FAO और WMO ने "अत्यधिक गर्मी और कृषि" शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है | Current Affairs | Vision IAS

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इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक गर्मी वैश्विक और भारतीय कृषि-खाद्य प्रणाली को गंभीर संकट की ओर धकेल रही है।

भारतीय कृषि के संबंध में रिपोर्ट में मुख्य बिंदु

  • खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा: लू (Heatwaves) भारत में चावल और गेहूं उत्पादन के लिए बड़ा खतरा बन रही हैं, खासकर गंगा और सिंधु नदी बेसिन क्षेत्रों में जोखिम सबसे अधिक है।
  • साथ ही, लू बढ़ने के साथ कीट हमलों में वृद्धिबीमारियों के प्रकोपवर्षा की कमी जैसे संकट उत्पन्न होंगे। इससे फलों, सब्जियों, डेयरी और पोल्ट्री की पैदावार में तेजी से गिरावट आ सकती है।
  • कृषि श्रमिकों के लिए खतरे: उच्च उत्सर्जन की स्थितियों में 21वीं सदी के अंत तक, वेट-बल्ब तापमान (wet-bulb temperature) की चरम स्थितियों के कारण कार्य करने की क्षमता में लगभग 40% तक कमी आ सकती है
    • वेट-बल्ब तापमान वह न्यूनतम तापमान है, जिस तक हवा जल के वाष्पीकरण के माध्यम से ठंडी हो सकती है। यह तापमान और आर्द्रता, दोनों का संयुक्त माप है। यह दर्शाता है कि पसीना शरीर को कितना प्रभावी ढंग से ठंडा कर सकता है।

प्रमुख सुझाव और अनुकूलन रणनीतियां

  • खेत-स्तर पर सुधार और नवाचार: 
    • गर्मी-सहिष्णु फसलें और पशु नस्लें विकसित करना, 
    • बुवाई के समय में बदलाव करना,
    • बेहतर सिंचाई और छायांकन (शेडिंग) जैसी प्रबंधन तकनीकें अपनाना। 
  • पूर्व चेतावनी प्रणालियां विकसित करना: मौसमी पूर्वानुमान जैसी प्रणालियाँ किसानों को जोखिम का पहले से अनुमान लगाने और सुरक्षा उपाय अपनाने में मदद करती हैं।
  • वित्तीय सेवाओं तक पहुँच: कैश ट्रांसफर, फसल बीमा और विपदाओं को कवर करने वाली सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं संकटग्रस्त किसानों के लिए अत्यंत जरूरी हैं, ताकि वे अत्यधिक गर्मी से हुए नुकसान की भरपाई कर सकें और गरीबी के दुष्चक्र में फंसने से बच सकें। 
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय: वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उच्च उत्सर्जन वाली आर्थिक प्रणालियों को त्यागने की आवश्यकता है।

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के बारे में

  • स्थापना: 1945 में स्थापित FAO संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है। यह संगठन भुखमरी से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व करता है।
  • मुख्यालय: रोम, इटली।
  • सदस्य: 194 सदस्य (193 देश और यूरोपीय संघ)। भारत इसका एक संस्थापक सदस्य है।
  • प्रकाशित प्रमुख रिपोर्ट्स: द स्टेट ऑफ वर्ल्ड्स फॉरेस्ट्स, द स्टेट ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर, आदि।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के बारे में

  • स्थापना: 1950 में स्थापित WMO संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है।  यह संगठन मौसम विज्ञान (मौसम और जलवायु), सक्रिय हाइड्रोलॉजी और संबंधित भू-भौतिकीय विज्ञान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • WMO का उद्भव 1873 में स्थापित 'अंतरराष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठन' (IMO) से हुआ है।
  • सचिवालय: जिनेवा।
  • सदस्य: भारत सहित 193 (187 सदस्य देश और 6 प्रादेशिक क्षेत्र)।
  • प्रमुख पहलें: 1988 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के साथ मिलकर 'जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC)’ की सह-स्थापना की।
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फसल बीमा

यह एक प्रकार का बीमा है जो किसानों को प्राकृतिक आपदाओं, कीटों के प्रकोप या अन्य अप्रत्याशित घटनाओं के कारण होने वाले फसल नुकसान से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।

बुवाई के समय में बदलाव

यह एक कृषि अनुकूलन रणनीति है जहाँ फसलें उगाने के समय को बदल दिया जाता है ताकि चरम मौसम की घटनाओं, जैसे अत्यधिक गर्मी या कम वर्षा, से बचा जा सके और फसल की उपज को अधिकतम किया जा सके।

जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC)

संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में गठित एक वैज्ञानिक संस्था जो जलवायु परिवर्तन पर नवीनतम शोध का मूल्यांकन करती है। यह नीति-निर्माताओं के लिए विज्ञान-आधारित जानकारी प्रदान करती है।

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