इस अधिसूचना के बाद अब ऐसी विदेशी कंपनियां जिनमें चीनी हिस्सेदारी 10% तक है, वे भारत में स्वचालित मार्ग (ऑटोमेटिक रूट) के तहत निवेश कर सकती हैं। यानी सरकार की पहले से स्वीकृति की जरूरत नहीं होगी।
- वर्ष 2020 में, भारत ने उन देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर अंकुश लगा दिया था जिनके साथ वह भूमि सीमा साझा करता है।
FDI नियमों में किए गए अन्य बदलाव:
- बीमा क्षेत्रक में 100% FDI: निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों और मध्यवर्तियों (जैसे ब्रोकरों में) को सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना (स्वचालित मार्ग) 100% FDI की अनुमति है।
- हालांकि, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में विदेशी निवेश की ऊपरी सीमा अभी भी 20% ही रहेगी।
- ये परिवर्तन आधिकारिक तौर पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 के द्वारा लागू किए गए थे।
- महत्व: भारत में विदेशी निवेश बढ़ेगा, व्यापार करना आसान होगा, अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, आदि। ।
भारत में FDI के लिए विनियामक ढांचा
- FDI को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के माध्यम से विनियमित किया जाता है।
- प्रशासन: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा।
- नोडल निकाय: केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED)।
- फेमा (FEMA) का उद्देश्य:
- विदेशी मुद्रा कानूनों को विनियमित और अद्यतन करना।
- विदेशी व्यापार, भुगतान और विदेशी निवेश को सुविधाजनक बनाना।
- सरकारी नीति के तहत भारत में एक स्थिर विदेशी मुद्रा बाजार का विकास और रखरखाव करना।
भारत में FDI के लिए प्रवेश मार्ग:
- स्वचालित मार्ग (Automatic Route): इसमें सरकार की पूर्व-स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती है।
- सरकारी मार्ग (Government Route): इस मार्ग के तहत निवेश करने से पहले सरकार की स्वीकृति लेनी पड़ती है।