ध्यातव्य है कि प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस मनाया जाता है।
हाथियों के बारे में
- भौगोलिक और आनुवंशिक आधार पर हाथियों के दो प्रमुख समूह हैं: अफ्रीकी हाथी (लोक्सोडोंटा अफ़्रीकाना) और एशियाई हाथी (एलिफ़स मैक्सिमस)।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- हाथी जटिल सामाजिक समूहों में रहते हैं, जिनका नेतृत्व सामान्यतः एक मादा हाथी (कुलमाता) करती है।
- हाथियों की गर्भावधि लगभग 22 महीने होती है, जो स्तनपायियों में सबसे लंबी है।

- पारिस्थितिकी की दृष्टि से महत्व:
- कीस्टोन/आधारभूत प्रजाति: हाथी पारितंत्र की संरचना और कार्यप्रणाली को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- पारितंत्र के इंजीनियर: घने जंगलों में रास्ते बनाकर अन्य वन्यजीवों के आवागमन को आसान बनाते हैं।
- वन विकास: बीजों के प्रसार और पोषक तत्वों के चक्रण में मदद करते हैं, जिससे वन विविधता बनी रहती है।
- पर्यावास निर्माण: छोटे-छोटे पारितंत्र बनाने और विभिन्न पर्यावासों के बीच संपर्क सुदृढ़ करने में मदद करते हैं।
- प्रमुख खतरे: पर्यावास का नुकसान और विखंडन, मानव–हाथी संघर्ष, अवैध शिकार, बिजली के करंट से मृत्यु, ट्रेनों से टक्कर,आनुवंशिक अलगाव।
एशियाई हाथियों के बारे में
- उप-प्रजातियां: एशियाई हाथियों की प्रमुख उप-प्रजातियाँ हैं: भारतीय हाथी (एलिफस मैक्सिमस इंडिकस), सुमात्राई हाथी, बोर्नियन हाथी और श्रीलंकाई हाथी।
- पर्यावास और वितरण: ये शुष्क से लेकर आर्द्र वन और घास के मैदान जैसे विभिन्न प्रकार के पर्यावासों में पाए जाते हैं। एशियाई हाथी 13 देशों में पाए जाते हैं।
- विश्व के जंगली एशियाई हाथियों में लगभग 60% (22,446) भारत में पाए जाते हैं।
- राज्यों में कर्नाटक में हाथियों की संख्या सबसे अधिक है।
- संरक्षण स्थिति:
- IUCN रेड लिस्ट: एंडेंजर्ड,
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-1,
- CITES: परिशिष्ट-I
भारत में हाथी-संरक्षण की प्रमुख पहलें
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