IIT दिल्ली के एक अध्ययन के अनुसार, भारत फ्लू गैस डी-सल्फराइजेशन (FGD) जैसी प्रणालियों के माध्यम से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) उत्सर्जन को पूरी तरह नियंत्रित करके प्रत्येक वर्ष लगभग 1,24,564 मौतों को रोक सकता है।
सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) के बारे में:
- यह रंगहीन और विषाक्त गैस है, जिसकी गंध तीखी और दम घोंटने वाली होती है।
- द्वितीयक (सेकेंडरी) प्रदूषकों में भूमिका: SO2 वायुमंडल में अभिक्रिया करके द्वितीयक अकार्बनिक एरोसोल बनाती है। इसमें सल्फेट, नाइट्रेट और अमोनियम शामिल हैं।
- ये प्रदूषक PM2.5 को बढ़ाते हैं। यह सूक्ष्म कण पदार्थ हृदय और श्वसन रोगों से जुड़ा है।
- यह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा अधिसूचित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (National Ambient Air Quality Standards: NAAQS) के तहत निगरानी किए जाने वाला एक प्रदूषक है।
- NAAQS की निगरानी में NO2 (नाइट्रोजन ऑक्साइड), PM10, PM2.5, ओजोन, सीसा, कार्बन मोनोआक्साइड (CO), अमोनिया, बेंजीन, बेंजो(ए)पाइरीन, आर्सेनिक और निकल शामिल हैं।
- SO2 के प्रमुख स्रोत: कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र (सबसे बड़े स्रोत) और धातुओं के अयस्कों को गलाना। अन्य स्रोतों में पेट्रोलियम शोधन, ज्वालामुखी उद्गार और परिवहन (जहाज/ लोकोमोटिव) से होने वाले उत्सर्जन शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (Fair and Remunerative Price) में 10 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है।
उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) के बारे में:
- FRP केंद्र सरकार द्वारा घोषित वह न्यूनतम मूल्य है जिस पर चीनी मिलें किसानों से गन्ना खरीदने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।
- उद्देश्य: गन्ना किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना।
- विधिक आधार: इसे गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के तहत शुरू किया गया था।
- संस्थागत तंत्र: इसकी सिफारिश कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) द्वारा की जाती है। इसे आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) द्वारा अनुमोदित किया जाता है।
- मानदंड: FRP तय करते समय उत्पादन लागत और गन्ना से चीनी की प्राप्ति दर जैसे कारकों पर विचार किया जाता है। इसके अतिरिक्त, वैकल्पिक फसल रिटर्न और उप-उत्पाद मूल्य जैसे कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है।
- राज्य परामर्शित मूल्य (State Advised Price: SAP): उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे कुछ राज्य SAP की घोषणा करते हैं। यह सामान्यतः FRP से अधिक होता है।
भारत और यूरोपीय संघ ने 15.2 मिलियन यूरो (लगभग 169 करोड़ रुपये) की संयुक्त पहल शुरू की। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिकल वाहनों (EV) की बैटरियों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है। यह पहल भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) के वर्किंग ग्रुप-2 के तहत शुरू की गई है।
- यह पहल यूरोपीय संघ के होराइजन यूरोप कार्यक्रम और भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के माध्यम से वित्त पोषित की जाएगी।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) के बारे में:
- प्रारंभ: फरवरी 2023 में
- उद्देश्य: इसका उद्देश्य चीन पर यूरोपीय संघ की निर्भरता और रूस पर भारत की निर्भरता को कम करते हुए भारत और यूरोप को रणनीतिक स्वायत्तता की ओर ले जाने का प्रयास करना है।
- तीन मुख्य कार्य समूह (WGs):
- WG 1: रणनीतिक प्रौद्योगिकियां, डिजिटल शासन और कनेक्टिविटी।
- WG 2: हरित और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियां।
- WG 3: लचीली मूल्य श्रृंखलाएं, व्यापार और निवेश।
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1 sourceभारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) ने SRM इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी चेन्नई में 'मिशन मौसम' के तहत एक अत्याधुनिक 'अर्बन टेस्टबेड' और 'एरोसोल वेधशाला' स्थापित की है।
मिशन मौसम के बारे में:
- शुरुआत: 2024 में
- मंत्रालय: केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES)।
- कार्यान्वयन एजेंसी: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (NCMRWF) और IITM
- बजट: 2 वर्षों के लिए 2,000 करोड़ रुपये।
- लक्ष्य:
- राष्ट्र को 'वेदर-रेडी' और 'क्लाइमेट स्मार्ट' बनाना।
- मौसम और जलवायु पूर्वानुमान सेवाओं में सुधार करना। यह कृषि, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण विकास सहित कई क्षेत्रों के लिए समय पर और सटीक अवलोकन, मॉडलिंग और पूर्वानुमान संबंधी जानकारी सुनिश्चित करता है।
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1 sourceहाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वस्थ भारत पोर्टल शुरू किया।
