लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में एक को छोड़कर, माओवादियों के पूरे नेतृत्व का सफाया कर दिया गया है।
- केंद्र सरकार ने संवाद, सुरक्षा और समन्वय के समेकित दृष्टिकोण के माध्यम से वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित सभी जिलों को मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है।
बहुआयामी दृष्टिकोण ने भारत को वामपंथी उग्रवाद से निपटने में कैसे मदद की?

- समाधान (SAMADHAN) रणनीति: यह सुरक्षा अभियानों की पूरी रणनीति को समाहित करती है। इसमें अल्पकालिक से लेकर दीर्घकालिक नीतियाँ विभिन्न स्तरों पर तैयार की जाती हैं।
- विकास आधारित उपाय: जैसे—वामपंथी उग्रवाद से सर्वाधिक प्रभावित जिलों के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की व्यवस्था की गयी है। इससे सार्वजनिक अवसंरचना और मूलभूत सेवाओं की उपलब्धता में कमियों को दूर करने में मदद मिली है।
- इसमें धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, आकांक्षी जिला कार्यक्रम, आदि भी शामिल हैं।
- नक्सलियों के समर्पण और पुनर्वास की नीति: पुनर्वासित नक्सलियों को वित्तीय सहायता और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए मासिक मानदेय राशि दी जाती है।
- मजबूत सुरक्षा अवसंरचना एवं प्रौद्योगिकियों का उपयोग: अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इनमें नक्सलियों की मौजूदगी की ट्रैकिंग, ड्रोन द्वारा निगरानी, सैटेलाइट इमेजिंग, AI-आधारित डेटा विश्लेषण और मोबाइल डेटा विश्लेषण का व्यापक उपयोग शामिल हैं।
- नक्सलियों के वित्तीय स्रोतों पर कार्रवाई: धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत नक्सलियों के वित्तपोषण के स्रोतों पर कार्रवाई की जा रही है और संपत्तियों को जब्त किया जा रहा है।
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