संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी (ICT) संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 27वीं रिपोर्ट (2025-26) में निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया है:
AI क्षेत्रक में विश्व में भारत की स्थिति:
- स्थान: भारत ‘टॉरटॉइस ग्लोबल AI इंडेक्स’ में 10वें स्थान और ‘स्टैनफोर्ड AI इंडेक्स’ में चौथे स्थान पर है।
- कौशल विकास का प्रसार: AI से संबंधित कौशल प्रसार में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है।
- कार्यबल का विकास: AI के कारण 2027 तक प्रौद्योगिकी से जुड़ी लगभग 47 लाख नई नौकरियाँ उत्पन्न होने की संभावना है, और 2030 तक लगभग 3.8 करोड़ मौजूदा नौकरियों का स्वरूप बदल जाएगा।
- डिजिटल अवसंरचना: भारत में विश्व के सबसे अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता (90 करोड़ से अधिक) हैं। साथ ही AI विषय पर वैज्ञानिक प्रकाशनों तथा ICT सेवा निर्यात में प्रथम स्थान है।
भारत में AI अपनाने की चुनौतियां:
- AI के विस्तार में बाधाएं: भारत को निम्नलिखित तीन प्रमुख बाधाओं का सामना कर रहा है:
- हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग अवसंरचना की कमी,
- स्पष्ट और गुणवत्तापूर्ण डेटा सेट तक सीमित पहुंच,
- जमीनी स्तर पर तकनीकी कौशल की कमी।
- क्षेत्रक विशेष की चुनौतियां: उदाहरण के लिए—कृषि क्षेत्रक में AI का उपयोग अभी बहुत कम है, और इसके कई कारण हैं:
- शुरुआत में उच्च लागत लगती है,
- गांवों में तेज इंटरनेट की कमी है,
- स्थानीय भाषाओं/बोलियों में टूल्स की कमी है;
- AI कैसे कार्य करता है यह स्पष्ट नहीं होने (“ब्लैक बॉक्स” समस्या) के कारण किसानों को इसकी सलाह पर पूरा भरोसा नहीं होता।
- साइबर सुरक्षा: डीपफेक, बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार वाले कंटेंट (CSEAM) का निर्माण, वित्तीय अपराधों के लिए "म्यूल अकाउंट" का उपयोग आदि में AI का दुरुपयोग किया जा रहा है।
- रक्षा क्षेत्रक में जोखिम: प्राणघातक स्वचालित हथियार प्रणाली (LAWS) और AI आधारित निर्णय प्रणाली से अनपेक्षित घातक परिणामों का जोखिम बढ़ता है।
समिति की प्रमुख सिफारिशें
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