स्वस्थ भारत पोर्टल के बारे में:
- स्वरूप: यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के रूप में कार्य करता है। यह एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API)-आधारित फेडरेटेड आर्किटेक्चर के माध्यम से विभिन्न स्वतंत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रणालियों को जोड़ता है।
- ABDM के अनुरूप: यह पोर्टल आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA), हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स रजिस्ट्री तथा हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री के साथ सहज रूप से एकीकृत है। इससे मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स का सुरक्षित तरीके से आदान-प्रदान संभव होता है।
- फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं का सशक्तिकरण: यह आशा कार्यकर्ताओं (ASHAs), सहायक नर्स मिडवाइफ (ANMs), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHOs) और चिकित्सा अधिकारियों को एक ही मंच पर कार्य करने की सुविधा प्रदान करता है। इससे कई अलग-अलग लॉगिन और बार-बार डेटा दर्ज करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के बारे में:
- उद्देश्य: भारत की स्वास्थ्य-देखभाल व्यवस्था में विभिन्न हितधारकों के बीच मौजूद अंतर को कम करते हुए एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए मजबूत डिजिटल आधारभूत संरचना विकसित करना।
- प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना।
- योजना अवधि: 5 वर्ष।
- कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA)।
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1 sourceCSIR-CRRI और BPCL को 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' से मान्यता प्राप्त हुई है। यह मान्यता तकनीकी वस्त्र (Technical Textile) जियोसेल का उपयोग करके सड़क के एक खंड का निर्माण करने के लिए दी गई है। यह जियोसेल अनुपयोगी हो चुके प्लास्टिक अपशिष्ट से बनाई गई है।
जियोसेल्स के बारे में:
- संरचना: ये त्रि-आयामी, मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचनाएँ होती हैं, जिनमें सिंथेटिक पट्टियों का नियमित खुला जाल होता है। इन सेल्स को मिट्टी, बजरी, रेत, कंक्रीट या पुनर्चक्रित सामग्री से भरकर भूमि को स्थिर किया जाता है।
- उपयोग: इनका व्यापक उपयोग तटबंधों, सड़कों, ढलानों के निर्माण तथा भूमि संरक्षण कार्यों में किया जाता है।
- महत्व: ये ढलान की स्थिरता बढ़ाती हैं और अपरदन तथा भूस्खलन को रोकती हैं। ये निर्माण लागत और सामग्री के उपयोग को कम करती हैं। इसके साथ ही, ये सड़क के स्थायित्व को भी बढ़ाती हैं।
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1 sourceपरमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड (AERB) ने कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की इकाई 5 और 6 में प्रमुख उपकरणों की स्थापना की अनुमति दी है।
- कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (तमिलनाडु): यह भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। इसे रूसी सहयोग से विकसित किया गया है। इसका संचालन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा किया जाता है।
परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड (AERB) के बारे में:
- स्थापना: इसकी स्थापना परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के प्रावधान के अनुसार 1983 में राष्ट्रपति द्वारा की गई थी।
- शांति (SHANTI) अधिनियम, 2025: इस अधिनियम ने AERB को सांविधिक दर्जा प्रदान किया तथा उसे विनियामक शक्तियाँ, प्रवर्तन अधिकार और अधिक संस्थागत स्वायत्तता दी।
- मिशन: इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में आयनकारी विकिरण और परमाणु ऊर्जा के उपयोग से लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचे।
वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि प्लाज्मा की संरचना ब्लैक होल के आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाले बाह्य-आकाशगंगा जेट्स (extragalactic jets) के अलग-अलग और अत्यंत आकर्षक स्वरूप का कारण हो सकती है।
बाह्य-आकाशगंगा जेट के बारे में:
- ये प्लाज्मा और विकिरण की अत्यधिक ऊर्जावान, संकीर्ण धाराएं हैं। ये आकाशगंगा के केंद्रों पर सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास के क्षेत्रों से निकलती हैं।
- गति और विस्तार: ये लगभग प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं और अंतरिक्ष में हजारों प्रकाश-वर्ष तक फैले होते हैं।
- विकिरण स्पेक्ट्रम: ये रेडियो तरंगों से लेकर गामा किरणों तक, पूरे विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम में विकिरण उत्सर्जित करते हैं।
- ऊर्जा का स्रोत: ये सुपरमैसिव ब्लैक होल पर पदार्थ के संचय (एक्रिशन) द्वारा संचालित और मजबूत चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा निर्देशित होते हैं।