भारत–चीन सीमा विवाद का समाधान | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • 35वीं डब्ल्यूएमसीसी बैठक में भारत-चीन सीमा की स्थिति की समीक्षा की गई, जिसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बारे में अलग-अलग धारणाओं पर प्रकाश डाला गया।
  • प्रमुख विवादित क्षेत्रों में अक्साई चिन (पश्चिमी क्षेत्र), बारा होती (मध्य क्षेत्र), अरुणाचल प्रदेश (पूर्वी क्षेत्र) और डोकलाम पठार (सिक्किम क्षेत्र) शामिल हैं।
  • भारत 2005 के फ्रेमवर्क को संरक्षित करने की वकालत करता है, प्रगति के लिए एक पूर्व शर्त के रूप में एलएसी स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करता है, और एक व्यापक राजनीतिक समाधान चाहता है।

In Summary

भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC) की 35वीं बैठक में भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की गई।

भारत-चीन सीमा विवाद के बारे में

  • विवाद का स्रोत: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के बारे में दोनों देशों में अलग-अलग धारणाएं हैं। भारत, चीन के साथ दूसरी सबसे लंबी भूमि-सीमा (3488 किमी) साझा करता है। भारत बांग्लादेश (4096.7 किमी) के साथ सबसे लंबी भूमि सीमा साझा करता है। 
    • 1865 में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सिविल सेवक डब्ल्यू.एच. जॉनसन ने 'जॉनसन रेखा' का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव में अक्साई चिन को जम्मू और कश्मीर का भाग बताया गया था, जिसे चीनी राजवंश ने अस्वीकार कर दिया।
    • 1914 में ब्रिटिश भारत, तिब्बत और चीन के बीच शिमला बैठक आयोजित हुई। इसमें भूटान से बर्मा (अब म्यांमार) तक मैकमोहन रेखा का प्रस्ताव रखा गया, जिसका चीन ने विरोध किया।
  • संघर्ष: 1962 का भारत-चीन युद्ध, जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया था।
  • विवादित क्षेत्र (तीन क्षेत्रों में):
    • पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख-अक्साई चिन): वर्तमान में अक्साई चिन पर चीन का नियंत्रण है, जिसे भारत लद्दाख का हिस्सा मानता है।
    • मध्य क्षेत्र: कौरिक लाहौल और स्पीति घाटी (हिमाचल प्रदेश), बाराहोती और नेलांग घाटी (उत्तराखंड)।
    • पूर्वी क्षेत्र (मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश): चीन अरुणाचल प्रदेश, विशेषकर तवांग क्षेत्र को अपना हिस्सा बताते हुए इसे "दक्षिण तिब्बत" (ज़ैंग नान) कहता है।
      • सिक्किम क्षेत्र: नाथू ला दर्रा, नाकु ला क्षेत्र, चो ला, माउंट गिपमोची, बतांग ला, और डोकलाम पठार तथा निकटवर्ती जामफेरी रिज।
        • डोकलाम पठार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत, चीन और भूटान के त्रि-जंक्शन (Tri-Junction) के निकट स्थित है।

विवाद समाधान के लिए भारत को निम्नलिखित सिद्धांतों का पालन करना चाहिए:

  • 2005 के फ्रेमवर्क का संरक्षण: इसके अंतर्गत तीन-चरणीय प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई है-राजनीतिक मानदंडों पर सहमति, समाधान के लिए एक रूपरेखा तैयार करना, सीमा का अंतिम निर्धारण और सीमांकन करना।
  • LAC पर शांति स्थापना: वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की पूर्व-शर्त माना जाना चाहिए। LAC की यथास्थिति में एकपक्षीय बदलावों और बफर जोन को दीर्घकाल तक बनाए रखने का विरोध किया जाना चाहिए।
  • व्यापक राजनीतिक समाधान की तलाश: भारत-चीन के बीच सभी सीमा विवादों के स्थायी समाधान के लिए सार्थक और गंभीर राजनीतिक वार्ताओं को आगे बढ़ाने पर बल दिया जाए।

 

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भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (WMCC)

A mechanism established for regular consultations and coordination between India and China on border-related issues. The 35th meeting of the WMCC reviewed the situation along the India-China border.

2005 के फ्रेमवर्क

A framework agreement between India and China for resolving border disputes, involving a three-step process: agreement on political parameters, formulation of a framework for resolution, and final demarcation and delimitation of the border.

त्रि-जंक्शन (Tri-Junction)

A geographical point where the borders of three countries meet. The Doklam Plateau's proximity to the India-China-Bhutan tri-junction makes it a sensitive area for border disputes.

Title is required. Maximum 500 characters.

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