प्रधानमंत्री ने विश्व हाथी दिवस के अवसर पर भारत द्वारा हाथियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • हाथी, जिन्हें अफ्रीकी और एशियाई समूहों में विभाजित किया गया है, बीज फैलाव और आवास निर्माण के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण प्रमुख प्रजाति हैं।
  • एशियाई हाथी, जिनकी वैश्विक आबादी का 60% हिस्सा भारत में पाया जाता है, को आईयूसीएन रेड लिस्ट और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत लुप्तप्राय प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • भारत के संरक्षण प्रयासों में प्रोजेक्ट एलिफेंट (1992), 33 हाथी अभ्यारण्य, 150 गलियारे, आनुवंशिक डेटाबेस और मानव-हाथी संघर्ष और ट्रेन दुर्घटनाओं को कम करने के उपाय शामिल हैं।

In Summary

ध्यातव्य है कि प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस मनाया जाता है। 

हाथियों के बारे में

  • भौगोलिक और आनुवंशिक आधार पर हाथियों के दो प्रमुख समूह हैं: अफ्रीकी हाथी (लोक्सोडोंटा अफ़्रीकाना) और एशियाई हाथी (एलिफ़स मैक्सिमस)
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • हाथी जटिल सामाजिक समूहों में रहते हैं, जिनका नेतृत्व सामान्यतः एक मादा हाथी (कुलमाता)  करती है।
    • हाथियों की गर्भावधि लगभग 22 महीने होती है, जो स्तनपायियों में सबसे लंबी है।
  • पारिस्थितिकी की दृष्टि से महत्व:
    • कीस्टोन/आधारभूत प्रजाति: हाथी पारितंत्र की संरचना और कार्यप्रणाली को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    • पारितंत्र के इंजीनियर: घने जंगलों में रास्ते बनाकर अन्य वन्यजीवों के आवागमन को आसान बनाते हैं।
    • वन विकास: बीजों के प्रसार और पोषक तत्वों के चक्रण में मदद करते हैं, जिससे वन विविधता बनी रहती है।
    • पर्यावास निर्माण: छोटे-छोटे पारितंत्र बनाने और विभिन्न पर्यावासों के बीच संपर्क सुदृढ़ करने में मदद करते हैं।
    • प्रमुख खतरे: पर्यावास का नुकसान और विखंडन, मानव–हाथी संघर्ष, अवैध शिकार, बिजली के करंट से मृत्यु, ट्रेनों से टक्कर,आनुवंशिक अलगाव। 

एशियाई हाथियों के बारे में

  • उप-प्रजातियां: एशियाई हाथियों की प्रमुख उप-प्रजातियाँ हैं: भारतीय हाथी (एलिफस मैक्सिमस इंडिकस), सुमात्राई हाथी, बोर्नियन हाथी और श्रीलंकाई हाथी। 
  • पर्यावास और वितरण: ये शुष्क से लेकर आर्द्र वन और घास के मैदान जैसे विभिन्न प्रकार के पर्यावासों में पाए जाते हैं। एशियाई हाथी 13 देशों में पाए जाते हैं।
    • विश्व के जंगली एशियाई हाथियों में लगभग 60% (22,446) भारत में पाए जाते हैं।
    • राज्यों में कर्नाटक में हाथियों की संख्या सबसे अधिक है।
  • संरक्षण स्थिति:
    • IUCN रेड लिस्ट: एंडेंजर्ड,
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-1,
    • CITES: परिशिष्ट-I

भारत में हाथी-संरक्षण की प्रमुख पहलें

  • प्रोजेक्ट एलिफेंट (1992): यह केंद्र सरकार का प्रमुख कार्यक्रम है, जिसके उद्देश्य हैं: हाथियों का संरक्षण, हाथियों के पर्यावास की सुरक्षा, मानव–हाथी संघर्ष को कम करना। 
  • माइक/MIKE (हाथियों के अवैध शिकार की निगरानी): यह CITES के नेतृत्व में संचालित कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य हाथियों के अवैध शिकार की निगरानी करके रोकना है।
  • हाथी रिजर्व और कॉरिडोर: भारत में 14 हाथी-बहुल राज्यों में 33 हाथी रिजर्व हैं। देश में लगभग 150 हाथी कॉरिडोर हैं। 
  • प्रबंधन की प्रभावशीलता का मूल्यांकन (Management Effectiveness Evaluation), 2023: इसका उद्देश्य हाथी रिजर्व के प्रबंधन की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना तथा परिणाम-आधारित और अनुकूलनशील प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
  • गज सूचना: यह कैप्टिव हाथियों की पहचान और निगरानी के लिए विकसित आनुवंशिक डेटाबेस और मोबाइल एप्लिकेशन है।
  •  रेलवे से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना: हाथियों और ट्रेनों की टक्कर रोकने के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं, जैसे: अंडरपास, ओवरपास, रैंप निर्माण तथा सेंसर आधारित तकनीक का उपयोग। 
  • नियम और दिशानिर्देश: 
    • बंदी (कैप्टिव) हाथी (स्थानांतरण या परिवहन) नियम, 2024;
    • मानव-वन्यजीव संघर्ष परामर्श और हाथी-विशिष्ट संघर्ष शमन दिशानिर्देश, 2023.
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मानव-वन्यजीव संघर्ष परामर्श और हाथी-विशिष्ट संघर्ष शमन दिशानिर्देश, 2023 (Human-Wildlife Conflict Mitigation Consultation and Elephant-Specific Conflict Mitigation Guidelines, 2023)

ये दिशानिर्देश मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने और कम करने के लिए, विशेष रूप से हाथियों से संबंधित मुद्दों पर, मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

बंदी (कैप्टिव) हाथी (स्थानांतरण या परिवहन) नियम, 2024 (Captive Elephants (Transfer or Transport) Rules, 2024)

यह नियम पालतू हाथियों के स्थानांतरण और परिवहन को विनियमित करने के लिए भारत सरकार द्वारा जारी किए गए हैं, ताकि उनके कल्याण और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

गज सूचना (Gaj Suchna)

कैप्टिव (पालतू) हाथियों की पहचान और निगरानी के लिए भारत सरकार द्वारा विकसित एक आनुवंशिक डेटाबेस और मोबाइल एप्लिकेशन है।

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