यह 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा मंदिर पर किए गए प्रथम आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने का भी प्रतीक है।
सोमनाथ मंदिर के बारे में
- यह भगवान शिव के बारह ‘आदि ज्योतिर्लिंगों’ में से एक है।
- ज्योतिर्लिंग पद दो शब्दों से मिलकर बना है: 'ज्योति' (प्रकाश) और 'लिंग' (भगवान शिव का प्रतीक)। इसका अर्थ है 'प्रकाश का स्तंभ'।
- अवस्थिति: गुजरात में सौराष्ट्र तट पर प्रभास पाटन में।
- साहित्यिक स्रोत: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम् (जो सोमनाथ को बारह ज्योतिर्लिंगों में पहला मानता है), स्कंद पुराण, प्रभास खंड, ऋग्वेद और भागवत पुराण।
- निर्माण से संबंधित पौराणिक कथा: इसका निर्माण चंद्र देव द्वारा किया गया था, जिन्होंने स्वयं को एक श्राप से मुक्त करने के लिए यहाँ भगवान शिव की उपासना की थी। 'सोम' का अर्थ चंद्रमा और 'नाथ' का अर्थ स्वामी होता है।
- संबद्ध धार्मिक संप्रदाय: शैव धर्म, वैष्णव धर्म, शाक्त धर्म।
- संबद्ध विदेशी यात्री: अरब यात्री अलबरूनी द्वारा इस मंदिर का उल्लेख किया गया है।
- स्थापत्य: चालुक्य शैली में, जिसे कैलाश महामेरु प्रसाद शैली भी कहा जाता है।
- विशेषताएँ:
- वेसर शैली: यह नागर शैली और द्रविड़ शैली की मिश्रित शैली है।
- प्रमुख घटक: शिखर, गर्भगृह, सभा मंडप, नृत्य मंडप, पारंपरिक नक्काशी, एक विशाल व स्वच्छ प्रांगण, और बाण स्तंभ जो दक्षिणी ध्रुव की ओर संकेत करता है।
- निर्माण सामग्री: बलुआ पत्थर से निर्मित।
- विशेषताएँ:
- जीर्णोद्धार:
- 12वीं शताब्दी में: कुमारपाल द्वारा,
- 13वीं शताब्दी में: जूनागढ़ के राजा द्वारा,
- 18वीं शताब्दी में: अहिल्याबाई होल्कर द्वारा,
- 1951 में: डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्राण प्रतिष्ठा की गई।
- इसके पुनर्निर्माण का उद्घाटन 1947 में सरदार पटेल ने किया था।
