सूचना युद्ध (Information Warfare) तेजी से वायु, थल और जल के अलावा युद्ध के चौथे आयाम के रूप में उभर रहा है। भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' से लेकर वर्तमान में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध तक इसके उदाहरण देखे जा सकते हैं।
सूचना युद्ध के बारे में
- परिभाषा: सूचना युद्ध वह प्रक्रिया है जिसमें किसी प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त हासिल करने के लिए जानकारी का संग्रह, प्रसार, संशोधन, व्यवधान, हस्तक्षेप, भ्रष्ट करना और क्षति पहुँचाना शामिल होता है।
- इसमें डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से जनमत, राजनीतिक विमर्श और सामाजिक मानदंडों में हेरफेर करने और उन्हें प्रभावित करने के लिए विभिन्न रणनीतियों और तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
- उपयोग की जाने वाली रणनीतियां:
- दुष्प्रचार: एडिट की गई तस्वीरें और AI की मदद से वीडियो बनाकर लोगों को गुमराह करना।
- फेक न्यूज़ फैलाना: झूठी खबरों को वास्तविक खबर की तरह प्रस्तुत करना।
- सोशल मीडिया एल्गोरिदम का दुरुपयोग: चुनिंदा कंटेंट्स को अधिक प्रसारित करने और उसकी पहुँच व दृश्यता को नियंत्रित करने के लिए एल्गोरिदम का उपयोग करना।
- विशेषताएं:
- कम लागत में व्यापक प्रभाव,
- युद्ध में जीत-हार की धारणा को प्रभावित करना,
- जनता पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालना।
- पारंपरिक खुफिया तंत्र प्रायः उपर्युक्त खतरों का पता लगाने में संघर्ष करता है।
सूचना युद्ध और भारत
- भारत की कमियाँ: भारत का सूचना युद्ध के प्रति दृष्टिकोण बहुत हद तक प्रतिक्रियात्मक है। यह मुख्यतः रोकथाम, रक्षा (डिफेन्स) और तथ्य-जांच पर केंद्रित रहता है, बजाय इसके कि सक्रिय रूप से रणनीति बनाकर पहले से कदम उठाए जाएँ।
आगे की राह:
- अलग-अलग मंत्रालयों के बीच समन्वय बढ़ाना चाहिए; तेज और प्रभावी साइबर और मनोवैज्ञानिक कार्रवाइयों के लिए विशेष वित्तीय आवंटन की जरुरत है।
- भारत को चाहिए कि वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके अपने पक्ष (नैरेटिव) को सक्रिय रूप से पहले से ही प्रसारित करे। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर दुष्प्रचार को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाए।
भारत में सूचना युद्ध से निपटने के लिए की गई प्रमुख पहलें
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