इस विधेयक का उद्देश्य उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करना है। यह विधेयक पारित हो जाने के बाद उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या वर्तमान 33 से बढ़कर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश/CJI को छोड़कर) हो जाएगी।
संवैधानिक और विधिक पृष्ठभूमि
- संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत भारत में उच्चतम न्यायालय की स्थापना का प्रावधान है। साथ ही, संसद को समय-समय पर न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करने का अधिकार भी दिया गया है।
- संसद ने उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 के माध्यम से प्रारंभ में न्यायाधीशों की संख्या 10 (CJI को छोड़कर) निर्धारित की थी।
- इसके बाद 1977, 1986, 2008 और 2019 में संशोधनों के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि की गई।
न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया (कॉलेजियम प्रणाली)
संशोधित कानून लागू होने के बाद, उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश करेगा।
- भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI), कॉलेजियम के सदस्यों के साथ परामर्श करके, उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रस्ताव शुरू करते हैं।
- कॉलेजियम की सिफारिशें केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री को भेजी जाती हैं, जो उन्हें प्रधानमंत्री को सौंपते हैं।
- अंत में, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को न्यायाधीशों की औपचारिक नियुक्ति के लिए सलाह देते हैं।
न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का महत्व और आवश्यकता
- अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों के त्वरित निपटान में मदद मिलेगी, समय पर न्याय सुनिश्चित होगा और लंबित मामलों में कमी आएगी।
- वर्तमान में, उच्चतम न्यायालय में कुल 92,926 मामले लंबित हैं।