नीति आयोग ने "भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने वाले प्रमुख क्षेत्रक" शीर्षक से रिपोर्ट जारी की | Current Affairs | Vision IAS

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In Summary

  • नीति आयोग ने रसायन, दूरसंचार और नेटवर्किंग उपकरण, वस्त्र और सौर पीवी विनिर्माण को भारत के विकास के लिए उच्च क्षमता वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना है।
  • चुनौतियों में रसायन और सौर पीवी में उच्च आयात निर्भरता, वस्त्र उद्योग में खंडित क्षमताएं और दूरसंचार उपकरणों में कम स्थानीयकरण शामिल हैं।
  • सिफारिशों में रसायनों के लिए व्यवहार्यता अंतर निधि, वस्त्रों के लिए अवसंरचनात्मक सहायता, दूरसंचार के लिए स्थानीयकरण प्रोत्साहन और सौर पीवी के लिए नीतिगत स्पष्टता शामिल हैं।

In Summary

नीति आयोग ने रसायन, दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उपकरण, वस्त्र और सौर फोटोवोल्टिक (PV) विनिर्माण को चार उच्च-क्षमता युक्त उन क्षेत्रकों के रूप में पहचाना है जो भारत के विनिर्माण विकास को गति दे सकते हैं।

क्षेत्रक

वर्तमान स्थिति

चुनौतियां

सुझाव

रसायन

वैश्विक रसायन बाजार में भारत की 3-3.5% हिस्सेदारी है, और यह विश्व में छठे स्थान पर है।

  • आयात पर अधिक निर्भरता (70–80%): APIs, मेथनॉल, एथिलीन और प्रोपिलीन जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए भारत आयात पर अधिक निर्भर है।
  • लॉजिस्टिक्स लागत अधिक है, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी होती है और भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कम होती है।
  • महत्वपूर्ण डाउनस्ट्रीम रसायनों के लिए व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण (VGF) और परिचालन व्यय (OPEX) सब्सिडी दी जाए, ताकि इन क्षेत्रकों में निवेश को बढ़ावा मिले।
  • एकीकृत PCPIRs विकसित किए जाएँ, जिनमें साझा सुविधाएँ, पाइपलाइन नेटवर्क, सामूहिक अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली और बंदरगाह से जुड़े रासायनिक हब शामिल हों।

 

वस्त्र

GDP में लगभग 2%, विनिर्माण GVA में 11% और व्यापारिक निर्यात में 9% योगदान देते हैं।

  • भारत का वस्त्र उत्पादन अभी भी काफी हद तक कपास पर निर्भर है, जो कुल उत्पादन का लगभग 65% है।
  • बुनाई और प्रसंस्करण के क्षेत्र में उत्पादन इकाइयाँ छोटी और बिखरी हुई हैं।
  • भारतीय निर्यातकों को अभी भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश और प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • MMF (मानव निर्मित फाइबर) के कच्चे माल की उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं को दूर किया जाए तथा कपास की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार किया जाए।
  • MSMEs के लिए बेहतर बुनियादी ढाँचा, तकनीकी उन्नयन तथा बड़े पैमाने पर बुनाई और प्रसंस्करण क्षमता विकसित की जाए।
  • वैश्विक बाजारों के साथ व्यापारिक एकीकरण को मजबूत किया जाए और चुनिंदा देशों के साथ लक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTAs) किए जाएँ।

 

दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उपकरण

भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है, जहां 120 करोड़ से अधिक टेलीकॉम ग्राहक, लगभग 85% टेलीकॉम पैठ (telecom penetration) और लगभग 75% लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं।

  • स्थानीय उत्पादन का स्तर कम होना: विशेषकर 4G और 5G रेडियो एक्सेस उपकरण जैसी उच्च-मूल्य वाली तकनीकों में भारत का स्थानीय उत्पादन अभी कम है।
  • निजी कंपनियों पर अधिक निर्भरता: दूरसंचार उपकरणों की लगभग 98% मांग निजी टेलीकॉम कंपनियों से आती है, जो आमतौर पर पहले से स्थापित वैश्विक कंपनियों (वैश्विक OEMs) के उपकरणों को प्राथमिकता देती हैं।
  • ऐसे प्रोत्साहन दिए जाएँ जो देश में उत्पादन और स्थानीयकरण का स्तर बढ़ाने से जुड़े हों।
  • तकनीक के हस्तांतरण के लिए वैश्विक OEMs और घरेलू कंपनियों के बीच संयुक्त उद्यम को प्रोत्साहित किया जाए।
  • ऐसे औद्योगिक क्लस्टर बनाए जाएँ, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन से लागत कम हो, पैमाने की अर्थव्यवस्था (Economies of Scale) का लाभ मिले और नवाचार के नेटवर्क मजबूत हों।

 

सौर फोटोवोल्टिक (PV)

मार्च 2025 तक भारत में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 106 गीगावाट (GW) हो चुकी थी

  • सोलर पैनल निर्माण में पॉलीसिलिकॉन के लिए 100% और वेफर के लिए 90% से अधिक आयात पर निर्भरता है।
  • R&D में निवेश कम होने के साथ-साथ आधुनिक मशीनरी और पूंजीगत वस्तुओं तक पहुँच भी सीमित है।
  • सरकार को दीर्घकालिक और स्थिर नीतियाँ बनानी चाहिए तथा ALMM (मॉडल और विनिर्माताओं की स्वीकृत सूची) का दायरा बढ़ाकर वेफर्स को भी इसमें शामिल करना चाहिए।
  • एक समर्पित सौर अनुसंधान एवं विकास (R&D) फंड बनाया जाए और प्रदर्शन-आधारित R&D प्रोत्साहन शुरू किए जाएँ।
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ALMM (Approved List of Models and Manufacturers)

A list maintained by the government specifying solar modules and manufacturers that meet quality and performance standards, intended to promote indigenous manufacturing.

R&D (Research and Development)

Activities undertaken by businesses or governments to innovate and introduce new products, processes, and services, or to improve existing ones.

पॉलीसिलिकॉन (Polysilicon)

यह सिलिकॉन का एक अत्यंत शुद्ध रूप है, जिसे पॉलीक्रिस्टलाइन सिलिकॉन भी कहा जाता है। इसका उपयोग सोलर फोटोवोल्टिक (PV) सेल और सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्माण में एक प्रमुख कच्चे माल के रूप में किया जाता है।

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