राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने ताजमहल के आसपास पर्यावरणीय उल्लंघन पर नोटिस जारी किया | Current Affairs | Vision IAS
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In Summary

  • एनजीटी ने ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन में निर्माण और वृक्षों की कटाई का हवाला देते हुए पर्यावरण मानदंडों के अनुपालन न करने पर नोटिस जारी किया है।
  • ताजमहल की रक्षा के लिए एमसी मेहता मामले के बाद 1996 में ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन (टीटीजेड) की स्थापना की गई थी, जो एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र है।
  • एनजीटी, जो 2010 में स्थापित एक वैधानिक निकाय है, पर्यावरण कानूनों को लागू करती है और प्रदूषण नियंत्रण पर महत्वपूर्ण निर्णय दे चुकी है।

In Summary

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। इसमें उसने संरक्षित ताज ट्रैपेजियम ज़ोन (TTZ) में पर्यावरणीय मानदंडों के उल्लंघन पर चिंता प्रकट की है।

  • क्षेत्र में विवेकहीन निर्माण और वृक्षों की कटाई के कारण हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) नष्ट हो गया है। साथ ही, पक्षियों व तितलियों के प्राकृतिक पर्यावास में व्यवधान भी उत्पन्न हुआ है।
  • पिछले कुछ वर्षों में वायु और जल प्रदूषण के कारण ताजमहल का सफेद संगमरमर पीला व काला पड़ने लगा है। वायुजनित कणों (Airborne particulates) के कारण घटित होने वाली इस घटना को "स्टोन कैंसर" कहा जाता है।

ताज ट्रैपेजियम ज़ोन (TTZ) के बारे में

  • यह ताजमहल के चारों ओर 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैला (ट्रेपीजॉयड या समलम्ब चतुर्भुज) एक संरक्षित पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है। इसकी स्थापना 1996 के एम.सी. मेहता वाद के तहत की गई थी। यह ज़ोन आगरे के किले और फतेहपुर सीकरी के लिए भी निर्धारित किया गया है। 
    • TTZ प्राधिकरण: केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत ताज ट्रैपेजियम जोन (निवारण और नियंत्रण) प्राधिकरण का गठन किया है। इसका गठन ताजमहल के आसपास उद्योगों, निर्माण और उत्सर्जन को विनियमित करने के लिए किया गया है। यह प्राधिकरण उच्चतम न्यायालय के 1996 के निर्णय के बाद गठित किया गया है। 
  • इसके अतिरिक्त, एम.सी. मेहता वाद (2015) के तहत, उच्चतम न्यायालय ने ताजमहल से 5 किमी की हवाई दूरी के भीतर वृक्षों की कटाई पर बिना पूर्व अनुमति के प्रतिबंध लगा दिया है। अब वृक्षों की कटाई के लिए उच्चतम न्यायालय से पूर्व अनुमति लेनी होगी।  

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के बारे में

  • स्वरूप: NGT एक सांविधिक निकाय है। इसकी स्थापना 2010 में 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम' के तहत पर्यावरण संरक्षण से संबंधित मामलों के त्वरित निपटान के लिए की गई थी।
  • प्रवर्तन: यह प्रभावी न्यायिक निगरानी के माध्यम से निम्नलिखित कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करता है-
    • जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974;
    • वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981;
    • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 आदि। 
      • अपवाद: NGT के अधिकार क्षेत्र में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972, भारतीय वन अधिनियम 1927 और अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 शामिल नहीं हैं।

NGT के प्रमुख निर्णय

  • वर्धमान कौशिक वाद (2014-15): दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 10 वर्ष पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध।
  • एम.सी. मेहता (गंगा प्रदूषण) वाद (1988): सीवेज के उपचार और औद्योगिक अपशिष्ट को नियंत्रित करने में विफल रहने पर राज्यों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जाएगा। 
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वर्धमान कौशिक वाद

दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 10 वर्ष पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय।

सांविधिक निकाय

यह एक ऐसा संगठन होता है जिसकी स्थापना किसी अधिनियम (कानून) के तहत की जाती है। यह किसी सरकारी विभाग का हिस्सा नहीं होता, बल्कि संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए विशिष्ट कानून के तहत कार्य करता है।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

यह अधिनियम भारत में पर्यावरण की सुरक्षा और सुधार के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करता है। इसके तहत पर्यावरण (संरक्षण) के लिए कई नियम और प्राधिकरण स्थापित किए गए हैं।

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