प्रधानमंत्री ने महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी 200वीं जयंती समारोहों का शुभारंभ किया।
ज्योतिराव फुले (1827–1890) के बारे में
- जन्म: महाराष्ट्र में सामाजिक रूप से पिछड़े 'माली' समुदाय में हुआ।
- उन्हें विठ्ठलराव कृष्णजी वंडेकर द्वारा 'महात्मा' की उपाधि दी गई थी।
- भारतीय सामाजिक क्रांति के जनक: महात्मा फुले ने पिछड़े वर्गों और महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य किया और वे जाति व्यवस्था का उन्मूलन करना चाहते थे।
- प्रमुख कृतियां: सत्यशोधक (साप्ताहिक समाचार पत्र), गुलामगिरी, ब्राह्मणांचे कसब, सार्वजनिक सत्यधर्म पुस्तक, शेतकऱ्याचा असूड, आदि।
वंचित वर्गों के उत्थान में फुले का योगदान
- शूद्र और अति-शूद्र (अस्पृश्य): वे इन दोनों समुदायों को एक शोषित समूह के रूप में एकजुट करने वाले पहले व्यक्ति थे।
- सत्यशोधक समाज (1873): वर्ण आधारित सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ निम्न समझे जाने वाली जातियों को संगठित करने के लिए इसकी स्थापना की।
- मुक्ति के रूप में ज्ञान (तृतीय रत्न): शिक्षा से वंचित महार और मांग समुदायों के लिए स्कूल खोले।
- "गुलामगिरी" (1873): इस पुस्तक में उन्होंने वैश्विक चेतना जगाने के लिए भारत में जातिगत उत्पीड़न की तुलना अमेरिकी गुलामी से की।
- महिलाएं: उन्होंने 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्कूल शुरू किया।
- उन्होंने 'बालहत्या प्रतिबंधक गृह' (1863) की स्थापना की और विधवा विवाह का समर्थन किया।
- किसान: उनके भाषणों के संग्रह " शेतकऱ्याचा असूड" में साहूकारों और नौकरशाही द्वारा किसानों के शोषण का विश्लेषण किया गया है।
- निर्धन वर्ग: हंटर कमीशन (1882) के समक्ष निशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का आग्रह किया; उन्होंने शिक्षा के अधोमुखी निस्यंदन (डाउनवर्ड फिल्ट्रेशन) सिद्धांत का विरोध किया।
- उन्होंने ब्राह्मण पुजारियों के बिना कम खर्चीले 'सत्यशोधक विवाह' का भी प्रस्ताव रखा।