राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार, 2025 | Current Affairs | Vision IAS

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केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025 की घोषणा की गई। इसमें मिजोरम के कावरथाह नॉर्थ गांव ने दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार की 'स्वच्छ और हरित पंचायत' श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।

राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार के बारे में

  • मुख्य उद्देश्य: सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को पुरस्कृत करना तथा ग्रामीण भारत में समावेशी, सहभागितापूर्ण और सतत विकास को बढ़ावा देना। इसे प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
  • मूल्यांकन ढांचा: यह सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs) के नौ विषयों (थीम) के अनुरूप है।
  • दो पुरस्कार श्रेणियां:
    • दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार (DDUPSVP): इसमें नौ विषयगत (थीमेटिक) क्षेत्रों में पंचायतों के प्रदर्शन के आधार पर उत्कृष्ट ग्राम पंचायतों को पुरस्कार प्रदान किया जाता है।
    • नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार (NDSPSVP): जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तरों पर समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने पहली बार, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत होने वाले अपराधों की निगरानी के लिए विशेष रूप से राष्ट्रीय स्तर के सांख्यिकीय डेटा को संकलित किया है।

  • सर्वाधिक दर्ज मामले: महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के बारे में

  • उद्देश्य: पशुओं को अनावश्यक कष्ट या पीड़ा पहुंचाने से रोकना।
    • यह अधिनियम "पशु" को इंसान के अतिरिक्त किसी भी अन्य जीवित प्राणी के रूप में परिभाषित करता है।
  • भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड (AWBI): यह धारा 4 के तहत केंद्र सरकार द्वारा स्थापित एक सांविधिक निकाय है। यह पशुओं को होने वाले कष्ट को रोकने के लिए नियम बनाने की सलाह देता है और पशु कल्याण पर शिक्षा को बढ़ावा देता है।

कैस्पियन सागर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच रूस और ईरान के बीच सैन्य तथा व्यापारिक आपूर्ति के लिए एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में उभरा है। इसका उपयोग  हथियार, ड्रोन, अनाज और अन्य वस्तुओं के परिवहन के लिए किया जा रहा है।

कैस्पियन सागर के बारे में

  • यह दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्देशीय जल निकाय (या सबसे बड़ी झील) है। यह पूर्वी यूरोप और पश्चिमी एशिया के चौराहे पर स्थित है।
  • यह पांच देशों की सीमाएं साझा करता है: रूस (उत्तर-पश्चिम), कजाकिस्तान (उत्तर-पूर्व), तुर्कमेनिस्तान (दक्षिण-पूर्व), ईरान (दक्षिण) और अजरबैजान (पश्चिम)।
  • जल अपवाह: वोल्गा नदी, कैस्पियन सागर में जल का मुख्य स्रोत है, जो इसके कुल जल प्रवाह का लगभग 80% प्रदान करती है।
    • चूँकि इसका कोई बाहरी निकास मार्ग नहीं है, इसलिए इसका जल केवल वाष्पीकरण के माध्यम से बाहर जाता है। इसी कारण इसका जल खारा हो गया है।
  • वर्तमान स्थिति: तेल और प्राकृतिक गैस से समृद्ध, कैस्पियन सागर 2001 और 2024 के बीच 46% तक सिमट गया है। इसका मुख्य कारण वाष्पीकरण की उच्च दर और वोल्गा नदी पर बांधों का निर्माण है।

असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में लंबे समय के बाद हाल ही में घड़ियाल देखा गया। 

साथ ही, एक हालिया सर्वेक्षण में पश्चिमी घाट में ओडोनेटा की 143 प्रजातियां दर्ज की गईं। यह सर्वेक्षण ज्ञात विविधता में 35% की कमी को उजागर करता है।

घड़ियाल के बारे में

  • विशेषताएं: यह एक विशाल मगरमच्छ प्रजाति है। नर की लंबाई 3 से 6 मीटर और मादा की लंबाई 2.5 से 4 मीटर तक होती है। इनका वजन 150 से 250 किलोग्राम के बीच होता है। इनके थूथन के सिरे पर एक बल्ब जैसा उभार होता है।
  • पर्यावास और वितरण: ये अब केवल भारत और नेपाल (लगभग 800 संख्या) में ही पाए जाते हैं। ये मुख्य रूप से गंगा की सहायक नदियों और महानदी में पाए जाते हैं।
    • हालांकि, हाल ही में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में दिखाई देने के बाद ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली में भी उनकी उपस्थिति की पुष्टि होती है।
  • संरक्षण स्थिति:
    • IUCN रेड लिस्ट'क्रिटिकली एन्डेंजर्ड'
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972:  अनुसूची I में सूचीबद्ध।

ओडोनेटा  के बारे में

  • वर्गिकी: इसमें ड्रैगनफ्लाइज़ (उप-गण एनिसोप्टेरा) और डैम्सेलफ्लाइज़ (उप-गण जाइगोप्टेरा) शामिल हैं।
  • पर्यावास: यह प्रजाति अंटार्कटिका को छोड़कर हर क्षेत्र में पाई जाती है। इसकी विश्व स्तर पर वितरित लगभग 6,000 ज्ञात जीवित प्रजातियां हैं (उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सर्वाधिक)।
  • विशेषताएं: वयस्क ओडोनेट्स की पहचान उनके दो जोड़ी पारदर्शी पंखों, लंबे पेट  और ढलान वाले वक्ष से की जाती है।

इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (IBA) ने 2030 तक रासायनिक उर्वरकों के साथ किण्वित जैविक खाद (Fermented Organic Manure - FOM) के 10% अनिवार्य सम्मिश्रण की सिफारिश की है।

किण्वित जैविक खाद (FOM) के बारे में

  • किण्वित जैविक खाद एक प्रकार का जैविक उर्वरक है, जिसे गोबर, फसल अवशेष और कम्पोस्ट जैसे जैविक पदार्थों के नियंत्रित किण्वन द्वारा तैयार किया जाता है।
  • यह संचालित बायोगैस या कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों का एक उपोत्पाद है जिसे उर्वरक के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • उपयोग: FOM पौधों को आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करता है, लाभकारी सूक्ष्मजीव गतिविधि को बढ़ावा देता है, और कृषि प्रणालियों में जलवायु सहिष्णुता को बढ़ावा देता है।

DRDO ने अपने 'एक्टिवली कूल्ड फुल स्केल स्क्रैमजेट कम्बस्टर' का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस परीक्षण में इसने 1,200 सेकेंड (पहले के 700 सेकंड की तुलना में अधिक) से अधिक का रन-टाइम प्राप्त किया।

स्क्रैमजेट प्रणोदन प्रणाली के बारे में

  • अवधारणा: स्क्रैमजेट का पूरा नाम सुपरसोनिक कंबस्टन रैमजेट है।
    • यह एक उन्नत एयर-ब्रीदिंग जेट इंजन है, जिसे हाइपरसोनिक गति पर दक्षतापूर्वक कार्य करने के लिए बनाया गया है। इसमें ईंधन का दहन सुपरसोनिक गति पर ही होता है।
  • कार्यप्रणाली: यह इंजन वाहन की आगे की तेज गति का उपयोग बाहरी हवा को अंदर खींचने और उसे संपीडित (कम्प्रेस) करने के लिए करता है, जिससे कंबस्टर में ईंधन जलाया जाता है।
    • हवा में गति करते समय यह वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग ऑक्सीकारक के रूप में करता है।
  • ईंधन के प्रकार: हाइड्रोजन या उन्नत तरल हाइड्रोकार्बन एंडोथर्मिक (ऊष्माशोषी) ईंधन।
  • लाभ: यह प्रणाली वाहन के कुल वजन को कम करती है, जिससे यह कम लागत में पुनः उपयोग योग्य अंतरिक्ष-यात्रा के लिए अत्यधिक दक्ष प्रणोदन प्रणाली बन जाती है। साथ ही, यह प्रणाली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के विकास के लिए भी एक आदर्श आधार प्रदान करती है।

भारत ने ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से 'दिव्यास्त्र' मिसाइल का दूसरा सफल उड़ान परीक्षण किया।

'दिव्यास्त्र' मिसाइल के बारे में

  • यह मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) सिस्टम से युक्त एक उन्नत अग्नि मिसाइल है।
  • MIRV प्रणाली: इसे मूल रूप से 1960 के दशक की शुरुआत में विकसित किया गया था। यह प्रणाली किसी एकल मिसाइल को कई परमाणु हथियार एक साथ ले जाने में सक्षम बनाती है, जिनमें से प्रत्येक स्वतंत्र रूप से अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है।
    • संयुक्त राज्य अमेरिका (MIRV तकनीक विकसित करने वाला पहला देश), रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और चीन के पास भी MIRV तकनीक है।

केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के बारे में

  • पद का सृजन:  CDS का पद वर्ष 2019 में सृजित किया गया था। यह 1999 की के. सुब्रमण्यम समिति (कारगिल समीक्षा समिति) की रिपोर्ट के आधार पर 2001 में गठित मंत्रियों के समूह (GoM) की सिफारिशों पर सृजित किया गया।
  • CDS के कार्य और जिम्मेदारियां:
    • वह तीनों सेनाओं के मामलों पर रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार की भूमिका निभाता है।
    • सैन्य कार्य विभाग (DMA) का प्रमुख: पदेन सचिव के रूप में, CDS सशस्त्र बलों के मामलों, खरीद (पूंजी अधिग्रहण को छोड़कर), और एकीकरण (प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक आदि में "संयुक्तता" को बढ़ावा देना) की देखरेख करता है।
    • चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का स्थायी अध्यक्ष: वह तीनों सेना प्रमुखों के बीच समन्वय करने के लिए "समकक्षों में प्रथम" के रूप में कार्य करता है।
    • रणनीतिक कार्य: थिएटर कमांड, परमाणु प्राधिकरण (परमाणु कमान प्राधिकरण के सैन्य सलाहकार) और नीति एवं योजना निर्माण। 
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समावेशी, सहभागितापूर्ण और सतत विकास

ऐसा विकास जो समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करे, नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करे और पर्यावरण तथा भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं का ध्यान रखे।

नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार

जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तरों पर समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को प्रदान किया जाने वाला एक राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार।

सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (LSDGs)

संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को स्थानीय स्तर पर, विशेषकर पंचायती राज संस्थानों के माध्यम से प्राप्त करने की प्रक्रिया।

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