SC-NBWL ने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र दिशा-निर्देशों की समीक्षा की मांग की | Current Affairs | Vision IAS
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राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SC-NBWL) ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी 'पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESZ), 2011 की घोषणा के लिए दिशा-निर्देशों' को संशोधित करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य इसमें अधिक लचीले व स्थल विशिष्ट दृष्टिकोण को अपनाना है।

  • SC-NBWL ने कहा कि सभी संरक्षित क्षेत्रों के चारों ओर एक समान 10 किलोमीटर का ESZ अलग-अलग स्थानीय परिस्थितियों के कारण व्यावहारिक नहीं है।
  • हिमाचल प्रदेश में लगभग 65% भूमि पहले से ही वन या संरक्षित क्षेत्रों के अंतर्गत है।  यहां सख्त ESZ नियमों से स्थानीय विकास में रुकावट उत्पन्न हो सकती है और ESZ  भी उतना लाभदायक नहीं हो सकेगा।

पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) के बारे में

  • उत्पत्ति: यह वन्यजीव संरक्षण रणनीति, 2002 में प्रस्तुत अवधारणा है।
  • परिभाषा: राष्ट्रीय पर्यावरण नीति (2006) ने ESA को "ऐसे क्षेत्रों/ जोन्स के रूप में परिभाषित किया है, जिनमें पहचाने गए ऐसे पर्यावरणीय संसाधन मौजूद हैं, जिनका मूल्य अतुलनीय है। साथ ही इनके भू-क्षेत्र, वन्य जीवन, जैव-विविधता तथा ऐतिहासिक और प्राकृतिक मूल्य के संरक्षण के लिए इन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।"
  • उद्देश्य:
    • विशिष्ट पारिस्थितिकी-तंत्र, जैसे संरक्षित क्षेत्र (राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्य) या अन्य प्राकृतिक स्थलों के लिए एक "शॉक एब्जॉर्बर" बनाना।
    • उच्च संरक्षण वाले क्षेत्रों से कम संरक्षण वाले क्षेत्रों के मध्य एक ट्रांजिशन क्षेत्र के रूप में कार्य करना।
  • सीमांकन: पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत संरक्षण क्षेत्र की सीमाओं के 10 किमी दायरे के भीतर आने वाली भूमि को ESZ के रूप में अधिसूचित किया जाना चाहिए।
    • वर्ष 2023 में, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को जनहित में ESZ की न्यूनतम चौड़ाई में परिवर्तन करने की अनुमति दी थी। 
      • कोर्ट ने राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य के भीतर तथा उनकी सीमाओं से एक किलोमीटर के क्षेत्र में खनन पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। 

योजना और विनियमन:

  • वर्ष 2011 के दिशा-निर्देशों में ESZ के अंतर्गत प्रतिबंधित, विनियमित और स्वीकृत गतिविधियों की सूची दी गई है (इन्फोग्राफिक देखें)।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय राज्य सरकार की सिफारिशों पर ESZ को अधिसूचित करता है।
  • राज्य सरकारों को प्रत्येक ESZ के लिए एक क्षेत्रीय मास्टर प्लान तैयार करना होगा।
    • क्षेत्रीय मास्टर प्लान में पर्यटन मास्टर प्लान और विरासत स्थलों की सूची को भी शामिल करना अनिवार्य है।
    • इसमें किसी भी व्यक्ति का विस्थापन शामिल नहीं है।
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