लोकसभा ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (Insolvency & Bankruptcy Code) संशोधन विधेयक, 2025 पारित किया | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

In Summary

  • यह विधेयक दिवालियापन और दिवालियापन संहिता 2016 में संशोधन करता है ताकि देरी को कम किया जा सके और दिवालियापन के समाधान में सुधार किया जा सके।
  • यह समूह दिवालियापन ढांचा, सीमा पार दिवालियापन ढांचा प्रस्तुत करता है और 'शुरुआत से नई शुरुआत के सिद्धांत' को सुदृढ़ करता है।
  • एनसीएलटी में दाखिले के लिए सख्त समय सीमा (14 दिन) और एनसीएलएटी में अपील के लिए सख्त समय सीमा (3 महीने) निर्धारित की गई है।

In Summary

इस विधेयक पर विचार करने के लिए प्रारंभ में इसे एक चयन समिति को भेजा गया था। समिति के विचारोपरांत इसे संसद में पेश किया गया था। इस विधेयक के द्वारा दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 में संशोधन किया गया है।

  • इस संशोधन के निम्नलिखित उद्देश्य हैं; 
    • दिवाला समाधान प्रक्रिया में देरी को कम करना, 
    • सभी हितधारकों के लिए अधिकतम संपत्ति वापसी (रिकवरी) सुनिश्चित करना, और
    • दिवाला समाधान के लिए वैश्विक सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों को लागू करना।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

  • नई ‘ऋणदाता-प्रेरित दिवाला समाधान प्रक्रिया (Creditor-Initiated Insolvency Resolution Process: CIIRP): इसमें पहले की कम उपयोग की जाने वाली “फास्ट-ट्रैक” प्रक्रिया की जगह ‘आउट-ऑफ-कोर्ट’ प्रक्रिया प्रारंभ मॉडल का प्रावधान किया गया है।
  • समूह दिवाला समाधान फ्रेमवर्क: इसमें “स्वैच्छिक समूह दिवाला समाधान फ्रेमवर्क” का प्रावधान है।  इसके तहत जब एक ही कॉर्पोरेट समूह की कई कंपनियां आर्थिक परेशानी (दिवाला) में हों, तो उन्हें अलग-अलग नहीं बल्कि साथ में दिवाला-समाधान की सुविधा दी जाएगी।
  • सीमा-पार दिवाला-समाधान फ्रेमवर्क: इसमें सीमा-पार (विदेशों में) दिवाला-समाधान के लिए एक बुनियादी व्यवस्था का प्रावधान है। यदि कोई कंपनी भारत में दिवालिया होती है लेकिन उसकी संपत्ति विदेशों में भी है, तो अब उन संपत्तियों तक पहुँचना और उनका उपयोग करना आसान होगा। यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। 
  • क्लीन स्लेट सिद्धांत (Clean Slate Principle) को मजबूती: जब किसी कंपनी के लिए समाधान योजना स्वीकृत हो जाती है, तो उस कंपनी के खिलाफ पुराने सभी दावे खत्म माने जाएंगे — जब तक कि योजना में अलग से कुछ न लिखा हो। 
  • राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) के लिए सख्त समय-सीमा: 
    • NCLT को डिफॉल्ट के पुख्ता प्रमाण मिलने पर 14 दिनों के भीतर ‘कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP)’ से जुड़े मामले स्वीकार करने होंगे। 
    • राष्ट्रीय कम्पनी विधि अपील अधिकरण (NCLAT) को 3 महीने में अपीलों का निपटारा करना होगा।  
  • अन्य प्रावधान
    • परिसमापन (Liquidation) की प्रक्रिया को 180 दिनों में पूरा करने की समय-सीमा तय की गई है, जिसे आगे अधिकतम 90 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है।
    • दिवाला समाधान पेशेवरों की स्वतः नियुक्ति नहीं होगी।
    • ऋणदाताओं की समिति (Committee of Creditors: CoC) को और अधिक सशक्त और जवाबदेह बनाया गया है। 
Watch Video News Today

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED VIDEOS

1
न्यूज़ टुडे | डेली करेंट अफेयर्स | 14 दिसंबर, 2024

न्यूज़ टुडे | डेली करेंट अफेयर्स | 14 दिसंबर, 2024

YouTube HD

RELATED TERMS

3

ऋणदाताओं की समिति (Committee of Creditors: CoC)

यह उन ऋणदाताओं का एक समूह होता है जिनका एक कंपनी पर दावा होता है। CoC कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें समाधान योजनाओं को मंजूरी देना भी शामिल है।

परिसमापन (Liquidation)

यह वह प्रक्रिया है जिसमें किसी कंपनी या संस्था को बंद कर दिया जाता है, उसकी संपत्तियों को बेचा जाता है और ऋणों का भुगतान किया जाता है। शेष बची हुई राशि शेयरधारकों या सदस्यों में बाँट दी जाती है।

राष्ट्रीय कम्पनी विधि अपील अधिकरण (National Company Law Appellate Tribunal: NCLAT)

यह एक अपील न्यायाधिकरण है जो राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) के आदेशों के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई करता है।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet