भारत के पास वर्तमान में लगभग 222 लाख मीट्रिक टन गेहूं और लगभग 380 लाख मीट्रिक टन चावल का भंडार है। इस तरह देश में कुल खाद्यान्न भंडार लगभग 602 लाख मीट्रिक टन है।
भारत में खाद्यान्न उत्पादन
- कृषि निर्यात 34.5 अरब डॉलर (वित्त वर्ष 2020) से बढ़कर 51.1 अरब डॉलर (वित्त वर्ष 2025) हो गया। इसमें प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी बढ़कर 20.4% हो गई है, जो मूल्य संवर्धन का संकेतक है।
- बागवानी उत्पादन 362.08 मिलियन टन तक पहुंच गया। यह खाद्यान्न उत्पादन से अधिक है। इस तरह यह प्रदर्शन उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है।
- भारत विश्व के प्रमुख उत्पादकों में शामिल है:
- दलहन (25.68 मिलियन टन), मिलेट्स और चावल (केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार) का सबसे बड़ा उत्पादक है, तथा
- गेहूं और फल-सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
- उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन में अग्रणी:
- मसाले और नारियल उत्पादन में प्रथम स्थान पर है;
- गन्ना, कपास और चाय उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।
बफर स्टॉक के बारे में
- बफर स्टॉक वह मात्रा है जिसमें सरकार खाद्यान्नों को खरीदकर और भंडारण करके सुरक्षित रखती है, ताकि आपातकालीन जरूरतों को पूरा किया जा सके, कीमतों को स्थिर रखा जा सके और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
- इससे जुड़े मानकों को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा तिमाही आधार पर तय किया जाता है।
- बफर स्टॉक के उद्देश्य:
- खाद्य सुरक्षा: सूखा, बाढ़ या फसल खराब होने की स्थिति में खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- मूल्य स्थिरीकरण: खाद्यान्न की कीमतों में अचानक वृद्धि या गिरावट को रोकना,
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली: गरीबों को रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना,
- आपातकालीन भंडार: संकट के समय सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करना।
