिद्धांत (Monroe Doctrine) को पुनर्जीवन: अमेरिकी महाद्वीपों (उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका) यानी पश्चिमी गोलार्ध में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अपना आधिपत्य (हेजेमनी) को पुनः स्थापित करना।
- लैटिन अमेरिका में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना: चीन, विश्व में कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है। वह वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है।
- वेनेजुएला के संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना: वेनेजुएला में विश्व का सबसे बड़ा तेल निक्षेप (भंडार), प्राकृतिक गैस का विशाल निक्षेप और दक्षिण अमेरिका में स्वर्ण का सबसे बड़ा निक्षेप है।
- अन्य कारण:
- अमेरिका आरोप लगाता रहा है कि वेनेजुएला सरकार द्वारा प्रायोजित तरीके से अमेरिका में मादक पदार्थों की तस्करी की जाती रही है, और इस पर अंकुश लगाना आवश्यक है।
- समाजवाद के प्रसार को रोकना,
- वेनेजुएला से अमेरिका में बड़ी संख्या में आने वाले अवैध प्रवासियों को रोकना, आदि।
‘अमेरिकी साम्राज्यवाद’ के संभावित दुष्परिणाम
- अन्य देशों पर हमला करने की अमेरिकी चरित्र की पुनरावृति: अमेरिका ने 2003 में इराक में “तानाशाह को हटाने” और “लोकतंत्र की स्थापना” के झूठे बहाने बनाकर उस पर आक्रमण किया था। हालांकि, इस आक्रमण के परिणामस्वरूप पश्चिम एशिया में अस्थिरता उत्पन्न हुई और ISIS जैसे आतंकवादी समूहों का उदय हुआ।
- अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंडों का उल्लंघन करने की गलत परंपरा: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की “गिरफ्तारी और जबरन निर्वासन” को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2 का प्रत्यक्ष उल्लंघन माना गया है।
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2 राष्ट्रों को किसी अन्य देश के विरुद्ध बल प्रयोग नहीं करने का विधिक दायित्व निर्धारित करता है। केवल “आत्मरक्षा” जैसे कुछ अपवादों में ही इस तरह की कार्रवाई की अनुमति दी गई है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अधिदेश (मैंडेट) की उपेक्षा: संयुक्त राज्य अमेरिका ने सुरक्षा परिषद के अधिदेश की उपेक्षा करते हुए स्वयं को “न्यायाधीश और जल्लाद (Judge and Executioner),” दोनों की भूमिका में स्थापित कर लिया है।
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चेतावनी: शीत युद्ध के बाद एक “स्थिर उदार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था” स्थापित करने की आशा अब विफल होती दिखती है। यह वेनेजुएला में संयुक्त राज्य अमेरिका की कार्रवाई और यूक्रेन में रूस की कार्रवाई से स्पष्ट हो जाता है।