यह लक्ष्य व्यापक राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) के 'प्रति बूंद अधिक फसल' (Per Drop More Crop - PDMC) घटक के माध्यम से 2025-26 से 2029-30 तक 5 वर्षों की अवधि में प्राप्त किया जाएगा।
राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) के बारे में
- शुरुआत: राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) के ढांचे के तहत वर्ष 2014-15 में शुरू की गई थी।
- वर्ष 2022-23 से इसे 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना' के अंतर्गत शामिल कर लिया गया।

- संबद्ध मंत्रालय: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय।
- उद्देश्य: एकीकृत खेती, जल उपयोग दक्षता, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और संसाधनों के संरक्षण में समन्वय पर ध्यान केंद्रित करते हुए कृषि उत्पादकता को बढ़ाना।
चार प्रमुख घटक:
- ऑन फार्म वाटर मैनेजमेंट (OFWM) / प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC): इसके अंतर्गत जल-उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई (मुख्य रूप से ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणालियां) को बढ़ावा दिया जाता है।
- कवरेज: वर्ष 2015-16 से सूक्ष्म सिंचाई के तहत लगभग 109 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है।
- वर्ष 2015-16 से, 'प्रति बूंद अधिक फसल' (PDMC) घटक को 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' के तहत शामिल करके केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया जा रहा है।
- वर्षा सिंचित क्षेत्र विकास (RAD): यह घटक प्राकृतिक संसाधन के संरक्षण के लिए "वाटरशेड प्लस फ्रेमवर्क" का उपयोग करता है।
- यह एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देता है, जिसमें बहुफसली खेती के साथ बागवानी, पशुपालन, मात्स्यिकी एवं कृषि वानिकी जैसे सहायक कार्यों को बढ़ावा दिया जाता है, ताकि आय के स्रोत बढ़े और फसल से संबद्ध जोखिम कम हो।
- मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (SHM): इसका उद्देश्य स्थान और फसल के अनुसार उचित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना है। इसे मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC) योजना के माध्यम से लागू किया जा रहा है, ताकि उर्वरकों के संतुलित उपयोग, फसल अवशेष प्रबंधन और ऑर्गनिक खेती को बढ़ावा मिले, तथा यूरिया के अत्यधिक उपयोग को कम किया जा सके।
- जलवायु परिवर्तन और संधारणीय कृषि-मॉनिटरिंग, मॉडलिंग एवं नेटवर्किंग (CCSAMMN): यह घटक पायलट परियोजनाओं के माध्यम से किसानों और वैज्ञानिकों के बीच जलवायु संबंधी जानकारी के पारस्परिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, ताकि जलवायु परिवर्तन के अनुसार बेहतर कृषि-अनुकूलन किया जा सके।