ILO की इस रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में युवाओं में बेरोजगारी बढ़ रही है। आर्थिक संवृद्धि की धीमी गति और रोजगार के कम अवसरों के कारण युवाओं के लिए नौकरी पाना मुश्किल हो रहा है। इसके चलते अधिक संख्या में युवा न तो रोजगार में हैं, न शिक्षा में और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर
- विश्व में युवा बेरोजगारी की स्थिति: 2025 में युवा बेरोजगारी दर बढ़कर 12.4% हो गई। इसका अर्थ है कि 15–24 वर्ष की आयु के लगभग 6.7 करोड़ युवा बेरोजगार थे।
- NEET युवाओं की बढ़ती संख्या: 2025 में NEET (न रोजगार में, न शिक्षा में और न प्रशिक्षण में/Not in Employment, Education, or Training) युवाओं की संख्या 20% यानी 25.7 करोड़ हो गई, जो 2023 की तुलना में 90 लाख अधिक है।
- लैंगिक असमानता: NEET युवाओं में दो-तिहाई से अधिक महिलाएं हैं।
- AI का प्रभाव: 15–29 वर्ष के युवाओं की लगभग 6.1% नौकरियाँ AI के कारण होने वाले कार्य-प्रतिस्थापन के उच्च खतरे का सामना कर रही हैं।
- युवा-बनाम-वयस्क बेरोजगारी अंतर: वर्ष 2025 में युवा-बनाम-वयस्क बेरोजगारी अनुपात 3.43 रहा। यानी युवाओं के बेरोजगार होने की संभावना वयस्कों की तुलना में 3 गुना से अधिक है।
प्रमुख चुनौतियां
- अनौपचारिक रोजगार और असुरक्षा: निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में लगभग प्रत्येक 10 में से 9 युवा श्रमिक अनौपचारिक रोजगार में हैं। उन्हें पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और आय की सुरक्षा नहीं मिलती।
- नौकरी के लिए अनुभव की बढ़ती मांग: डिजिटल भर्ती और ऑटोमेशन के कारण प्रवेश स्तर की नौकरियों (एंट्री लेवल जॉब्स) के लिए भी अनुचित या आवश्यकता से अधिक अनुभव मांगा जा रहा है।
- डिजिटल विषमता (डिजिटल डिवाइड): डिजिटल तकनीक का कम उपयोग AI के कारण नौकरियों के विस्थापन को कुछ हद तक कम करता है, लेकिन इससे विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ AI से मिलने वाली उत्पादकता के लाभ भी नहीं उठा पातीं। इससे वैश्विक असमानता बढ़ सकती है।
- लैंगिक बाधाएं: महिलाओं में NEET की उच्च दर के पीछे बिना अवैतनिक देखभाल कार्य, पर्याप्त बाल-देखभाल सुविधाओं की कमी और लैंगिक भेदभाव प्रमुख कारण हैं। यह समस्या विशेष रूप से दक्षिण एशिया, उत्तरी अफ्रीका और अरब देशों में अधिक दिखाई देती है।
मुख्य सुझाव
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