विश्व संसाधन संस्थान (WRI) ने ‘भारत में समान, उत्पादक, कम-कार्बन उत्सर्जन वाली और लचीली शहर व्यवस्था’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • ईएसी-पीएम के लिए डब्ल्यूआरआई इंडिया की रिपोर्ट में एक राष्ट्रीय शहरीकरण नीति की सिफारिश की गई है, जिसमें छिपे हुए शहरीकरण और शहरी बाहरी फैलाव को संबोधित किया गया है।
  • प्रमुख मुद्दों में खंडित योजना, बुनियादी ढांचे की कमियां, आवास की कमी, जलवायु संबंधी संवेदनशीलता, शासन की बाधाएं, कमजोर नगरपालिका वित्त और खराब शहरी डेटा शामिल हैं।
  • सिफारिशों में शहरी वर्गीकरण का मानकीकरण, नगर-क्षेत्र नियोजन को अपनाना, जलवायु अनुकूलन को एकीकृत करना, शहरीकरण परिषदों की स्थापना करना, नगरपालिका वित्त को मजबूत करना और एक शहरी डेटा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना शामिल है।

In Summary

विश्व संसाधन संस्थान (WRI)-भारत ने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के अनुरोध पर यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में भारत के लिए राष्ट्रीय शहरीकरण नीति (NUP) बनाने के लिए तथ्य-आधारित सुझाव दिए गए हैं।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

शहरीकरण की समस्या 

सुझाव/समाधान

छिपा हुआ शहरीकरण: 

भारत में 7,428 छोटे शहर हैं। इनमें से कई जनगणना नगर (सेंसस टाउन) अभी भी ग्रामीण प्रशासन के अंतर्गत हैं।

शहरों के वर्गीकरण और नगर निकाय के गठन के मानदंडों को एक समान किया जाए।

शहरों का बाहरी क्षेत्रों में विस्तार/परिनगरीय (पेरी-अर्बन विस्तार): 

शहरों का विकास नगर निगम की सीमाओं से बाहर हो रहा है। उदाहरण के लिए: बेंगलुरु में इलेक्ट्रॉनिक सिटी।

बाहरी शहरी क्षेत्रों के लिए शहर-क्षेत्र नियोजन (City-Region Planning) अपनाई जाए।

अलग-अलग योजना बनाना: 

आवास, परिवहन और उद्योग की योजना अलग-अलग बनाई जाती है।

प्रादेशिक योजनाओं को भूमि उपयोग, आवास, परिवहन और अवसंरचना के लिए साझा आधार बनाया जाए।

अवसंरचना की कमी: 

लगभग 17% अपशिष्ट एकत्र नहीं किया जाता, जबकि केवल 26% अपशिष्ट का उपचार होता है।

विशेषकर छोटे शहरों में एकीकृत अवसंरचना  विकास को प्राथमिकता दी जाए।

आवास की कमी: 

शहरी आवास की कमी 2012 में 1.878 करोड़ इकाइयों से बढ़कर 2018 में लगभग 2.9 करोड़ इकाइयाँ हो गई।

वहनीय, आवश्यक सुविधाओं से युक्त और जलवायु-अनुकूल आवास उपलब्ध कराया जाए।

 

जलवायु संबंधी खतरा:

3°C तापमान वृद्धि की स्थिति में भारत के 103 शहरों में वर्ष में 150 या उससे अधिक दिन तापमान 35°C से ऊपर रह सकता है।

जलवायु-अनुकूल और बहु-आपदा प्रबंधन योजना को शहरी नियोजन में शामिल किया जाए।

प्रशासनिक विभागों में समन्वय की कमी: 

कई मंत्रालय और एजेंसियां अलग-अलग कार्य करती हैं।

मंत्रालयों के बीच समन्वय के लिए राष्ट्रीय शहरीकरण परिषद और राज्य शहरीकरण परिषद गठित की जाएँ।

नगर निकायों की कमजोर वित्तीय स्थिति: 

74वें संविधान संशोधन के बाद भी पूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों का हस्तांतरण नहीं हुआ है। संपत्ति कर से केवल GDP  का लगभग 0.15% प्राप्त होता है।

नगर निकायों को 3Fs — कार्य , धनराशि और कर्मचारी के माध्यम से सुदृढ़ किया जाए।

 

शहर पर डेटा की कमी: शहरों के आसपास के क्षेत्रों में हो रहे विकास को सही तरीके से दर्ज नहीं किया जाता।

राष्ट्रीय शहरी डेटा प्रणाली और ज्ञान-साझाकरण नेटवर्क विकसित किया जाए।

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राष्ट्रीय शहरी डेटा प्रणाली

यह शहरी क्षेत्रों से संबंधित डेटा के संग्रह, प्रबंधन और विश्लेषण के लिए एक व्यवस्थित ढाँचा है। रिपोर्ट में शहरों के विकास को बेहतर ढंग से दर्ज करने के लिए ऐसी प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया गया है।

3Fs — कार्य, धनराशि और कर्मचारी

यह नगर निकायों को सुदृढ़ करने के लिए तीन प्रमुख स्तंभों को संदर्भित करता है: कार्य (Functions), धनराशि (Funds) और कर्मचारी (Functionaries)। रिपोर्ट में इन तीनों के माध्यम से नगर निकायों को सशक्त बनाने का सुझाव दिया गया है।

GDP

Gross Domestic Product. The total monetary or market value of all the finished goods and services produced within a country's borders in a specific time period.

Title is required. Maximum 500 characters.

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