सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) की शुरुआत की जा रही है। इसका उद्देश्य भारत के खाद्य सुरक्षा ढांचे में पारदर्शिता, दक्षता एवं लाभार्थी सशक्तीकरण सुनिश्चित करना है।
प्रायोगिक परियोजना के बारे में
- प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपया (e₹): इसे लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में प्रत्यक्ष रूप से जमा किया जाएगा। इसका उपयोग केवल उचित मूल्य की दुकानों (Fair Price Shops) पर QR कोड या कूपन कोड के माध्यम से निर्धारित खाद्यान्न खरीदने के लिए किया जा सकेगा।
- सुरक्षित लेन-देन: यह प्रणाली वास्तविक समय (real-time), सुरक्षित और सुलभ लेन-देन को सक्षम बनाएगी।
- लाभ:
- यह बार-बार होने वाले बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता को समाप्त करेगी;
- भ्रष्टाचार/ लीकेज को कम करेगी और
- अंतिम छोर तक आपूर्ति (last-mile delivery) को मजबूत करेगी।
CBDC क्या है?
- यह केंद्रीय बैंक (भारतीय रिज़र्व बैंक - RBI) द्वारा जारी और विनियमित फिएट मुद्रा का एक डिजिटल रूप है।
- यह एक वैध मुद्रा है और RBI अधिनियम, 1934 की धारा 26 के अनुसार केंद्रीय बैंक (अर्थात RBI) की देनदारी (liability) है। इसका RBI की बैलेंस शीट पर उल्लेख होगा।
- यह संप्रभु मुद्रा (भारत में ₹) में अंकित है और भौतिक मुद्रा के समान ही मूल्यवर्ग में उपलब्ध है।
- इसे भारत में दिसंबर 2022 में प्रायोगिक तौर पर लॉन्च किया गया था। इसे निम्नलिखित दो रूपों में लॉन्च किया गया है-
- डिजिटल होलसेल CBDC (e₹-W) और डिजिटल रिटेल CBDC (e₹-R)]।
CBDC का महत्व
- वित्तीय समावेशन: यह उन लोगों के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधा सुनिश्चित करती है, जिनके पास बैंक खाते नहीं हैं, या जो बैंकिंग सुविधाओं का बहुत कम लाभ उठाते हैं। यह RBI द्वारा जारी वॉलेट के माध्यम से सीधे अंतरण और कल्याणकारी लाभ वितरण को सक्षम बनाती है।
- पारदर्शिता और लीकेज रहित लेन-देन: डिजिटल बहीखाता वास्तविक समय में ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है। इससे भ्रष्टाचार, कर चोरी और सब्सिडी की चोरी को कम करने में मदद मिलती है।
- प्रोग्रामेबल भुगतान: यह सशर्त अंतरण की अनुमति देती है (जैसे- ऐसी सब्सिडी जिसका उपयोग केवल विशिष्ट उद्देश्यों के लिए किया जा सके)। यह प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और मौद्रिक नीति के क्रियान्वयन में सुधार करती है।
निष्कर्ष
तकनीकी दक्षता को सामाजिक समानता के साथ जोड़कर, प्रोग्रामेबल डिजिटल मुद्रा में वित्तीय समावेशन को गहरा करने, प्रणालीगत खामियों को दूर करने और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं नागरिक-केंद्रित शासन तंत्र की नींव रखने की क्षमता है।