EAC-PM के शोध पत्र में भारत के ‘प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक ऋण’ फ्रेमवर्क में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव दिया गया | Current Affairs | Vision IAS

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प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने ‘प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक ऋण का आर्थिक प्रभाव विश्लेषण’ (Economic Impact Analysis of Priority Sector Lending) शीर्षक से यह शोध पत्र जारी किया है।

शोध पत्र में रेखांकित मुख्य मुद्दे:

  • वर्तमान फ्रेमवर्क की कमियां :
    • बैंकों के प्रदर्शन में अंतर: नियम के अनुसार वाणिज्यिक बैंकों को अपने कुल ऋण वितरण का 40% प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक को ऋण देना होता है। लेकिन निजी क्षेत्र के बैंक प्रत्यक्ष रूप से ऋण देने के बजाय, प्रायः अप्रत्यक्ष साधनों के द्वारा इस लक्ष्य को पूरा कर रहे हैं। 
      • इन अप्रत्यक्ष साधनों में प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग सर्टिफिकेट्स (PSLCs) खरीदना और ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (RIDF) में जमा करना शामिल हैं।
      • इन अप्रत्यक्ष साधनों को राष्ट्रीयकृत बैंक और लघु वित्त बैंक (SFBs) उपलब्ध कराते हैं।
    • आर्थिक दक्षता के स्तर पर नुकसान:  प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक को ऋण देने की अनिवार्यता से कुल कारक उत्पादकता (Total Factor Productivity - TFP) में कमी आती है, पूंजी के संचयन (capital hoarding) को बढ़ावा मिलता है तथा कम लाभकारी परियोजनाओं को वित्तपोषित करना पड़ता है।
      • कुल कारक उत्पादकता किसी अर्थव्यवस्था या संस्था की कार्यकुशलता को मापने की एक पद्धति है। इसमें श्रम, पूंजी और कच्चे माल जैसे सभी इनपुट्स की लागत की तुलना में प्राप्त उत्पादन का आकलन किया जाता है।
    • उच्च प्रशासनिक लागत और डिफॉल्ट होने का जोखिम: प्राथमिकता-प्राप्त  क्षेत्रक ऋण (PSL) पोर्टफोलियो में प्रशासनिक खर्च अधिक होता है और ऋण के डिफॉल्ट होने का जोखिम भी अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
    • विकास पर सीमित प्रभाव: जिला-स्तरीय विश्लेषण  से पता चलता है कि इस पहल का आर्थिक उत्पादन पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ा। इसके आकलन के लिए आर्थिक उत्पादन के संकेतक के रूप में रात्रिकालीन रोशनी (nighttime luminosity) का उपयोग किया गया। 
      • रात्रिकालीन रौशनी की तीव्रता प्रायः सैटेलाइट्स से मापी जाती है। यह पृथ्वी पर कृत्रिम रोशनी की तीव्रता दर्शाती है और मानव कार्यों, शहरीकरण, आर्थिक विकास तथा ऊर्जा खपत का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।
    • क्षेत्रीय असंतुलन10% से भी कम जिले कुल प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक ऋण के 45% से अधिक हिस्से प्राप्त करते हैं। इनमें मुख्यतः राज्य की राजधानियाँ, औद्योगिक केंद्र तथा दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्र शामिल हैं।  
  • नीतिगत सिफारिशें:
    • सामाजिक समानता पर ध्यान: प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्रक ऋण (PSL) को विकास के इंजन के बजाय मुख्य रूप से एक सामाजिक उपाय के रूप में देखा जाना चाहिए।
      • इसमें 'कॉर्पोरेट कृषकों' जैसी पुरानी श्रेणियों को बाहर कर केवल लघु/सीमांत कृषकों, सूक्ष्म उद्यमों और कमजोर वर्गों को लक्षित करना चाहिए।
      • बैंकों को अधिक लचीलापन देने के लिए ऋण देने के कुल लक्ष्य को कम करने पर विचार किया जाना चाहिए।
    • समग्र दृष्टिकोण अपनाना:  अक्षम पिछड़े क्षेत्रों में केवल ‘ऊपर से थोपे गए ऋण लक्ष्यों (top-down credit mandates)’ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
    • लक्षित ऋण वितरण के साथ अन्य वित्तीय उपाय करना: ऋण सहायता देने के लिए अवसंरचना, कौशल विकास और बाज़ार से जोड़ने जैसी मूल समस्याओं को दूर करने वाली वित्तीय शर्तें लगानी चाहिए। 

भारत में प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्रक ऋण (PSL) फ्रेमवर्क

  • परिभाषा: PSL, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक पहल है। यह पहल बैंकों को अपने ऋण का निर्दिष्ट हिस्सा विशिष्ट प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रकों को आवंटित करने के लिए अनिवार्य करती है।
    • प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रक वे क्षेत्रक हैं जिन्हें सरकार और RBI विकास के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन वे सूचना की कमीबड़ी कंपनियों के प्रति बैंकों के झुकाव या सामाजिक/जातिगत पूर्वाग्रहों के कारण ऋण लेने से वंचित रह जाते हैं।
  • ऋण वितरण लक्ष्य:
    • घरेलू वाणिज्यिक बैंकों और विदेशी बैंकों (20 से अधिक शाखाओं वाले) के लिए: कुल ऋण वितरण का 40%;
    • लघु वित्त बैंकों (SFBs) और शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए: कुल ऋण वितरण का 60%;
    • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के लिए: कुल ऋण वितरण का 75% .
  • PSL ऋण की वर्तमान स्थिति: PSL के तहत वितरित ऋण 2019 के ₹23.01 लाख करोड़ से 85% बढ़कर 2024 में ₹42.73 लाख करोड़ हो गया।
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क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks - RRBs)

ये भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं जो मुख्य रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कृषि और अन्य ग्रामीण गतिविधियों के लिए ऋण और अन्य बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं। इन्हें विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों की सेवा के लिए स्थापित किया गया है।

लघु वित्त बैंक (Small Finance Banks - SFBs)

ये भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा लाइसेंस प्राप्त बैंक हैं जिनका मुख्य उद्देश्य वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना है। ये मुख्य रूप से छोटे व्यवसायों, लघु किसानों और असंगठित क्षेत्र के व्यक्तियों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करते हैं।

रात्रिकालीन रोशनी (Nighttime Luminosity)

यह सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके मापी जाने वाली पृथ्वी की सतह पर कृत्रिम रोशनी की तीव्रता है। इसे अक्सर शहरीकरण, आर्थिक गतिविधि और मानव विकास के एक प्रॉक्सी संकेतक के रूप में प्रयोग किया जाता है।

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