भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों का दर्जा बढ़ाकर "विस्तारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी" किया | Current Affairs | Vision IAS

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भारत और वियतनाम ने अपने संबंधों को और अधिक मजबूत करते हुए इसे “उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी” (Enhanced Comprehensive Strategic Partnership) का दर्जा दिया है। यह पहले से विद्यमान 2016 की ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’  का उन्नत रूप है। यह निर्णय वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान लिया गया।

वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा की मुख्य विशेषताएं और परिणाम

  • व्यापार और आर्थिक सहयोग: भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य 2030 तक 25 बिलियन डॉलर निर्धारित किया गया है। वर्तमान में यह लगभग 16 बिलियन डॉलर है।
    • दोनों पक्षों ने आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की शीघ्र समीक्षा और उसे संपन्न करने पर जोर दिया।
  • 13 रणनीतिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर: ये समझौते अति-महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) के क्षेत्र में सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और फिनटेक, स्वास्थ्य-देखभाल सेवा, प्राचीन चाम पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण आदि क्षेत्रकों में किए गए हैं।
  • रक्षा और सुरक्षा सहयोग: दोनों देश रणनीतिक कूटनीति-रक्षा वार्ता (2+2) तंत्र स्थापित करेंगे।
  • समुद्री क्षेत्रक में सहयोग: वियतनाम हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) में शामिल हो गया है।
    • हिंद-प्रशांत महासागर पहल  एक स्वैच्छिक और गैर-संधि आधारित पहल है। इसे भारत ने वर्ष 2019 में थाईलैंड में हुए 'पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS)' के दौरान शुरू किया था। इसका उद्देश्य एक स्वतंत्र, खुला  और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना है।

भारत के लिए वियतनाम का महत्व

  • एक्ट ईस्ट पॉलिसी: वियतनाम आसियान में भारत का एक मुख्य भागीदार है। साथ ही, वह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति'विज़न महासागर' (MAHASAGAR) और हिंद-प्रशांत विजन में एक महत्वपूर्ण सहयोगी है।
  • भू-रणनीतिक स्थिति: वियतनाम की भौगोलिक स्थिति हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापारिक समुद्री मार्गों की निरंतरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • चीन को प्रतिसंतुलित करना: दोनों देश संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) 1982 के अनुसार दक्षिण चीन सागर में नौवहन की स्वतंत्रता और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं।
  • आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण: वियतनाम के साथ सहयोग से भारत को अति-महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के आयात और दुर्लभ मृदा खनिजों (rare earths) की आपूर्ति में मदद मिलती है। इससे भारत के विनिर्माण क्षेत्रक को मजबूती मिलती है। इससे वैश्विक स्तर पर इनकी आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: भारतीय कंपनियों ने दक्षिण चीन सागर के वियतनामी क्षेत्रों में तेल और गैस अन्वेषण परियोजनाओं में निवेश किया है। ये क्षेत्र हाइड्रोकार्बन के निक्षेप के मामले में अत्यंत समृद्ध हैं।
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दुर्लभ मृदा खनिज (rare earths)

ये 17 धात्विक तत्वों का एक समूह हैं जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और रक्षा प्रणालियों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनकी आपूर्ति मुख्य रूप से कुछ देशों तक सीमित है।

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) 1982

यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो महासागरों और समुद्री क्षेत्रों के उपयोग, संरक्षण और प्रबंधन को विनियमित करती है। यह समुद्री सीमाओं, नेविगेशन अधिकारों और समुद्री संसाधनों के संबंध में नियम स्थापित करती है।

एक्ट ईस्ट पॉलिसी

यह भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है जिसका उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया के साथ भारत के आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है।

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