संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा आरोपित उच्च टैरिफ दरों के बावजूद, वित्तीय वर्ष (FY) 2025-26 में भारत का कृषि निर्यात मूल्य तेजी से बढ़ते हुए 50 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया।
भारत के कृषि-निर्यात में संवृद्धि के कारण:
- बाजार का विविधीकरण: उदाहरण के लिए, समुद्री उत्पादों के निर्यात में चीन, वियतनाम, जापान और बेल्जियम जैसे देशों में भेजे जाने वाले शिपमेंट में भारी वृद्धि दर्ज की गई।
- वैश्विक गतिशील परिस्थितियाँ: विश्व में कॉफी के सबसे बड़े उत्पादक देशों (ब्राजील और वियतनाम) में कम फसल पैदावार के कारण भारतीय निर्यात के लिए बड़ा और लाभकारी अवसर उत्पन्न हुए।
- मूल्य संवर्धन: कुल कृषि निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। यह हिस्सेदारी वित्तीय वर्ष 2018 की लगभग 15% से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025 में लगभग 20% हो गई।
कृषि-निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख सरकारी पहलें:
- कृषि निर्यात नीति 2018 (AEP): यह नीति कृषि-निर्यात को दोगुना करने, निर्यात उत्पादों में विविधता लाने, तथा स्वदेशी, ऑर्गेनिक एवं पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है।
- कृषि उड़ान योजना 2.0: यह योजना शीघ्र खराब होने वाले कृषि-उत्पादों को बाजार तक तुरंत पहुंचाने के लिए वायु-परिवहन की सुविधा प्रदान करती है, विशेष रूप से पूर्वोत्तर और जनजातीय क्षेत्रों के उत्पादों के लिए।
- 'एक जिला एक निर्यात हब' (DEH) पहल: स्थानीय वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) के तहत प्रत्येक जिले से निर्यात क्षमता वाले विशिष्ट उत्पादों की पहचान की जाती है।
एपीडा (APEDA) की पहलें:
- फार्मर कनेक्ट पोर्टल का विकास: यह पोर्टल किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और सहकारी समितियों को निर्यातकों के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़ने और वार्ता करने के अवसर प्रदान करता है।
- भारती (BHARATI) पहल: इसके तहत 100 कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स को सहायता दी जा रही है। इसमें मुख्य ध्यान उच्च मूल्य वाले, GI-टैग प्राप्त और आर्गेनिक उत्पादों पर दिया जाता है, ताकि वर्ष 2030 तक 50 बिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।