भारत में ई-अपशिष्ट प्रबंधन | Current Affairs | Vision IAS

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पर्यावरण नीति मंथन में नीति-निर्माताओं ने विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility: EPR) के क्रियान्वयन में कमियों को उजागर किया। इन कमियों के कारण भारत लगभग ₹51,000 करोड़ मूल्य के पुनर्प्राप्त किए जा सकने वाले ई-अपशिष्ट संसाधनों को खो रहा है।

भारत में ई-अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित समस्याएं

  • नियमों का सही से क्रियान्वयन नहीं होना: ढीले नियमों के कारण नकली और गैर-कार्यरत पुनर्चक्रण इकाइयां फर्जी प्रमाणपत्रों के माध्यम से EPR बाजार को प्रभावित करती हैं।
  • अनौपचारिक क्षेत्र का प्रभाव: भारत में औपचारिक यानी संस्थागत पुनर्चक्रण दर 10% है, जबकि वैश्विक औसत (लगभग 22%) और अमेरिका (56%) में उच्च पुनर्चक्रण दर  है।
  • केवल बहुमूल्य धातुओं के पुनर्चक्रण पर ध्यान: EPR के तहत ई-अपशिष्ट पुनर्चक्रण मुख्य रूप से केवल स्वर्ण, तांबा, लोहा और एल्युमिनियम तक सीमित है।
  • अन्य समस्याएं: पुनर्चक्रण से संबंधित कौशल की कमी; अत्याधुनिक पुनर्चक्रण तकनीकों की सीमित उपलब्धता, अपशिष्ट संग्रह करने में अक्षमता, उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी, आदि।

भारत में ई-अपशिष्ट की वर्तमान स्थिति

  • भारत विश्व में तीसरा सबसे बड़ा ई-अपशिष्ट उत्पादक है।
  • उत्पादन में वृद्धि: ई-अपशिष्ट का उत्पादन 2020 के लगभग 2.76 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) से बढ़कर 2024 में लगभग 6.19 MMT हो गया।
  • 2030 तक इसके 14 MMT हो जाने का अनुमान है।

आगे की राह 

  • GST-लिंक्ड सत्यापन: पुनर्चक्रण से जुड़े दावों की सही जांच (ट्रेसबिलिटी) बढ़ाने और गड़बड़ियों को कम करने के लिए, इस प्रणाली को GST डेटा से जोड़ने की जरूरत है।
  • EPR कवरेज का विस्तार: अन्य उच्च-मूल्य वाली धातुओं और अति-महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) को इसके दायरे में लाना चाहिए।
  • अत्याधुनिक पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना: जैसे हाइड्रोमेटालर्जीएआई-आधारित पदार्थ पुनर्प्राप्ति प्रणाली का उपयोग करना चाहिए, आदि।
  • अन्य उपाय: 
    • अधिक संख्या में अधिकृत अपशिष्ट संग्रह केंद्रों की स्थापना करना; 
    • प्रशिक्षण, प्रमाणन और आर्थिक प्रोत्साहन के माध्यम से अनौपचारिक क्षेत्र के कचरा बीनने वालों को औपचारिक क्षेत्र में शामिल करना।

ई-अपशिष्ट प्रबंधन के लिए सरकारी उपाय

  • ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम, 2022: इसके तहत उत्पादकों और पुनर्चक्रण करने वालों के लिए EPR फ्रेमवर्क को मजबूत किया गया।
  • EPR ई-अपशिष्ट पोर्टल और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा विकसित यह प्लेटफॉर्म ई-अपशिष्ट के पंजीकरण, ट्रैकिंग और निगरानी के साथ-साथ EPR प्रमाणपत्र के व्यापार तंत्र को सुविधाजनक बनाता है।
  • बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम (BWMR), 2022: यह ई-अपशिष्ट संग्रह, पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग के लक्ष्य निर्धारित करता है तथा लैंडफिल में इन अपशिष्टों के निस्तारण और दहन पर प्रतिबंध लगाता है।
  • राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM): इसका लक्ष्य लिथियम-आयन बैटरी, ई-अपशिष्ट और औद्योगिक स्क्रैप से अति-महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की पुनर्प्राप्ति के लिए घरेलू पुनर्चक्रण क्षमता विकसित करना है।
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