यह अत्याधुनिक पहल नेटवर्क्स (जैसे- रक्षा, दूरसंचार, बैंकिंग, उपकरण और एप्लिकेशन) में क्रिप्टोग्राफिक दोषों का शीघ्र पता लगाने में सक्षम बनाएगी। इससे संगठनों को समय रहते पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी।
ऑटोमेटेड टूल के बारे में
- यह क्वांटम-सुभेद्य एल्गोरिदम, उनके उद्देश्य और उपकरण के भीतर उनकी सटीक अवस्थिति का पता लगाकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा, ताकि क्वांटम-सेफ सुरक्षा की ओर ज्ञात स्थानांतरण योजना बनाने में सहायता मिल सके।
- इसके तीन मुख्य मॉड्यूल्स होंगे:
- वेब एप्लिकेशन: नेटवर्क ट्रैफिक, सुभेद्यता मूल्यांकन और क्वांटम जोखिमों के लिए;
- सुरक्षा स्कैनर एजेंट; तथा
- कंट्रोल सॉफ्टवेयर।
पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) क्या है?
- यह क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम का एक सेट है, जिसे क्वांटम कम्प्यूटर्स के हमलों का मुकाबला करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- क्वांटम कम्प्यूटर्स, पारंपरिक कम्प्यूटर्स की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली होंगे।
- इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गोपनीय डेटा तब भी सुरक्षित रहे, जब शक्तिशाली क्वांटम कम्प्यूटर्स वर्तमान एन्क्रिप्शन विधियों को अप्रभावी बना दें।
- अमेरिका के राष्ट्रीय मानक और प्रौद्योगिकी संस्थान (NIST) ने पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफिक मानकों के अपने प्रारंभिक सेट को अंतिम रूप दे दिया है।
क्वांटम क्रिप्टोग्राफी क्या है?
- यह उन विधियों का समूह है, जो सूचनाओं को सुरक्षित रूप से एन्क्रिप्ट, प्रसारित और डिकोड करने के लिए क्वांटम मैकेनिक्स (क्वांटम भौतिकी) के नियमों का उपयोग करता है।
- यह डेटा को हमलों से बचाने के लिए प्रकाश के कणों (फोटॉन) को रिकॉर्ड करने वाले सेंसर्स जैसे क्वांटम उपकरणों का उपयोग करता है।
- इसके निम्नलिखित प्रकार हैं:
- क्वांटम कुंजी वितरण (QKD): यह एन्क्रिप्शन कुंजियों (Keys) को साझा करने की एक सुरक्षित विधि है। इस तकनीक में सूचना या मैसेज केवल वही लोग पढ़ सकते हैं, जिनके साथ ये कुंजियां साझा की जाती है।
- क्वांटम कॉइन-फ्लिपिंग: यह एक प्रकार का 'क्रिप्टोग्राफिक प्रिमिटिव' (एल्गोरिदम के लिए एक निर्माण आधार) है, जो दो ऐसे पक्षों को कुछ मापदंडों पर सहमत होने की अनुमति देता है, जो एक-दूसरे पर विश्वास नहीं करते हैं।