RBI ने डिजिटल भुगतान में धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए नए सुरक्षा उपायों का प्रस्ताव दिया | Current Affairs | Vision IAS

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  • डिजिटल धोखाधड़ी के मामले 2021 में 2.6 लाख से बढ़कर 2025 में 28 लाख हो गए, जिनका कुल मूल्य ₹22,931 करोड़ है, और इससे वरिष्ठ नागरिकों जैसे कमजोर वर्ग प्रभावित हुए हैं।
  • आरबीआई ने ₹10,000 से अधिक के हस्तांतरण के लिए 1 घंटे की देरी, प्रामाणिक लेनदेन के लिए श्वेतसूचीकरण और कमजोर उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण जैसे उपायों का प्रस्ताव दिया।
  • इन पहलों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, कार्ड कंट्रोल, म्यूलहंटर.एआई का उपयोग करके फर्जी खातों का पता लगाना और एआई/एमएल का उपयोग करके एक डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म प्रोटोटाइप शामिल हैं।

In Summary

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने "धोखाधड़ी को रोकने के लिए डिजिटल भुगतान में सुरक्षा उपायों की खोज" विषय पर एक चर्चा पत्र जारी किया है।

डिजिटल धोखाधड़ी की वर्तमान स्थिति

  • बढ़ती धोखाधड़ी: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, साइबर धोखाधड़ी के मामले 2021 के 2.6 लाख से बढ़कर 2025 में लगभग 28 लाख हो गए। इनमें कुल 22,931 करोड़ रुपये की राशि शामिल थीं।
  • धोखाधड़ी के तरीके: फर्जी कॉल सेंटर का इस्तेमाल, डीपफेक के जरिए किसी की नकल करके ठगी, लोगों को बहलाकर (सोशल इंजीनियरिंग) धोखा देना और म्यूल अकाउंट (दूसरों के खातों का गलत इस्तेमाल) का नेटवर्क।
    • ठग लोग चालाकी से लोगों को विश्वास में लेकर (सोशल इंजीनियरिंग) उन्हें खुद ही पैसे ट्रांसफर करने के लिए मना लेते हैं। इसी वजह से इसे ‘ऑथराइज्ड पुश-पेमेंट (APP) फ्रॉड’ कहा जाता है, क्योंकि इसमें पीड़ित खुद ही लेन-देन को मंजूरी देता है।
  • पीड़ित वर्ग: डिजिटल धोखाधड़ी के सर्वाधिक शिकार कमजोर वर्ग होते हैं, खासकर बुजुर्ग लोग।

RBI द्वारा सुझाए गए उपाय

  • समय अंतराल (Time lag): RBI ने बढ़ती डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए ₹10,000 से अधिक के डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे की देरी लगाने का प्रस्ताव दिया है। यानी लेनदेन करने वाले को 1 घंटे का समय मिलेगा, जिसमें वह चाहे तो उस ट्रांजैक्शन को रद्द कर सकता है।  
    • व्हाइटलिस्टिंग व्यवस्था के तहत भरोसेमंद (सत्यापित) लेन-देन के लिए यह 1 घंटे का अंतराल लागू नहीं होगा, यानी ऐसे ट्रांजैक्शन तुरंत पूरे हो जाएंगे। 
  • कम जागरूक उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त सुरक्षा: बुजुर्ग (सीनियर सिटीजन) और दिव्यांगजनों द्वारा बड़ी राशि के भुगतान के लिए एक भरोसेमंद व्यक्ति की मंजूरी जरूरी होगी। 
  • उपयोगकर्ता के नियंत्रण वाले फीचर्स: भुगतान मोड को चालू/बंद करने और लेनदेन की सीमा निर्धारित करने का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा।
  • म्यूल खातों पर लगाम: खातों में बड़ी रकम आने पर अतिरिक्त जांच के बाद ही उसे अनुमति दी जाएगी।

डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए RBI की पहलें

  • भुगतान का सत्यापन: डिजिटल भुगतान लेनदेन में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य है।
  • कार्ड पर कार्डधारक का नियंत्रण: डिवाइस टोकनाइजेशन, कार्ड-ऑन-फाइल टोकनाइजेशन, और ग्राहक द्वारा नियंत्रित कार्ड सुविधाएँ शुरू की गई हैं।।
  • म्यूल खातों को हटाना: रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) द्वारा विकसित Mulehunter.AI म्यूल बैंक खातों की त्वरित और प्रभावी तरीके से पहचान करने में सक्षम बनाता है।
  • डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DPIP): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)/मशीन लर्निंग (ML) जैसी नई तकनीकों का उपयोग कर भुगतान धोखाधड़ी के खतरों को कम करने हेतु DPIP प्रोटोटाइप का विकास किया गया है। 
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डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DPIP)

एक प्रोटोटाइप प्लेटफॉर्म जो भुगतान धोखाधड़ी के जोखिमों को कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी तकनीकों का उपयोग करता है।

Mulehunter.AI

An artificial intelligence-powered tool developed by the Reserve Bank Innovation Hub (RBIH) designed for the rapid and efficient identification of fraudulent bank accounts used as 'mule accounts' for money laundering.

रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH)

रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक सहायक कंपनी है जिसका उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना है। यह वित्तीय लेनदेन के लिए संदिग्ध स्कोरिंग मॉडल विकसित करने और धोखाधड़ी का पता लगाने जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है।

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