यह योजना राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन, 2021 के तहत वर्ष 2030 तक 100 मीट्रिक टन (MT) कोयले के गैसीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी।
- कोयला गैसीकरण वास्तव में एक प्रकार की ऊष्मा-रासायनिक (thermochemical) प्रक्रिया है, जिसमें कोयले को सिंथेसिस गैस (सिनगैस/Syngas) नामक बहुउपयोगी और ज्वलनशील गैसीय मिश्रण में परिवर्तित किया जाता है।
- सिनगैस कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोजन (H2) का मिश्रण है। इसका उपयोग यूरिया, मेथनॉल, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG) और अमोनिया जैसे उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।
- भारत में कोयला/लिग्नाइट भंडार की स्थिति: कोयला भंडार (401 बिलियन टन); लिग्नाइट भंडार (47 बिलियन टन)।
योजना की मुख्य विशेषताएं
- लक्ष्य: घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन प्रदान करके लगभग 75 मिलियन टन (MT) कोयले और लिग्नाइट का गैसीकरण करना।
- वित्तीय परिव्यय: ₹37,500 करोड़।
- वित्तीय प्रोत्साहन: संयंत्र और मशीनरी की लागत का अधिकतम 20%, जो परियोजना की उपलब्धि चरणों से जुड़े चार किश्तों में वितरित किया जाएगा।
- वित्तीय सहायता की सीमा:
- किसी एक परियोजना के लिए अधिकतम ₹5,000 करोड़,
- एक उत्पाद-केंद्रित परियोजनाओं (SNG और यूरिया को छोड़कर) के लिए ₹9,000 करोड़, और
- किसी एक इकाई समूह की सभी परियोजनाओं को अधिकतम ₹12,000 करोड़।
- नीतिगत सहायता: दीर्घकालिक निवेश प्रदान करने के लिए, सरकार ने ‘गैर-विनियमित क्षेत्रक (NRS) लिंकेज नीलामी फ्रेमवर्क’ के तहत कोयला लिंकेज अवधि को बढ़ाकर 30 वर्ष तक कर दिया है।
सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं का संवर्धन योजना का महत्व
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