दोहरे उपयोग वाले सैटेलाइट्स की वजह से आधुनिक अंतरिक्ष युद्ध की सीमाएं धुंधली होती जा रही है | Current Affairs | Vision IAS

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सैटेलाइट नेटवर्क पर बढ़ते साइबर हमले और GPS स्पूफिंग की घटनाओं ने दोहरे उपयोग वाले सैटेलाइट्स (सैन्य व असैन्य, दोनों उद्देश्यों के लिए) और आधुनिक अंतरिक्ष युद्ध से जुड़ी चुनौतियों पर विश्व का ध्यान आकर्षित किया है।

आधुनिक युद्ध में अंतरिक्ष की भूमिका

  • अर्थ: यह उन सैन्य गतिविधियों को दर्शाता है जो अंतरिक्ष में या अंतरिक्ष से की जाती हैं। इनका उद्देश्य सैटेलाइट्स और अन्य अंतरिक्ष संपदाओं को बाधित करना या नष्ट करना होता है।
    • इसमें काइनेटिक (एंटी-सैटेलाइट हथियार) और नॉन-काइनेटिक हथियार (साइबर युद्ध और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स - EMPs) शामिल हैं।
  • अंतरिक्ष युद्ध के परिणाम:
    • तेज और व्यापक प्रभाव: अंतरिक्ष में हथियारों की गति बहुत अधिक होती है, जिससे मिसाइलें अधिक तेज़ और सटीक हो जाती हैं। इससे संघर्ष तेजी से बढ़ सकता है।
    • सैन्य क्रियाकलाप: यह दूर से संचालित ड्रोन ऑपरेशनएंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) और मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग (MUMT) जैसे मिशनों को प्रभावित कर सकता है।
    • मलबे (Debris): नष्ट हुए सैटेलाइट्स के मलबे का एक छोटा सा टुकड़ा भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) जैसे अंतरिक्ष यान को नुकसान पहुंचा सकता है।
    • आवश्यक सेवाओं में व्यवधान: इनमें जीपीएस सिस्टम, बैंकिंग और पावर ग्रिड शामिल हैं, जिससे ब्लैकआउट जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

अंतरिक्ष में युद्ध रोकने के प्रमुख उपाय

  • बाह्य अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty, 1967): यह अंतरिक्ष में सामूहिक विनाश के हथियारों की तैनाती को प्रतिबंधित करती है।
  • देयता अभिसमय (Liability Convention, 1972): यह अभिसमय बाह्य अंतरिक्ष संधि के अनुच्छेद 7 का विस्तार करता है। यह अभिसमय प्रक्षेपण करने वाले देशों को उनके द्वारा पहुंचाए गए नुकसान के लिए पूर्ण रूप से जवाबदेह ठहराता है।
  • मून एग्रीमेंट, 1984: यह समझौता निर्धारित करता है कि चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों का उपयोग विशेष रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाए।
  • प्रमुख भारतीय पहलें: 
    • बाह्य अंतरिक्ष में भारतीय हितों की रक्षा के लिए रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (DSA) का गठन
    • भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) ने अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, आदि।
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भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-in)

यह भारत सरकार की एक एजेंसी है जो साइबर सुरक्षा खतरों और घटनाओं पर प्रतिक्रिया करती है। यह साइबर सुरक्षा घटनाओं की निगरानी करती है, सुरक्षा सलाह जारी करती है, और राष्ट्रीय स्तर पर साइबर सुरक्षा की स्थिति को मजबूत करने के लिए काम करती है।

रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (Defence Space Agency - DSA)

यह भारतीय सशस्त्र बलों की एक इकाई है जिसका गठन बाह्य अंतरिक्ष में भारत के सैन्य हितों की रक्षा और अंतरिक्ष-आधारित क्षमताओं के समन्वय के लिए किया गया है।

मून एग्रीमेंट, 1984 (Moon Agreement, 1984)

यह एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जो चंद्रमा और अन्य खगोलीय पिंडों के अन्वेषण और उपयोग को नियंत्रित करता है। यह इन खगोलीय पिंडों को सभी मानव जाति की विरासत घोषित करता है और उनके शांतिपूर्ण उपयोग पर जोर देता है।

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