भारत सरकार ने डीप-टेक स्टार्ट-अप्स के लिए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) के औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास संवर्धन कार्यक्रम (IRDPP) के तहत मान्यता व व वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए ‘3 वर्षों से अस्तित्वमान कंपनी होने’ की शर्त को हटा दिया है।
- IRDPP का उद्देश्य: उद्योगों और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान संगठनों (SIROs) में अनुसंधान एवं विकास (R&D) अवसंरचना को मजबूत करना; तथा
- IRDPP योजना के तहत मान्यता प्राप्त संस्थाएं विभिन्न राजकोषीय प्रोत्साहनों और सहायता उपायों के लिए पात्र हैं।
डीप-टेक क्या है?
- यह उन अत्याधुनिक और अक्सर क्रांतिकारी परिवर्तन वाली तकनीकों को संदर्भित करता है, जो गहन वैज्ञानिक खोजों, इंजीनियरिंग नवाचारों या अनुसंधान क्षेत्रों में प्रगति पर आधारित होती हैं।
- उदाहरण: AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), क्वांटम कंप्यूटिंग, नैनो-टेक, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, उन्नत सामग्री विज्ञान आदि।
- डीप-टेक स्टार्ट-अप्स जटिल और अनसुलझी समस्याओं के लिए मौजूदा उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके बाजार में नए समाधान निर्मित करते हैं या और भी अधिक उन्नत तकनीकों का आविष्कार करते हैं।
भारत में डीप-टेक स्टार्ट-अप तंत्र
- 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत में 3,600 से अधिक स्टार्ट-अप्स हैं। 2030 तक डीप-टेक क्षेत्रक में इनकी संख्या 10,000 तक पहुंचने की उम्मीद है। वैश्विक डीप-टेक तंत्र में भारत छठे स्थान पर है।
- चुनौतियां: भारत का वेंचर कैपिटल (VC) परिदृश्य 'दीर्घावधि में उत्तम लाभ’ की बजाय त्वरित प्रतिफल को प्राथमिकता देता है। इसके अलावा, दीर्घ जेस्टेशन अवधि और शिक्षा जगत एवं उद्योग के बीच सीमित सहयोग जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं।
भारत में डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए शुरू की गई पहलें
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