वर्ष 2023 में वैश्विक स्तर पर हुई 2.4 लाख मातृ मृत्युओं में से लगभग 24,700 मामले भारत में दर्ज किए गए।
मातृ मृत्यु (Maternal Mortality) के बारे में
- आशय: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मातृ मृत्यु वह है जिसमें किसी महिला की मृत्यु गर्भावस्था के दौरान या गर्भ-समाप्ति के 42 दिनों के भीतर होती है, चाहे गर्भ की अवधि या स्थान कुछ भी हो, बशर्ते मृत्यु का कारण गर्भावस्था या उससे संबंधित देखभाल/प्रबंधन हो; इसमें दुर्घटना या आकस्मिक कारणों से हुई मृत्यु शामिल नहीं होती।
- मातृ-मृत्यु अनुपात (MMR): यह मातृ-मृत्यु मापने का प्रमुख संकेतक है। इसे एक निश्चित अवधि के दौरान प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर होने वाली मातृ मृत्यु की संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है।
- सतत विकास लक्ष्य (SDG) 3.1 का लक्ष्य वैश्विक मातृ-मृत्यु अनुपात को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम करना है।
भारत में उच्च मातृ मृत्यु के प्रमुख कारण
- चिकित्सीय कारण: प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, उसके बाद संक्रमण और गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप विकार।
- सांस्कृतिक और सामाजिक कारक: पारंपरिक मान्यताएं और सामाजिक मानदंड, पारिवारिक दबाव, निर्धनता और शिक्षा की कमी।
- स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में कमी: गर्भवती महिला को सही समय पर सही अस्पताल में नहीं भेजा जाता (गलत या देर से रेफरल), या आपातकालीन स्थिति के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं होती। इससे इलाज में देरी होती है, जिससे खतरा बढ़ जाता है।
भारत में मातृ मृत्यु दर कम करने के उपाय
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (NHP) 2017 के लक्ष्य की प्राप्ति: भारत ने वर्ष 2020 तक MMR को प्रति 1,00,000 जीवित जन्म पर 100 से कम करने का लक्ष्य हासिल किया।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और मातृ स्वास्थ्य: इसके अंतर्गत 'प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य, और पोषण' (RMNCAH+N) रणनीति शामिल है। इसके अंतर्गत संचालित प्रमुख कार्यक्रम हैं:
- जननी सुरक्षा योजना (JSY): इसके तहत गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में प्रसव कराने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY): इसका उद्देश्य मातृत्व हितलाभ (नकद सहायता) प्रदान करना है।
- राज्यों के श्रेष्ठ उदाहरण:
- तमिलनाडु की 'आपातकालीन प्रसूति देखभाल' सुविधा।
- मध्य प्रदेश का समुदाय संचालित 'दस्तक अभियान'।