विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में एल नीनो के विकसित होने की लगभग 80% संभावना है।
- एल नीनो और ला नीना, एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की दो प्रतिकूल दशाएं हैं।
- दक्षिणी दोलन उष्णकटिबंधीय हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वायुमंडलीय दाब में होने वाला नियमित अंतर-वर्षीय उतार-चढ़ाव है।

एल नीनो (El Niño) के बारे में
- एल नीनो का स्पेनिश भाषा में अर्थ "छोटा लड़का (Little Boy)" होता है।
- इसकी विशेषता भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्री जल सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि है।
- यह परिघटना सामान्यतः प्रत्येक 2 से 7 वर्षों में घटित होती है और लगभग 9 से 12 महीनों तक सक्रिय रहती है।
- प्रायः इस परिघटना का विकास मार्च से जून के बीच शुरू होता है तथा यह नवंबर से फरवरी के दौरान अपने चरम स्थिति पर पहुंचती है।
ला नीना (La Niña)
- स्पेनिश भाषा में ला नीना का अर्थ है "छोटी लड़की" (Little Girl)।
- इसकी विशेषता मध्य और पूर्व-मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री जल सतह के तापमान का ठंडा होना है।
एल नीनो का प्रभाव
- विश्व में प्रभाव:
- दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी भाग, दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) आदि क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा और आर्द्र दशाएं।
- दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भागों, कैरेबियन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में शुष्क दशाएं।
- पेरू के तट पर महासागरीय उत्प्रवाह (अपवेलिंग) के कमजोर होने से ठंडे और पोषक तत्वों से युक्त जल ऊपर नहीं आ पाता है, जिससे पादप-प्लवक (फाइटोप्लांकटन) की उत्पादकता कम हो जाती है और समुद्री खाद्य श्रृंखला बाधित होती है।
- भारत पर प्रभाव:
- एल नीनो के सक्रिय होने से दक्षिण-पश्चिम मानसून में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका बनी रहती है। इससे कृषि और जल प्रबंधन प्रभावित होते हैं।
- इसके विपरीत, ला नीना परिघटना भारतीय मानसून को मजबूत बनाती है, जिससे सामान्य से अधिक वर्षा होती है।
- चक्रवात, जंगल की आग, लू और अन्य चरम मौसम घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे जन एवं धन की हानि होती है।
- एल नीनो के सक्रिय होने से दक्षिण-पश्चिम मानसून में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका बनी रहती है। इससे कृषि और जल प्रबंधन प्रभावित होते हैं।