आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने देश की पहली अंडरवॉटर ट्विन ट्यूब सड़क-सह-रेल सुरंग परियोजना को मंजूरी दी है।
- इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में अवसंरचना संपर्क बढ़ाना है।
परियोजना के बारे में
- यह परियोजना असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे स्थित होगी और EPC मोड पर विकसित की जाएगी।
- इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC) मॉडल में सरकार ठेकेदार को परियोजना के डिजाइन, सामग्री की व्यवस्था और निर्माण की जिम्मेदारी सौंपती है।
- परियोजना की कुल लंबाई: 33.7 किमी।
- मुख्य विशेषताएं:
- चार-लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी परियोजना।
- ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 किमी लंबी ट्विन ट्यूब सुरंग का निर्माण।
- असम में NH-15 पर गोहपुर को NH-715 पर नुमालीगढ़ से जोड़ती है।
अंतरराष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन (ICDS 2026) का आयोजन भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु में बांध मरम्मत और सुधार परियोजना (DRIP) चरण-II और चरण-III के अंतर्गत किया गया।
बांध मरम्मत और सुधार परियोजना (DRIP) के बारे में
- उद्देश्य: भाग लेने वाले राज्यों में चयनित बाँधों की सुरक्षा बढ़ाना और भारत में बांध सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना।
- कार्यान्वयन एजेंसी: केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के माध्यम से केंद्रीय जल आयोग (CWC)।
- वित्तपोषण प्रणाली (बाहरी संस्था: हितधारक):
- विशेष श्रेणी के राज्य: 80:20
- सामान्य श्रेणी के राज्य: 70:30
- केंद्रीय एजेंसियां: 50:50 अनुपात।
- योजनावधि: 2021 से 2031 (DRIP चरण-II और चरण-III)
- DRIP चरण-I का कार्यान्वयन 2012 से 2021 के बीच किया गया था।
Article Sources
1 sourceभारत ने वित्त वर्ष 2025–26 में 50,000 मेगावाट से अधिक नई विद्युत उत्पादन क्षमता जोड़ी है।
- यह वित्त वर्ष 2024–25 में हासिल की गई 34,054 मेगावाट क्षमता के पिछले रिकॉर्ड से कहीं अधिक है।
भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता
- वर्तमान में भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 5,20,000 मेगावाट है। इसमें शामिल हैं:
- जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता: लगभग 2,48,500 मेगावाट,
- गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता: लगभग 2,72,000 मेगावाट,
- परमाणु ऊर्जा क्षमता: लगभग 8,800 मेगावाट,
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत: लगभग 2,63,200 मेगावाट।
उच्चतम न्यायालय ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से आग्रह किया है कि वह खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैक (FoP) लेबलिंग लगाने पर विचार करे, ताकि चीनी, वसा और सोडियम की उच्च मात्रा की स्पष्ट चेतावनी दी जा सके।
- फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग एक सरल और प्रमाण-आधारित पोषण लेबलिंग प्रणाली है। यह खाद्य पैकेट के अग्र भाग पर लगाई जाती है, ताकि उपभोक्ता सोच-समझकर और स्वास्थ्यप्रद उत्पाद खरीद सकें।
- भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (लेबलिंग और प्रदर्शन) संशोधन विनियम, 2025 के मसौदा में पोषण-जानकारी से जुड़े प्रावधान प्रस्तावित थे। हालांकि इन प्रावधानों पर सहमति नहीं बन पाई।
FSSAI के बारे में
- मंत्रालय: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय।
- सांविधिक निकाय: खाद्य संरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत गठित।
- दायित्व: विज्ञान-आधारित मानक तय करना और खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री व आयात को नियंत्रित कर सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- प्रमुख पहल: ईट राइट इंडिया।
- शासी-संरचना: खाद्य प्राधिकरण—एक अध्यक्ष और 22 सदस्य (जिसमें एक-तिहाई महिलाएं होनी चाहिए)।
G4 समूह ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधार और इसके विस्तार की अपनी मांग दोहराई है।
G4 समूह के बारे में
- सदस्य देश: भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान।
- मुख्य मांग: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी—दोनों श्रेणियों में सुधार और सदस्यता विस्तार करना।
- उद्देश्य: UNSC को अधिक प्रतिनिधि वाली, लोकतांत्रिक और वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाना
- समर्थन: अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया को जैसे विकासशील क्षेत्रों को अधिक प्रतिनिधित्व देना।
चीर तीतर (Cheer Pheasant) की संख्या में गिरावट के प्रमुख कारण अब भी शिकार और पर्यावास का क्षरण हैं।
चीयर तीतर (Catreus wallichii) के बारे में
- पर्यावास: ये मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालय के मध्य-पर्वतीय घास के मैदानों में प्राप्त होते हैं। ये पक्षी पाकिस्तान, भारत और नेपाल में देखे जा सकते हैं।
- “चीर” शब्द चीड़ पाइन वनों के पास इसकी उपस्थिति को दर्शाता है। वहीं ‘तीतर’ शिकार या क्रीड़ा पक्षियों के उस समूह को कहा जाता है जो अधिकतर भूमि पर रहने वाले पक्षी होते हैं।
- संरक्षण स्थिति:
- IUCN: वल्नरेबल
- CITES: परिशिष्ट–I में सूचीबद्ध
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची–I में सूचीबद्ध।
Article Sources
1 sourceRBI ने बैंकों को किसी कंपनी द्वारा अधिग्रहण हेतु वित्तपोषण (Acquisition Financing) की अनुमति देने के लिए अपने निर्देशों में संशोधन जारी किया है।
निर्देशों के प्रमुख बिंदु
- अब बैंक अपने पात्र पूंजी आधार का 20% तक अधिग्रहण हेतु वित्तपोषण (ऋण) कर सकते हैं।
- पहले यह सीमा 10% प्रस्तावित थी।
- अधिग्रहण: जब एक कंपनी दूसरी कंपनी में नियंत्रक (बहुसंख्यक) हिस्सेदारी खरीदती है; हालांकि अधिग्रहित कंपनी का अस्तित्व बना रह सकता है।
- बैंक अब स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के अधिग्रहण के लिए अधिग्रहण मूल्य का 75% तक ऋण दे सकते हैं।
- अधिग्रहण इक्विटी शेयरों या अनिवार्य परिवर्तनीय डिबेंचर (CCDs) के माध्यम से या दोनों के माध्यम से किया जा सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए डिफ़ॉल्ट हानि गारंटी (DLG) के उपयोग को फिर से बहाल कर दिया है।
- अब NBFC ऋण देने की वजह से होने वाली हानियों के लिए बफर (प्रावधान) तय करते समय डिफ़ॉल्ट हानि गारंटी को शामिल कर सकेंगी।
डिफ़ॉल्ट हानि गारंटी (DLG) के बारे में
- यह अनुबंध आधारित व्यवस्था है। इसमें कोई विनियमित संस्था और एक पात्र तीसरा पक्ष शामिल होता है।
- इस व्यवस्था में तीसरा पक्ष, ऋणी के ऋण वापस करने में डिफॉल्ट करने पर हुए नुकसान की भरपाई विनियमित संस्था को करने की गारंटी देता है।
- डिफ़ॉल्ट हानि गारंटी की सीमा: किसी भी पूर्व निर्धारित ऋण पोर्टफोलियो पर दिया गया कुल DLG कवर उस पोर्टफोलियो यानी ऋण राशि के अधिकतम 5% से अधिक नहीं हो सकता।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने अरुणाचल प्रदेश में कमला जलविद्युत परियोजना के निर्माण को मंजूरी देने की सिफारिश की है।
कमला जलविद्युत परियोजना के बारे में
- यह एक बहुउद्देशीय परियोजना है। इसके दो मुख्य लक्ष्य हैं—विद्युत उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण।
- परियोजना का प्रस्ताव राष्ट्रीय जलविद्युत शक्ति निगम लिमिटेड (NHPC) द्वारा दिया गया है।
- अवस्थिति: यह परियोजना कमला नदी पर प्रस्तावित है। यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के लोअर सुबनसिरी जिले में प्रस्तावित है।
- कमला नदी, सुबनसिरी नदी की दाहिने तट की प्रमुख सहायक नदी है।
- सुबनसिरी नदी आगे चलकर ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है।
- कुल स्थापित क्षमता: 1800 मेगावाट
- भूमिगत पावरहाउस: 1728 मेगावाट
- सतह आधारित पावरहाउस: 72 मेगावाट।