अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने “युवाओं के लिए वैश्विक रोजगार के रुझान 2026” शीर्षक से रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • वैश्विक युवा बेरोजगारी 2025 में 12.4% (67 मिलियन) तक पहुंच गई, जिसमें 'न तो शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और न ही प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं' वाले युवाओं का प्रतिशत 20% (257 मिलियन) था, जिससे महिलाओं पर असमान रूप से प्रभाव पड़ा।
  • चुनौतियों में अनौपचारिकता, नौकरी के अनुभव की अतिशयता, डिजिटल विभाजन और लैंगिक बाधाएं शामिल हैं, जबकि एआई युवाओं की 6.1% नौकरियों के लिए जोखिम पैदा करता है।
  • ये सिफारिशें रोजगार सृजन, कौशल विकास, रोजगार सेवाओं के आधुनिकीकरण, सामाजिक सुरक्षा और मानव-केंद्रित एआई प्रशासन पर केंद्रित हैं।

In Summary

ILO की इस रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में युवाओं में बेरोजगारी बढ़ रही है। आर्थिक संवृद्धि की धीमी गति और रोजगार के कम अवसरों के कारण युवाओं के लिए नौकरी पाना मुश्किल हो रहा है। इसके चलते अधिक संख्या में युवा न तो रोजगार में हैं, न शिक्षा में और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हैं।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • विश्व में युवा बेरोजगारी की स्थिति: 2025 में युवा बेरोजगारी दर बढ़कर 12.4% हो गई। इसका अर्थ है कि 15–24 वर्ष की आयु के लगभग 6.7 करोड़ युवा बेरोजगार थे।
  • NEET युवाओं की बढ़ती संख्या: 2025 में NEET (न रोजगार में, न शिक्षा में और न प्रशिक्षण में/Not in Employment, Education, or Training) युवाओं की संख्या 20% यानी 25.7 करोड़ हो गई, जो 2023 की तुलना में 90 लाख अधिक है।
  • लैंगिक असमानता: NEET युवाओं में दो-तिहाई से अधिक महिलाएं हैं।
  • AI का प्रभाव: 15–29 वर्ष के युवाओं की लगभग 6.1% नौकरियाँ AI के कारण होने वाले कार्य-प्रतिस्थापन के उच्च खतरे का सामना कर रही हैं।
  • युवा-बनाम-वयस्क बेरोजगारी अंतर: वर्ष 2025 में युवा-बनाम-वयस्क बेरोजगारी अनुपात 3.43 रहा। यानी युवाओं के बेरोजगार होने की संभावना वयस्कों की तुलना में 3 गुना से अधिक है।

प्रमुख चुनौतियां

  • अनौपचारिक रोजगार और असुरक्षा: निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में लगभग प्रत्येक 10 में से 9 युवा श्रमिक अनौपचारिक रोजगार में हैं। उन्हें पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और आय की सुरक्षा नहीं मिलती।
  • नौकरी के लिए अनुभव की बढ़ती मांग: डिजिटल भर्ती और ऑटोमेशन के कारण प्रवेश स्तर की नौकरियों (एंट्री लेवल जॉब्स) के लिए भी अनुचित या आवश्यकता से अधिक अनुभव मांगा जा रहा है।
  • डिजिटल विषमता (डिजिटल डिवाइड): डिजिटल तकनीक का कम उपयोग AI के कारण नौकरियों के विस्थापन को कुछ हद तक कम करता है, लेकिन इससे विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ AI से मिलने वाली उत्पादकता के लाभ भी नहीं उठा पातीं। इससे वैश्विक असमानता बढ़ सकती है।
  • लैंगिक बाधाएं: महिलाओं में NEET की उच्च दर के पीछे बिना अवैतनिक देखभाल कार्य, पर्याप्त बाल-देखभाल सुविधाओं की कमी और लैंगिक भेदभाव प्रमुख कारण हैं। यह समस्या विशेष रूप से दक्षिण एशिया, उत्तरी अफ्रीका और अरब देशों में अधिक दिखाई देती है। 

मुख्य सुझाव

  • रोजगार सृजन: लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए रोजगार बढ़ाने वाली नीतियाँ अपनाई जानी चाहिए तथा नए और ग्रीन सेक्टर्स में युवा महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जाने चाहिए।
  • कौशल विकास: गुणवत्तापूर्ण अप्रेंटिसशिप (प्रशिक्षुता) कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए और ऐसे कौशल कार्यक्रमविकसित किए जाएं, जिनमें तकनीकी कौशल के साथ मानव-केंद्रित कौशल भी शामिल हों।
  • रोजगार में परिवर्तन को आसान बनाना: सार्वजनिक रोजगार सेवाओं (PES) को आधुनिक बनाया जाए और युवाओं की भर्ती को बढ़ावा देने के लिए लक्षित भर्ती एवं वेतन सब्सिडी प्रदान की जाए।
  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाना सुनिश्चित करना: गिग, प्लेटफॉर्म और अनौपचारिक क्षेत्रक के श्रमिकों को ऐसी पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, जिसका लाभ वे नौकरी या स्थान बदलने पर भी ले सकें। साथ ही, पहली बार नौकरी की खोज करने वाले युवाओं को आवश्यक सहायता दी जाए।
  • मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस: भर्ती प्रक्रिया में AI के सुरक्षित और निष्पक्ष उपयोग के लिए सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं, ताकि एल्गोरिदम आधारित भेदभाव को रोका जा सके और महत्वपूर्ण निर्णयों में मानवीय निगरानी सुनिश्चित हो।
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मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस

मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस का अर्थ है कि AI प्रणालियों का विकास और उपयोग मानव कल्याण, निष्पक्षता और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए किया जाए। भर्ती प्रक्रियाओं में इसका अर्थ है AI-आधारित भेदभाव को रोकना और मानवीय निरीक्षण सुनिश्चित करना।

गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक

गिग श्रमिक वे होते हैं जो अल्पकालिक, अनुबंध-आधारित या फ्रीलांस काम करते हैं, जबकि प्लेटफॉर्म श्रमिक डिजिटल प्लेटफॉर्म (जैसे ऐप-आधारित सेवाएं) के माध्यम से काम करते हैं। इन्हें अक्सर अनौपचारिक श्रमिक माना जाता है और इन्हें पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है।

सार्वजनिक रोजगार सेवाएँ (PES)

सार्वजनिक रोजगार सेवाएँ (Public Employment Services) सरकारी एजेंसियां होती हैं जो नौकरी चाहने वालों को रोजगार खोजने, प्रशिक्षण और कैरियर परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करती हैं। इन सेवाओं का आधुनिकीकरण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।

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