राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। इसमें उसने संरक्षित ताज ट्रैपेजियम ज़ोन (TTZ) में पर्यावरणीय मानदंडों के उल्लंघन पर चिंता प्रकट की है।
- क्षेत्र में विवेकहीन निर्माण और वृक्षों की कटाई के कारण हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) नष्ट हो गया है। साथ ही, पक्षियों व तितलियों के प्राकृतिक पर्यावास में व्यवधान भी उत्पन्न हुआ है।
- पिछले कुछ वर्षों में वायु और जल प्रदूषण के कारण ताजमहल का सफेद संगमरमर पीला व काला पड़ने लगा है। वायुजनित कणों (Airborne particulates) के कारण घटित होने वाली इस घटना को "स्टोन कैंसर" कहा जाता है।
ताज ट्रैपेजियम ज़ोन (TTZ) के बारे में
- यह ताजमहल के चारों ओर 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैला (ट्रेपीजॉयड या समलम्ब चतुर्भुज) एक संरक्षित पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है। इसकी स्थापना 1996 के एम.सी. मेहता वाद के तहत की गई थी। यह ज़ोन आगरे के किले और फतेहपुर सीकरी के लिए भी निर्धारित किया गया है।
- TTZ प्राधिकरण: केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत ताज ट्रैपेजियम जोन (निवारण और नियंत्रण) प्राधिकरण का गठन किया है। इसका गठन ताजमहल के आसपास उद्योगों, निर्माण और उत्सर्जन को विनियमित करने के लिए किया गया है। यह प्राधिकरण उच्चतम न्यायालय के 1996 के निर्णय के बाद गठित किया गया है।
- इसके अतिरिक्त, एम.सी. मेहता वाद (2015) के तहत, उच्चतम न्यायालय ने ताजमहल से 5 किमी की हवाई दूरी के भीतर वृक्षों की कटाई पर बिना पूर्व अनुमति के प्रतिबंध लगा दिया है। अब वृक्षों की कटाई के लिए उच्चतम न्यायालय से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के बारे में
NGT के प्रमुख निर्णय
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